Old Testament
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2 तीमुथियुस 3:14 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
पर तू इन बातों पर जो तूने सीखी हैं और विश्वास किया था, यह जानकर दृढ़ बना रह; कि तूने उन्हें किन लोगों से सीखा है,
2 तीमुथियुस 3:14 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
2 तीमुथियुस 3:14 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 थिस्सलुनीकियों 2:13 (HINIRV) »
इसलिए हम भी परमेश्वर का धन्यवाद निरन्तर करते हैं; कि जब हमारे द्वारा परमेश्वर के सुसमाचार का वचन तुम्हारे पास पहुँचा, तो तुम ने उसे मनुष्यों का नहीं, परन्तु परमेश्वर का वचन समझकर (और सचमुच यह ऐसा ही है) ग्रहण किया और वह तुम में जो विश्वास रखते हो, कार्य करता है।

2 तीमुथियुस 2:2 (HINIRV) »
और जो बातें तूने बहुत गवाहों के सामने मुझसे सुनी हैं, उन्हें विश्वासी मनुष्यों को सौंप दे; जो औरों को भी सिखाने के योग्य हों।

2 तीमुथियुस 1:13 (HINIRV) »
जो खरी बातें तूने मुझसे सुनी हैं उनको उस विश्वास और प्रेम के साथ जो मसीह यीशु में है, अपना आदर्श बनाकर रख।
2 तीमुथियुस 3:14 पर दृष्टिकोण: दृढ़ता और शिक्षा का महत्व
यह पंक्ति पौलुस द्वारा तीमुथियुस को लिखी गई एक व्यक्तिगत स्मरण है जिसमें प्रेरित-शिक्षक पिता-पुत्र जैसे सम्बन्ध की गर्मी है। संदेश स्पष्ट है: जिन बातों पर तू प्रवृत्त है और जिन बातों पर तूने भरोसा किया है, उनमें स्थिर रहना चाहिए, और उन स्रोतों को याद रखना चाहिए जिनसे यह ज्ञान मिला।
प verse के भीतर उसका स्थान
पौलुस यह बताने के लिए तीमुथियुस के पास आया है कि समय के साथ आनेवाली कठिनाइयों के बीच भी गेय-योजनाओं, सच्चाई और विश्वास पर अडिग रहना शिक्षा का मूल है। यह चेतावनी नहीं, बल्कि भरोसेमंद स्मरण है कि ईमानदारी, पवित्र लेखन और निष्ठा से मिला ज्ञान व्यक्ति की दिशा तय करते हैं।
मुख्य आध्यात्मिक शिक्षा
अनुसंधानात्मक तुलनात्मक संदर्भ
यह संदेश अन्य बाइबल पाठों में भी सतर्कता, दृढ़ताय और पवित्र शिक्षाओं के पालन की ओर इशारा करता है:
इन संदर्भों में समान तत्त्व वह है कि सीखना तब तक 活ित रहता है जब वह अनुशासन और स्मृति में सुरक्षित रहता है।
व्यावहारिक अनुप्रमाण (Application)
1) स्मरण-प्रयोजन: प्रतिदिन उन बातों को समीक्षा करें जिन्हें आपने सीखा है—वे कहाँ से आईं, किसने सिखाया, और किस तरह वे आपके चरित्र-जीवन को ढालती हैं।
2) स्रोत-निर्देशन: जिन सद्गत शिक्षकों या उदाहरणों से प्रेरणा मिली, उनकी मान-घटना को न छोड़ें; उनके साक्ष्यों को अपने व्यवहार में उतारें।
3) कठिन समय में स्थिरता: कठिन दौरों में भी सत्य पर अडिग रहना—निराशा के क्षणों में भी प्रभु की शिक्षा आपके मार्गदर्शक बने।
संकेतक उद्धरण (शुद्धता की दिशा)
यदि उपलब्ध हो, नीचे के दायरे में केवल Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के शुद्ध असंदिग्ध कथन से जिक्र किया जाएगा:
कथा-सार: यह संदेश एक मार्गदर्शक स्मरण है — जो तूने सीखा है, उसे जीवंत रख।
टिप्पणी-चिह्न: “यह सतर्कता दीर्घकालिक विश्वास के लिए है; शिक्षा केवल ज्ञान तक सीमित नहीं है, वह जीवन के ढांचे को बनाती है।”
छोटे cross-reference और उनका संक्षेप में स्पष्टीकरण
संक्षेप: यह वचन तीमुथियुस के लिए एक करुण-उत्साह है कि जो बातों पे तू विश्वास करता है और जिन्हें उसने तेरे स्रोतों से सीखा, उन्हीं पर कायम रह। यह शिक्षण-प्रशिक्षण का सार है—यही विश्वास का स्थायित्व बनाते हैं और जीवन के हर मोड़ पर दिशानिर्देशन देते हैं।
सार: स्मृति, स्रोत-आदर और दृढ़ता—ये तीनों मिलकर एक विश्वसनीय ईमानदार जीवन बनाते हैं जो कठिन समय में भी प्रभु के साथ अडिग रहता है।