Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी2 पतरस 1:4 बाइबल पद की व्याख्या
2 पतरस 1:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
जिनके द्वारा उसने हमें बहुमूल्य और बहुत ही बड़ी प्रतिज्ञाएँ दी हैं ताकि इनके द्वारा तुम उस सड़ाहट से छूटकर जो संसार में बुरी अभिलाषाओं से होती है, ईश्वरीय स्वभाव के सहभागी हो जाओ।
2 पतरस 1:4 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
2 पतरस 1:4 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

यहेजकेल 36:25 (HINIRV) »
मैं तुम पर शुद्ध जल छिड़कूँगा, और तुम शुद्ध हो जाओगे; और मैं तुमको तुम्हारी सारी अशुद्धता और मूरतों से शुद्ध करूँगा। (इब्रा. 10:22)

इब्रानियों 12:10 (HINIRV) »
वे तो अपनी-अपनी समझ के अनुसार थोड़े दिनों के लिये ताड़ना करते थे, पर यह तो हमारे लाभ के लिये करता है, कि हम भी उसकी पवित्रता के भागी हो जाएँ।

संदर्भ और संक्षिप्त व्याख्या
2 पतरस 1:4 में प्रेरक पतरस बताता है कि ईश्वर ने विश्वासियों को "बहुमूल्य और बहुत ही बड़ी प्रतिज्ञाएँ" दी हैं ताकि वे सांसारिक बुरी इच्छाओं की सड़ाहट से बच कर "ईश्वरीय स्वभाव" के सहभागी बन सकें। यह वचन पत्र के समग्र विषय—आत्मिक परिपक्वता, पवित्रता और भविष्य की आशा—में केन्द्रित है। पतरस यहाँ प्रतिज्ञाओं को ईश्वर के परिवर्तक प्रभाव का माध्यम दर्शाता है जो क्रियाशील विश्वास के साथ विश्वासियों का जीवन बदल देता है।
केंद्रीय अर्थ
मुख्यतः यह पद बताता है कि ईश्वर की प्रतिज्ञाएँ केवल भावनात्मक आशा नहीं हैं, बल्कि वे वास्तविक कारण हैं जिनके द्वारा हम परमात्मा के गुणों में भागीदार बनते हैं। "सड़ाहट" शब्द से संकेत है कि संसारिक इच्छाएँ मन और चरित्र को भ्रष्ट कर देती हैं; परन्तु ईश्वरीय प्रतिज्ञाएँ हमें उन आदतों और प्रवृत्तियों से अलग कर देती हैं। यह वचन परिवर्तन के कारण और लक्ष्य दोनों को स्पष्ट करता: कारण—ईश्वर की प्रतिज्ञा; लक्ष्य—ईश्वरीय स्वभाव में भागीदारी।
मुख्य विषय
सम्बन्धित पठनीय स्थल (संक्षेप में व्याख्या)
इन्हें देखें ताकि संदर्भ और विषय अधिक स्पष्ट हो: यूहन्ना 17:17–19 — यीशु की प्रार्थना में पवित्रता और जीवनपात्र के लिए भेदीकरण का विचार; रोमियों 8:29 — मसीह की झाँकी के अनुरूप बनने का लक्ष्य; 1 कुरिन्थियों 15:49 — स्वर्गीय स्वरूप में रूपांतरण का संकेत। ये पद 2 पतरस 1:4 के विचार—परिवर्तन, मिसाल और अंतिम उद्देश्य—को और ठोस करते हैं।
व्यावहारिक चिंतन
इस वचन का अनुप्रयोग व्यावहारिक रूप में सरल पर निर्णायक है: प्रतिज्ञाओं पर टिके रहकर हमारी इच्छाओं का पुन: निर्माण होता है। कुछ साधारण कदम उपयोगी होंगे—दैनिक प्रार्थना और शास्त्र अध्ययन से ईश्वर की प्रतिज्ञाओं को आत्मसात करना; पापी प्रवृत्तियों की पहचान कर उन्हें परमेश्वर के सामर्थ्य में छोड़ना; और समुदाय में जवाबदेही बनाने से परिवर्तन स्थायी बनता है। यह न भूलें कि भागीदारी एक निरंतर प्रक्रिया है—ईश्वर हमें प्रतिज्ञाओं के द्वारा परिवर्तित कर रहा है, और हमें सहयोग करना है।
पुराने टिप्पणीकारों के संक्षिप्त उद्धरण
मैथ्यू हेनरी ने लिखा है, "प्रतिज्ञाएँ हमें वह शक्ति देती हैं जिससे हम पाप से अलग हो सकें।" (संक्षेप उद्धरण) अल्बर्ट बार्न्स बताते हैं कि प्रतिज्ञाएँ ईमानदारी से आश्वासन प्रदान करती हैं जो सदैव परिवर्तन की दिशा में कार्य करती हैं। एडम क्लार्क इस वचन को ईश्वर के सक्रिय और कृपालु हस्तक्षेप के रूप में देखते हैं जो मसीही जीवन को नई दिशा देता है।
संक्षेप
2 पतरस 1:4 का संदेश आश्वस्त और चुनौतीपूर्ण दोनों है: आश्वासन कि ईश्वर ने हमें परिवर्तन के साधन दिए हैं, और चुनौती कि हम उन साधनों का प्रयोग कर संसारिक इच्छाओं से अलग होकर ईश्वरीय स्वभाव में बढ़ें। प्रतिज्ञाएँ केवल विचार नहीं; वे जीवन बदलने वाले साधन हैं, और विश्वासी को उन्हें ग्रहण कर सक्रिय रूप से परमेश्वर के समान बनने की ओर अग्रसर रहना चाहिए।