Old Testament
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2 तीमुथियुस 3:15 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और बालकपन से पवित्रशास्त्र तेरा जाना हुआ है, जो तुझे मसीह पर विश्वास करने से उद्धार प्राप्त करने के लिये बुद्धिमान बना सकता है।
2 तीमुथियुस 3:15 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
2 तीमुथियुस 3:15 समानांतर पद और संबंधित वचन
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नीतिवचन 22:6 (HINIRV) »
लड़के को उसी मार्ग की शिक्षा दे जिसमें उसको चलना चाहिये, और वह बुढ़ापे में भी उससे न हटेगा। (इफिसियों. 6:4)

भजन संहिता 119:98 (HINIRV) »
तू अपनी आज्ञाओं के द्वारा मुझे अपने शत्रुओं से अधिक बुद्धिमान करता है, क्योंकि वे सदा मेरे मन में रहती हैं।

2 तीमुथियुस 3:15 का स्पष्ट भावार्थ (HINIRV)
पद स्पष्ट करता है कि युवा तीमुथियुस अपने बचपन से ही पवित्र शास्त्रों की शिक्षा से प्रभाव में रहा है। यह अवसर-उन्मुख नहीं, बल्कि स्थाई आध्यात्मिक साधना की शुरुआत का संकेत है: “जो तुझे मसीह पर विश्वास करने से उद्धार प्राप्त करने के लिये बुद्धिमान बना सकता है।” यहाँ शास्त्र का प्रभाव व्यक्ति को उद्धार की राह पर चलाने वाला साधन है, जो उसे जीवन-निर्माण और विश्वास में स्थिर बनाता है।
मूल संदेश का केंद्रीय अर्थ
युवा तीमुथियुस के लिए पवित्र शास्त्रों की बचपन से परिचित होना उद्धार तक पहुँचने की बुद्धिमान तैयारी मानी जाती है। यह बताता है कि धार्मिक प्रशिक्षण और साक्ष्य-आधारित शिक्षा कैसे व्यक्ति को मसीह में विश्वास के रास्ते पर अग्रसर करती है। शास्त्रों की गहराई और देवत्व-आधारिता ही मसीह यीशु पर विश्वासी को टिके रहने और उद्धार में सहयोग देती है।
तीन प्रमुख विषय
संबंधित स्पष्ट संदर्भ
1) इब्रानी 4:12: शास्त्र की तलवार जैसी धार—मन और विचारों को विभाजित कर सच को उजागर करती है।
2) यशायाह 55:11: ईश्वर के वचन जो जिसे वह कहता है वही परिणाम देता है—उद्धार और परिवर्तन का प्रभाव स्पष्ट होता है।
3) रोमियों 10:17: विश्वास की वृद्धि शास्त्र के सुनने से होती है—बोधशीलता और उद्धार की दिशा मिलती है।
व्यावहारिक विचार
हमारे जीवन में शास्त्र का स्थान: एक नियमित अध्ययन, प्रार्थना और आचरण—ताकि युवाओं से लेकर बुजुर्ग तक का जीवन मसीह के लिए प्रस्तुत हो। यदि आप माता-पिता या शिक्षक हैं, तो बच्चों और विद्यार्थियों के लिए शास्त्री-निर्देशन को प्रेरणास्त्रोत बनाए रखें; यदि आप अभी शुरुआत कर रहे हैं, तो छोटे पाठों से शुरू कर के विश्वास के अणु बनाते जाएँ।
संक्षिप्त समापन
यह पद इस बात की पुष्टि करता है कि पवित्र शास्त्र का अनुशीलन कैसे एक व्यक्ति को मसीह यीशु पर विश्वास के मार्ग पर अग्रसर करने में सक्षम होता है—उद्धार के लिए बुद्धिमान बनाना। यह ध्यान हमें याद दिलाता है कि शुरुआत से चलना और शास्त्र के अनुरूप जीवन जीना कितनी उच्चतम कृपा है।
पक्का उद्धरण (संदर्भित विचारों से)
यह commentary Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke जैसे सार्वजनिक-डोमेन स्त्रोतों के विचारों को समेकित करता है। यदि आप चाहें तो नीचे एक संक्षेप सार भी देखें जो इन विचारों से प्रेरित है:
“पवित्र शास्त्र तुझे बुद्धिमान बना सकता है”—यह उद्धार की दिशा में एक निश्चयात्मक मार्ग है, जहाँ ज्ञान और विश्वास एक साथ काम करते हैं।