Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 थिस्सलुनीकियों 2:1 1 थिस्सलुनीकियों 2:2 1 थिस्सलुनीकियों 2:3 1 थिस्सलुनीकियों 2:4 1 थिस्सलुनीकियों 2:5 1 थिस्सलुनीकियों 2:6 1 थिस्सलुनीकियों 2:7 1 थिस्सलुनीकियों 2:8 1 थिस्सलुनीकियों 2:9 1 थिस्सलुनीकियों 2:10 1 थिस्सलुनीकियों 2:11 1 थिस्सलुनीकियों 2:12 1 थिस्सलुनीकियों 2:13 1 थिस्सलुनीकियों 2:14 1 थिस्सलुनीकियों 2:15 1 थिस्सलुनीकियों 2:16 1 थिस्सलुनीकियों 2:17 1 थिस्सलुनीकियों 2:18 1 थिस्सलुनीकियों 2:19 1 थिस्सलुनीकियों 2:20



अर्थ का सीधा सार
1 थिस्सलुनीकियों 2:6 में पवित्र लेखक यह कहना चाहता है कि मसीह के प्रेरित होते हुए भी हमने तुम्हारे ऊपर कोई बोझ नहीं डाला। न ही हम मनुष्यों से आदर चाहते थे और न तुमसे, न किसी और से। यह सिद्धांत दर्शाता है कि सुसमाचार का सम्मान और प्रेरितों की प्रेरणा लोगों के निजी लाभ के लिए नहीं, बल्कि परमेश्वर के उद्देश्य पूरे करने के लिए है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह पाठ प्रेरित पॉल ने थिस्सलुनीकीयों के लिए लिखा एक पत्र है, जिसमें वे उनकी आत्म-त्याग और दृढ़ता का उल्लेख करते हैं। वे स्वयं के उदाहरण कोounds करते हैं—जिन्होंने न तो बाहरी दावेदारों की मांग की और न मानव मान-सम्मान के पीछे भागे, बल्कि प्रत्येक स्थिति में प्रभु की गवाही देने के लिए कठिनाइयों का सामना किया।
व्याख्यात्मक अवलोकन
थीमगत दृश्य
अनुचित और उचित संदर्भ (क्रॉस-रेफरेंसेस)
• मार्गदर्शक दायित्व और नम्रता के विषय पर कहते हैं कि प्रेरित व्यक्ति कभी मान-लाभ की तलाश नहीं करते—यही मूल विचार 1 कोरिथियों 9:12-18 में भी उभरता है।
• प्रेरितों का आदर सम्मान परमेश्वर के कार्य के साथ जुड़ा है, न कि उनके व्यक्ति-गुणों के साथ; यह 2 कोरिथियों 4:5 के साथ संगत है जिसमें कहा गया कि हम कृपा के संदेशी हैं, न कि अपने आप को प्रचारित करने वाले।
• सेवक-स्वभाव और साक्ष्य-वृत्ति के महत्व पर प्रचलित विचारों के अनुसार 1 पतरस 5:2-3 भी प्रेरितों के नम्र आचरण को प्रेरित करता है—जो दर्शाता है कि प्रभु के कारणों के लिए स्वार्थहीन कदम उठाने चाहिए।
पठन-सम्बन्धी संकेत
1) जिस प्रकार प्रेरित ने अपने निजी लाभ से ऊपर ईश्वर के काम को रखा, वह 1 तारस्सलुनीकियों 2:7-9 में और भी स्पष्ट है, जहाँ नम्रता और परिश्रम के साथ सुसमाचार पहुँचाने का उल्लेख है।
2) पवित्र क्रिया-प्रयोग में उनकी निष्कपटता, 1 पतरस 2:12 के अनुरूप, जहां वे समाज के बीच प्रभु के प्रकाश को प्रकट करने के लिए vivekपूर्वक व्यवहार करते हैं।
3) जीवन की ठोसता: यदि प्रेरित मान-लाभ के पीछे दौड़ते, तो सुसमाचार की निश्कर्षता नहीं रहती; परन्तु वे अपनी आहुति के साथ सत्य को कायम रखते हैं।
व्यावहारिक निष्कर्ष
हम जो शिक्षा पाते हैं, वह यह है कि प्रभु के कार्य में तुम्हारी सहायता और प्रेम सबसे बड़ी पहचान हैं, न कि बाहरी सम्मान। चर्चाओं में नम्रता और निस्वार्थ सेवा का उदाहरण बनना चाहिए, ताकि संदेश अपनी शक्ति से प्रभाव डाल सके।
संक्षिप्त टिप्पणी-योग
हमारे पाठ की मूल बात यह है: प्रेरित होकर भी हमने तुम पर बोझ नहीं डाला; हमने मान-कीर्ति की चाह नहीं की। यह उदाहरण हमारे लिए आज भी प्रेरणास्त्रोत है कि कैसे सेवा में निस्वार्थता परमेश्वर के राज्य को समृद्ध करती है।
नोट: अगर आप स्टायालिस्टिक उद्धरण चाहते हैं, तो 1)Matthew Henry, 2)Albert Barnes, 3)Adam Clarke के संक्षिप्त उद्धरण आवश्यक हो तो बताइए; नीचे के प्रकरणों में वे केवल आवश्यक हो तो संक्षेप में जोड़े जा सकते हैं।