Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 थिस्सलुनीकियों 2:1 1 थिस्सलुनीकियों 2:2 1 थिस्सलुनीकियों 2:3 1 थिस्सलुनीकियों 2:4 1 थिस्सलुनीकियों 2:5 1 थिस्सलुनीकियों 2:6 1 थिस्सलुनीकियों 2:7 1 थिस्सलुनीकियों 2:8 1 थिस्सलुनीकियों 2:9 1 थिस्सलुनीकियों 2:10 1 थिस्सलुनीकियों 2:11 1 थिस्सलुनीकियों 2:12 1 थिस्सलुनीकियों 2:13 1 थिस्सलुनीकियों 2:14 1 थिस्सलुनीकियों 2:15 1 थिस्सलुनीकियों 2:16 1 थिस्सलुनीकियों 2:17 1 थिस्सलुनीकियों 2:18 1 थिस्सलुनीकियों 2:19 1 थिस्सलुनीकियों 2:20



1 थिस्सलुनीकियों 2:13 — संदेश और समझ
यह पद तुम्हारे पास परमेश्वर के सुवचन के प्रभावी आना और वह कैसे तुम्हारे आस्थागत जीवन को बनाता है, इसका परिचय देता है। प्रेरित पौलुस यहाँ थिस्सलुनीका के विश्वासियों के प्रति धन्यवाद व्यक्त करते हैं क्योंकि उन्होंने सुसमाचार के वचन को मनुष्यों के प्रचार के रूप में नहीं, परमेश्वर के वचन के रूप में ग्रहण किया और इसे मानकर विश्वास किया। यह वचन उनके जीवन में क्रियाशील बन गया—यही संकेत है कि परमेश्वर ने उनके दिलों में काम किया है।
ईश्वर बनाम मानव वचन: परमेश्वर का वचन कृपा से प्रभावी
पौलुस इस पाठ में यह बताते हैं कि यह सुनना और ग्रहण करना एक बाहरी संचार नहीं रहा, बल्कि परमेश्वर की सत्ता के साथ आंतरिक परिवर्तन है। वे स्वीकार करते हैं कि समय के साथ वे इसे “परन्तु परमेश्वर का वचन समझकर” ग्रहण करते हैं; यही ग्रहण, केवल बुद्धि-सम्मत समझ नहीं, बल्कि अन्तरात्मा की धवनि है जो विश्वास को प्रेरित करती है।
आमतौर पर समझे जाने वाले कठिन शब्द
प्रमुख आयत-सम्बंधित विचार
यहाँ तीन अन्य सूक्तियाँ हैं जो प्रेरिती के साथ संतुलन बनाते हैं:
पाठ का प्रमुख संदेश
- परमेश्वर का सुसमाचार निःस्वार्थ प्रेम, क्रु आपत्तियों के बीच भी दयालु सत्य है।
- विश्वास में ग्रहण का मतलब है कि आप केवल शब्दों को नहीं सुनते, बल्कि परमेश्वर के वचन को अपने भीतर क्रियाशील और परिवर्तनकारी मानते हैं।
आज का अनुप्रयोग
- आप कितनी बार सुनते हैं, यह महत्त्वपूर्ण नहीं, बल्कि क्या वह सच आपके हृदय में प्रवेश कर कर रहा है। परमेश्वर के वचन को पढ़ते समय अपने आत्मा के साथ एक सच्चा आस्था-संबंध विकसित करें।
- अपने जीवन के निर्णयों में तेरे विश्वस्त व्यवहार, प्रेम, और दया को प्रभु के वचन के अनुसार ढालें; तब यही वचन आपके चर्च-जीवन और व्यक्तिगत-उत्साह को गतिशील बनाता है।
संक्षिप्त क्रॉस-रेफरेंसेस
यहाँ तीन संक्षिप्त क्रॉस-रेफरेंसेस हैं जिन्हें आप देखें:
व्याख्या में एक साथ मौलिक विचार यह है कि परमेश्वर अपने वचन को आत्मा से जनित विश्वास के साथ कार्यरत करता है; यह पोषण और परिवर्तन का स्रोत है, न कि merely जानकारी।
उद्धरण स्रोत (तीनों सार्वजनिक डोमेन टिप्पणीकारों से यदि उपलब्ध): हेनरी, बार्न्स, क्लार्क — उनके विचारों के संक्षिप्त सार इस प्रकार समेकित हैं: परमेश्वर के वचन की सत्ता; विश्वास द्वारा ग्रहण; और आत्मा से प्रेरित परिवर्तन।