2 पतरस 1:21 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

क्योंकि कोई भी भविष्यद्वाणी मनुष्य की इच्छा से कभी नहीं हुई पर भक्त जन पवित्र आत्मा के द्वारा उभारे जाकर परमेश्‍वर की ओर से बोलते थे।

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2 पतरस 1:21 पद-दर-पद बाइबल टीका

अर्थ का सीधे-साफ सार

2 पतरस 1:21 में कहा गया है कि भविष्यद्वाणी मानव की अपनी इच्छा से नहीं होती, बल्कि पवित्र आत्मा के प्रेरित होकर परमेश्वर की ओर से बोलती है। इसका अर्थ है कि प्रकाशन और भविष्यद्वाणी का आधार मानव विवेक नहीं, बल्कि परमेश्वर का अवतरण-प्रेरित विचार है और संदेश ईश्वर के कारण ही दर्शाते हैं।

प्रसंगभूमि और सन्दर्भ

यह शिक्षण बाइबिल के नवीन वचन के अंतर्गत पतरस के पत्रों में है, जहाँ वे ईसाई समुदाय को विश्वास के सुदृढ़ आधार और प्रेरित लेखन के विश्वसनीय स्रोत के बारे में बताते हैं। यह वाक्य विशेष रूप से संदेश के स्रोत की पवित्र सत्ता और मानव निर्भरता के संतुलन पर जोर देता है: प्रभु के भीतर दिब्यता के साथ जो कुछ लिखा गया है, वह मानवीय कलम से नहीं, पर परमेश्वर से उकेरा गया है।

व्याख्या के प्रमुख संकेत

  • भविष्यद्वाणी की उत्पत्ति: यह बात कि कोई भी भविष्यद्वाणी मानव की इच्छा से नहीं होती, मनुष्यों के विचार, जिन्दगी की योजनाओं या राजनीतिक दबावों से प्रेरित नहीं होती।
  • पवित्र आत्मा की भूमिका: प्रेरणात्मक स्रोत के रूप में आत्मा-उत्साह, देवत्व के द्वारा दिया गया संदेश और उद्धार का वास्तविक राजमार्ग।
  • परमेश्वर की ओर से बोलना: अभिव्यक्ति का उद्देश्य परमेश्वर की जय और उसकी योजनाओं को प्रकाशित करना है, ना कि मनुष्य की प्रतिष्ठा या स्वार्थ को बढ़ावा देना।

थीमैटिक बिंदु

  1. भविष्यद्वाणी का स्रोत: मानव विचार से नहीं, बल्कि स्वर्गीय प्रेरण से।
  2. आत्मा-प्रेरणा की विश्वसनीयता: संदेश विश्वसनीय है क्योंकि यह परमेश्वर के साथ मेल खाता है।
  3. उदेेश्य और लक्ष्य: उद्धार के संदेश को स्पष्ट और सत्यापित रखना—न कि राजनीतिक या व्यक्तिगत लाभ।

अन्य पवित्र ग्रंथ से सम्बन्ध (संक्षेप में)

यहोशू 1:8 के अनुसार कानून की कथन-धारा का विचारित पाठ निरंतर स्मरण और पालन पर है; यह दर्शाता है कि पत्थर-केवल शब्द नहीं, बल्कि परमेश्वर की प्रेरणा से संचालित है। इब्रानीयों 1:1-2 में बात सीधे कहती है कि परमेश्वर ने बहुधा, बहुविध तरीकों से अपने पिता के समय से पहले से प्रेरित किया है।

इतिहास-स्वरूप टिप्पणियाँ (संक्षेप में)

पैग़म्बरों के काल में लोग स्वयं अपनी योजनाओं से नहीं बोलते थे; वे पवित्र आत्मा के कार्य से सच बोलते थे। यह विचार अतीत के भगवान-परक संदेशों की ईमानदारी और उनके उद्धारक उद्देश्य को पुष्ट करता है।

प्रत्येक अनुभाग से एक छोटे cross-reference-स्वरूप निष्कर्ष

  • 2 पतरस 3:2 — पुराने भविष्यसूचनाओं के साथ नए वचनों की संगति का विचार।
  • यहूदा 1:17-18 — परमेश्वर के संदेश के स्रोत की स्पष्टता और मानवीय स्वार्थ से मुक्त होना।
  • 2 तीमुथियुस 3:16-17 — शास्त्र सभी प्रेरित है और शिक्षण के लिए पर्याप्त मार्गदर्शन देता है।

संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष

हर परिस्थिति में जो कहा गया है उसका परीक्षण करें—यह शास्त्र-आधारित सत्य है या नहीं। आत्मा के प्रेरित संदेश की पुष्टि के लिए बाइबिल की परिप्रेक्ष्य भाषा, मसीह-केन्द्रित उद्देश्य और जीवन-उद्धार के परिणाम देखिए। साथ ही समुदाय में सच और नम्र भावना से प्रस्तुत करें, ताकि विश्वास मजबूत हो और परमेश्वर की महिमा बढ़े।

उद्धरण के लिए: इस पाठ पर Matthew Henry, Albert Barnes एवं Adam Clarke के प्रकाशित टिप्पणीकारों से उपलब्ध कथनों का उपयोग प्रत्यक्ष उद्धरण के रूप में दिया गया हो तो वही शॉर्ट-फॉरम में शामिल किया गया है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

2 पतरस 1:21 समानांतर पद और संबंधित वचन

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और बालकपन से पवित्रशास्त्र तेरा जाना हुआ है, जो तुझे मसीह पर विश्वास करने से उद्धार प्राप्त करने के लिये बुद्धिमान बना सकता है।

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उन्होंने इस बात की खोज की कि मसीह का आत्मा जो उनमें था, और पहले ही से मसीह के दुःखों की और उनके बाद होनेवाली महिमा की गवाही देता था, वह कौन से और कैसे समय की ओर संकेत करता था। (2 पत. 1:21, यशा. 52:13-14, लूका 24:25-27)

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जैसे उसने अपने पवित्र भविष्यद्वक्ताओं के द्वारा जो जगत के आदि से होते आए हैं, कहा था,

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