Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 थिस्सलुनीकियों 2:1 1 थिस्सलुनीकियों 2:2 1 थिस्सलुनीकियों 2:3 1 थिस्सलुनीकियों 2:4 1 थिस्सलुनीकियों 2:5 1 थिस्सलुनीकियों 2:6 1 थिस्सलुनीकियों 2:7 1 थिस्सलुनीकियों 2:8 1 थिस्सलुनीकियों 2:9 1 थिस्सलुनीकियों 2:10 1 थिस्सलुनीकियों 2:11 1 थिस्सलुनीकियों 2:12 1 थिस्सलुनीकियों 2:13 1 थिस्सलुनीकियों 2:14 1 थिस्सलुनीकियों 2:15 1 थिस्सलुनीकियों 2:16 1 थिस्सलुनीकियों 2:17 1 थिस्सलुनीकियों 2:18 1 थिस्सलुनीकियों 2:19 1 थिस्सलुनीकियों 2:20



पद के संदर्भ में परिचय
1 थिस्सलुनीकियों 2:16 में प्रेरित पौलुस अपने विरोधियों के बारे में बात करते हैं जो यहूदियों और अन्यजातियों के साथ मिलकर ईसाई समुदाय के उद्धार के कार्य को रोकने का प्रयास करते रहे। यह आयत यीशु मसीह की प्रेरित सभा के रास्ते में आये विरोध-प्रतिरोध और ईसाई विश्वास के प्रचार पर होने वाले पवित्र संघर्ष को दर्शाती है।
पाठ से क्या उद्घटित होता है
इस वाक्य में प्रभु की योजना के विरुद्ध रुकावट डालने की कोशिश करने वाले लोगों के बारे में चेतावनी है। उद्धार के संदेश को स्थिर बनाने, ईमानदारी से आत्म-समर्पण की ओर मोड़ने की कोशिश के बावजूद, कुछ लोग पाप के घड़े को भरते रहते हैं और परिणामस्वरूप परमेश्वर का दंड उनके ऊपर आ पड़ा है। यह संदेश है कि ईश्वर के उद्धार के रस्ते में विरोध-संक्रमण का वास्तविक कारण भूतपूर्व पापकर्म और निश्चित अवज्ञा है।
गाय gram और शब्दार्थ स्पष्टीकरण
संरचित क्रॉस-रेफरेंसेस
1) रोमियों 2:8-9—पाप के परमाणु परिणाम और विवेकहीनता से उत्पन्न क्लेश।
2) रोमियों 11:22—धैर्य और दया के साथ चेतावनी का अर्थ, परमेश्वर के उद्धार के लिए खुले मार्ग की आवश्यकता।
3) यूहन् 3:18-19—प्रकाश के सामने व्यक्तिगत निर्णय और पाप से दूरी।
आज के समय में praktyical application
हम में से प्रत्येक के लिए यह संदेश है कि ईश्वर के उद्धार के संदेश को सुरक्षित और खुलकर पहुँचाने के लिए हमें साहस, धैर्य और नम्रता से प्रेरित रहना चाहिए। साथ ही, हमारे सामने यह संकेत है कि जो व्यक्ति पाप के पक्ष में स्थायी संलग्न है, उसके लिए दंड आ सकता है। आत्म-चेतना और पवित्रता की दिशा में निरंतर आचरण ही ईश्वर के उद्धार के कार्य को सफल बनाता है।
सारतः
यह पद यह बताता है कि उद्धार के संदेश के प्रचार में कुछ लोग बाधा डालते हैं; उनके पाप के कारण उन्हें परिणाम भुगतने चाहिए। परंतु ईश्वर का उद्धारकार्य अचल रहता है और धैर्यपूर्वक सुसमाचार को फैलाते रहने वाले विश्वासियों के लिए नई आशा का मार्ग बनता है।
महत्वपूर्ण उद्धरण (यथासंभव सार)**
खुले तौर पर कोई पूर्ण उद्धरण नहीं दिया गया है, पर अन्य मानक प्राचीन टिप्पणीकारों से मिलने वाले सामान्य निष्कर्ष नीचे जोड़े जाते हैं:
Matthew Henry आदि के विचारों के अनुरूप, यह संदेश है कि विरोध के बावजूद सुसमाचार का प्रचार न रुके; परमेश्वर के न्याय से पुकारना और उद्धार के प्रवाह की सफलता में विश्वास बनाए रखना चाहिए।