Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी2 तीमुथियुस 3:9 बाइबल पद की व्याख्या
2 तीमुथियुस 3:9 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
पर वे इससे आगे नहीं बढ़ सकते, क्योंकि जैसे उनकी अज्ञानता सब मनुष्यों पर प्रगट हो गई थी, वैसे ही इनकी भी हो जाएगी।
2 तीमुथियुस 3:9 पद-दर-पद बाइबल टीका
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2 तीमुथियुस 3:9 समानांतर पद और संबंधित वचन
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2 तीमुथियुस 3:8 (HINIRV) »
और जैसे यन्नेस और यम्ब्रेस* ने मूसा का विरोध किया था वैसे ही ये भी सत्य का विरोध करते हैं ये तो ऐसे मनुष्य हैं, जिनकी बुद्धि भ्रष्ट हो गई है और वे विश्वास के विषय में निकम्मे हैं। (प्रेरि. 13:8)

निर्गमन 7:12 (HINIRV) »
उन्होंने भी अपनी-अपनी लाठी को डाल दिया, और वे भी अजगर बन गए। पर हारून की लाठी उनकी लाठियों को निगल गई।

यिर्मयाह 28:15 (HINIRV) »
यिर्मयाह नबी ने हनन्याह नबी से यह भी कहा, “हे हनन्याह, देख यहोवा ने तुझे नहीं भेजा, तूने इन लोगों को झूठी आशा दिलाई है।
मुख्य interpretive बिंदु
2 तीमुथियुस 3:9 में प्रेरित पवित्र शास्त्र के पथ पर प्रचार में आने वाली प्रवृत्ति पर संकेत है: जिन्हें वे अज्ञानता के कारण समय के साथ उभरते दिखते हैं, वे अंततः निष्कर्षतः अपनी स्थिति खो देंगे। इस वचन में यह साक्ष्य मिलता है कि इमानदार शिक्षण की जगह कठोर अज्ञानता और दुष्प्रचार फैलाने वाले लोग समय के साथ अपनी पकड़ खो देते हैं, क्योंकि सत्य की प्रगटता अंततः सत्य को दृढ़ करता है।
साहित्यिक संदर्भ की रूपरेखा
पद 9 में पवित्र लेखक स्पष्ट करता है कि कुछ लोग, जो पहले अज्ञानता के कारण प्रभावी नहीं बनते थे, वे अंततः अपने ही अज्ञान से उजागर होकर विफल हो जाते हैं। यह पाठ उन लोगों के लिए चेतावनी है जो सत्य से विमुख रहते हैं और अपने शब्दों या विचारों के साथ कब्रिस्तान जैसा प्रभाव डालते रहते हैं।
धार्मिक-तत्व और थीसिस
• सत्य की प्रगटता के साथ, अज्ञानता का ढोंग ढहता है: यह पवित्र ग्रंथ की एक सामान्य धारणा है कि समय के साथ सत्य की पकड़ मजबूत होती है और मिथ्या धारणा ढह जाती है।
• स्थिरता बनाम अविश्वास: जो लोग अज्ञानता को अपनी सुरक्षा-रेखा मानते हैं, वे अंततः अपनी अस्थिरता दिखाते हैं, क्योंकि ऊपरवाला सत्य का प्रकाश हर जगह फैला है।
अनुशीलनित cross-रेफरेंसेस
उपरोक्त संदर्भ यह दिखाते हैं कि अज्ञानता की ढाल समय के साथ ढहती है और कर्मों के परिणाम सत्य के प्रकाश से सामने आते हैं।
जीवन-विचार के प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
पद 9 सूचित करता है कि अज्ञानता अपने आप में एक अस्थिर अवस्था है जो समय के साथ निष्क्रिय नहीं रहती, बल्कि सत्य के उजाले में परास्त हो जाती है। एक विश्वासी के लिए यह स्मरण है कि हमारी शिक्षा और जीवन का आधार सत्य के अनुरूप ढाला जाना चाहिए, ताकि ढोंग और गलतफहमी टिक न पायें।
नोट ऑन उद्धरण
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