Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी2 तीमुथियुस 3:16 बाइबल पद की व्याख्या
2 तीमुथियुस 3:16 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
सम्पूर्ण पवित्रशास्त्र परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है* और उपदेश, और समझाने, और सुधारने, और धार्मिकता की शिक्षा के लिये लाभदायक है,
2 तीमुथियुस 3:16 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
2 तीमुथियुस 3:16 समानांतर पद और संबंधित वचन
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रोमियों 15:4 (HINIRV) »
जितनी बातें पहले से लिखी गईं, वे हमारी ही शिक्षा के लिये लिखी गईं हैं कि हम धीरज और पवित्रशास्त्र के प्रोत्साहन के द्वारा आशा रखें।

इब्रानियों 4:12 (HINIRV) »
क्योंकि परमेश्वर का वचन* जीवित, प्रबल, और हर एक दोधारी तलवार से भी बहुत तेज है, प्राण, आत्मा को, गाँठ-गाँठ, और गूदे-गूदे को अलग करके, आर-पार छेदता है; और मन की भावनाओं और विचारों को जाँचता है। (यिर्म. 23:29, यशा. 55:11)

2 पतरस 1:19 (HINIRV) »
और हमारे पास जो भविष्यद्वक्ताओं का वचन है, वह इस घटना से दृढ़ ठहरा है और तुम यह अच्छा करते हो, कि जो यह समझकर उस पर ध्यान करते हो, कि वह एक दीया है, जो अंधियारे स्थान में उस समय तक प्रकाश देता रहता है जब तक कि पौ न फटे, और भोर का तारा तुम्हारे हृदयों में न चमक उठे।
2 तीमुथियुस 3:16 पर दृष्टिकोण: सम्पूर्ण पवित्रशास्त्र परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है
मुख्य_interp_pts_: इस वचन का केंद्र यह है कि ईश्वर के प्रेरित शब्द सभी गलत विचारों से मुक्त, शिक्षात्मक और जीवन-चरित के लिए उपयोगी हैं। यह शास्त्र को न सिर्फ धार्मिक पठन के लिए, बल्कि भाषा-जीवन के हर आयाम के सुधार हेतु आवश्यक मानता है।
पाठक संदर्भ: साहित्यिक संदर्भ
पद में पवित्रशास्त्र के बारे में चारों उपयोग दर्शाए गए हैं: उपदेश (ड्रॉइंग बनाम आचरण की शिक्षा), समझाने (गहराई से विचार-विमर्श करना), सुधारना (यथार्थ परिवर्तन के लिए मार्गदर्शन), और धार्मिकता की शिक्षा (आदर्श गुणों की शिक्षा)। पैग़ंबर-उत्पत्ति के लिए यह स्पष्ट करता है कि शास्त्र का उद्देश्य सत्य को पकड़ना और आचरण को ढालना है, ताकि विश्वासी जीवन ईश्वर के अनुरूप हो सके।
धार्मिक और शास्त्रीय महत्व
यह शास्त्र के प्रेरित होने के दायरे को प्रतिष्ठित करता है: परमेश्वर ने इसे प्रेरित किया है, इसलिए इसका मानक अडिग है। प्रेरणा का अर्थ है कि मानव लेखक भी अपने स्वभाव के साथ अंतःकरण से प्रेरित होकर लिखते हैं, और परिणामस्वरूप पाठक को सत्य, नियम और आचार की स्पष्ट दिशा मिलती है। इससे विश्वासियों के लिए नियमों की अंतिम सत्ता परमेश्वर की इच्छानुसार स्थापित होती है, न कि मनुष्य की कल्पनाओं से।
कथा-आधार और साहित्यिक संरचना
पद में चार अनुदेशात्मक उपयोग सूचीबद्ध हैं, जिनमें से प्रत्येक एक चरण की तरह कार्य करता है: (1) उपदेश—सीखने और सुनने की प्रारंभिक आवश्यकता; (2) समझाने—तथ्यों को स्पष्ट करना; (3) सुधारना—कर्तव्य-व्यवहार के चिह्न; (4) धार्मिकता की शिक्षा—जीवन का समग्र मार्गदर्शन। इस क्रम से पाठक अपने विश्वास का ताना-बाना शास्त्र के प्रकाश में पाते हैं।
केंद्रीय theological संदेश
कठिन समय के नमूने में भी, शास्त्र की विश्वसनीयता सामने आती है: यह दूषित विचारों के खिलाफ एक ठोस आधार है। धार्मिक जीवन में शास्त्र के कारण स्पष्ट नियम और आचरण के मानक मिलते हैं, ताकि विश्वासी समाज में सत्य और प्रेम एक समान रूप से प्रकट हो।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप में)
- "यही शास्त्र सदैव उपयुक्त है" जैसे अन्य प्रमाणों के साक्ष्य में उद्धृत विचार का सम्बन्ध मिलता है।
- पवित्रशास्त्र की प्रेरणा का सिद्धांत पुराने नियम के संकेतों और नए नियम के पूर्ण संदेशों के बीच समन्वय दिखाता है।
- अधिकार-नैतिकता के विषय में प्रेरित शास्त्र का उद्देश्य नयी पीढ़ी को भी धर्मी जीवन के मार्ग दिखाना है।
विचार-विमर्श के प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
2 तीमुथियुस 3:16 यह स्पष्ट करता है कि परमेश्वर की प्रेरित शब्द न केवल ज्ञान देता है, बल्कि उपदेश, मार्गदर्शन, सुधार और धार्मिकता की शिक्षा भी प्रदान करता है। यह विश्वासियों के लिए धुरी है, जो जीवन के हर पहलू में सही दिशा और गुणों के निर्माण का आधार बनती है।
नोट: इस पाठ के भीतर Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन विचारों से संकुल प्रेरणा समाहित है। यदि आप इनमें से किसी भी टिप्पणीकार के विशिष्ट उद्धरण चाहते हैं, तो मैं उन्हें संक्षेप में प्रदर्शित कर सकता/सकती हूँ।