Old Testament
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2 पतरस 1:11 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
वरन् इस रीति से तुम हमारे प्रभु और उद्धारकर्ता यीशु मसीह के अनन्त राज्य में बड़े आदर के साथ प्रवेश करने पाओगे।
2 पतरस 1:11 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
2 पतरस 1:11 समानांतर पद और संबंधित वचन
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मत्ती 25:34 (HINIRV) »
तब राजा अपनी दाहिनी ओर वालों से कहेगा, ‘हे मेरे पिता के धन्य लोगों, आओ, उस राज्य के अधिकारी हो जाओ, जो जगत के आदि से तुम्हारे लिये तैयार किया हुआ है।

प्रकाशितवाक्य 5:10 (HINIRV) »
“और उन्हें हमारे परमेश्वर के लिये एक राज्य और याजक बनाया; और वे पृथ्वी पर राज्य करते हैं।” (प्रका. 1:6)

प्रकाशितवाक्य 3:21 (HINIRV) »
जो जय पाए, मैं उसे अपने साथ अपने सिंहासन पर बैठाऊँगा, जैसा मैं भी जय पा कर अपने पिता के साथ उसके सिंहासन पर बैठ गया।
2 पतरस 1:11 पर तात्पर्य और प्रसंग
पतरस अपने पाठकों को विश्वास के शिक्षण में स्थिर रहने की प्रेरणा देते हैं ताकि आखरी दिन यीशु मसीह के साथ उनका प्रवेश आनन्द और आदर के साथ हो। जिस रीति से वे समानानुभूति से परिपूर्ण, पवित्र जीवन जीते हैं, यही तैयारी उनकी अंतःकरणरक्षा और उद्धार के लक्ष्य को सुनिश्चित करती है। इस वाक्य में भविष्य की प्रतिफलता की आशा स्पष्ट है: प्रभु के अनंत राज्य में बड़े आदर के साथ प्रवेश।
केन्द्रीय अर्थ
यह अनुभूति बताती है कि ईमानदार विश्वासियों के लिए जीवन-यात्रा का अंतिम पड़ाव एक गरिमापूर्ण स्वागत होगा। यीशु मसीह के पुनर्जन्म और पवित्र आशीर्वादों के कारण उनका राज्य-यात्रा में प्रवेश सम्मानित और दृढ़ रहेगा। यह प्रभु की कृपा और हमारे प्रयासों के संतुलन पर आधारित है: परमेश्वर की ओर से दिया गया उद्धार और हमारे द्वारा उसका व्यवहार-विचार करना।
मुख्य विषय
अनुदेशात्मक संदर्भ
इस आयत से जुड़ी अन्य धारणाओं पर विचार करते समय देखें:
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि यीशु के साथ हमारा उद्धार और राज्य-जीवन एक स्थिर विश्वास, आत्म-नियंत्रण, और प्रेमपूर्ण सहभागिता पर टिका है.
व्यावहारिक आचरण
रोज़मर्रा की जिंदगी में इस वचन की दिशा-निर्देश यह देता है कि हम न केवल विश्वास रखें, बल्कि नम्रता, ईमानदारी, और प्रेम में वृद्धि करें। कठिनाई में धैर्य रखें; धार्मिक कर्मों को दिखाने के बजाय आंतरिक परिवर्तन पर ध्यान दें। जैसे-जैसे हमारा चरित्र यीशु के जैसा बनता है, हमारा प्रवेश और अधिक सुरक्षित और सम्मानित होता है।
संक्षेप
2 पतरस 1:11 कहता है कि अपने दृढ़ विश्वास और पवित्र जीवन के माध्यम से हम हमारे प्रभु यीशु मसीह के अनन्त राज्य में बड़े आदर के साथ प्रवेश पाएंगे। यह उद्धार की पूर्णता की ओर एक पक्का विश्वास है—प्रभु की कृपा, हमारी साधना, और जीवनभर की यात्रा से उत्पन्न एक सुंदर परिणाम।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप)
याकूब 1:12—धैर्यपूर्ण विश्वास के परिणामस्वरूप आशीर्वाद; यूहन्ना 14:2-3—पिता के घर की निकटता और प्रवेश का निश्चित आश्वासन; रोम 8:17—सांझीदार के अधिकार और मान।
उद्धरण नोट: यदि चाहिए तो Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणियों के संकलित सार कहाँ स्थित हैं, इन्हें समेकित रूप में समाहित किया जा सकता है; यहाँ संक्षेप में उनके विचारों का सामान्य इशारा है—वे बताते हैं कि आस्था और चरित्र की पूर्णता अंतःक्रिया द्वारा ही प्रवेश की गारंटी बनती है, और यह दायित्व पवित्रता को जन्म देता है। (कृपया ध्यान दें: नीचे उद्धृत पूर्ण वाक्य या अंश केवल आवश्यकतानुसार दिए जा सकते हैं।)