Old Testament
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2 तीमुथियुस 3:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
वे भक्ति का भेष तो धरेंगे, पर उसकी शक्ति को न मानेंगे; ऐसों से परे रहना।
2 तीमुथियुस 3:5 पद-दर-पद बाइबल टीका
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2 तीमुथियुस 3:5 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यशायाह 29:13 (HINIRV) »
प्रभु ने कहा, “ये लोग जो मुँह से मेरा आदर करते हुए समीप आते परन्तु अपना मन मुझसे दूर रखते हैं, और जो केवल मनुष्यों की आज्ञा सुन सुनकर मेरा भय मानते हैं, (मत्ती 15:8,9, मर. 7:6,7)

तीतुस 1:16 (HINIRV) »
वे कहते हैं, कि हम परमेश्वर को जानते हैं पर अपने कामों से उसका इन्कार करते हैं*, क्योंकि वे घृणित और आज्ञा न माननेवाले हैं और किसी अच्छे काम के योग्य नहीं।

मत्ती 23:27 (HINIRV) »
“हे कपटी शास्त्रियों, और फरीसियों, तुम पर हाय! तुम चूना फिरी हुई कब्रों* के समान हो जो ऊपर से तो सुन्दर दिखाई देती हैं, परन्तु भीतर मुर्दों की हड्डियों और सब प्रकार की मलिनता से भरी हैं।
2 तीमुथियुस 3:5 पर धर्मात्मक दृष्टिकोण
इस पद में प्रेरित पौलुस उत्तर-युग के उन व्यक्तियों की एक विशिष्ट पहचान को लिखते हैं जो धर्म का आभूषण धारण करते हैं, परन्तु उनके भीतर ईश्वर-आस्था की वास्तविक शक्ति नहीं रहती। यह चेतावनी केवल पूर्व-आख्यान के संदर्भ में नहीं है, बल्कि हर युग के विश्वासियों के लिए है—कि हमारे जीवन में भक्ति-शिष्टाचार के साथ साथ वास्तविक परिवर्तन और पवित्र जीवन आवश्यक है।
पद का पाठ और उसका संदर्भ
पद है: वे भक्ति का भेष तो धरेंगे, पर उसकी शक्ति को न मानेंगे; ऐसों से परे रहना।
यह वाक्य 2 तीमुथियुस के पासोलस-समूह के संदर्भ में लिखा गया है, जहाँ परमेश्वर के अगुआ लोग समय के साथ धर्म के रूप-रंगों को अपनाते हैं परन्तु आत्मिक परिवर्तन, प्रेम, धीर-धार्य और अनुशासन जैसी शक्ति को भूल जाते हैं।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
अन्य पवित्र ग्रंथों से तुलनात्मक दृष्टिकोण
प्रेरित पौलुस की यह चेतावनी इस बात को पुष्ट करती है कि विश्वास में आस्था और कर्मों की संगति अनिवार्य है, जैसे कि याकूब 2:26 बताता है कि ईश्वर के साथ जीवित आस्था बिना कर्मों के मृत है। सम्भव है कि कुछ लोग रूप-रंग से पवित्रता दिखाएँ, परन्तु उनके व्यवहार और चरित्र में ईश्वर की शक्ति न हो।
इब्रानियों 12:14 कहता है कि सभी के लिए पवित्र जीवन और शांति की खोज करो; यही वास्तविक भक्ति की गारंटी है, न कि दिखावे के आवरण।
एक ठोस अनुप्रयोग
मैथ्यू हेनरी, एलबर्ट बार्न्स, एडम क्लार्क से संक्षेप लाभ
हेनरी का सार यह है कि धर्म-भविष्य का आकर्षण धोखाधड़ी है जब वास्तविक परिवर्तन नहीं होता; प्रभु के साथ गहराई से संबंध आवश्यक है।
बार्न्स नोट करते हैं कि बहाना बनाते लोग आंतरिक शक्ति छोड़कर outward दिखावे पर निर्भर रहते हैं, जिससे ईश्वर की कृपा खो जाती है।
क्लार्क समझाते हैं कि यह दूरी बाहरी पवित्रता और आंतरिक सम्बंध के बीच की वास्तविक दूरी है; केवल रूप-रंग नहीं, बल्कि परिवर्तनशील चरित्र चाहिए।
क्रॉस-रेफरेंसेज और उनका छोटा स्पष्टीकरण
याकूब 2:14-17 की धारणा: आस्था यदि कर्मों के साथ नहीं है, वह मृत है—यह इस पद के साथ संगति प्रस्तुत करती है।
2 कुरिन्थियों 6:6-7 में शक्ति और सच्चे गुणों की अनुराधना है—धैर्य, प्रेम, और सत्य के साथ जीवन जीना।
रोमियों 12:9-12, 2 पतरस 1:5-8 भी भक्ति के भीतर नैतिक गुणों की वृद्धि का आह्वान करते हैं।
सार-सारांश
यह verse स्पष्ट करता है कि हमारे धर्म-जीवन को केवल दिखावे तक नहीं सीमित रखा जा सकता। यदि भक्ति के साथ वास्तविक परिवर्तन, प्रेम, नम्रता और शक्ति न हो, तो वह भक्ति आकार नहीं धारण कर पाती। इसलिए वर्तमान हर दिन में हमें आत्म-निज-चेतना के साथ परमेश्वर की शक्ति को प्रवाहित करने की कोशिश करनी चाहिए, ताकि हमारा जीवन सचमुच ईश्वर के सामने सच्चे नमूने के रूप में हो सके।