Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी2 पतरस 1:5 बाइबल पद की व्याख्या
2 पतरस 1:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और इसी कारण तुम सब प्रकार का यत्न करके, अपने विश्वास पर सद्गुण, और सद्गुण पर समझ,
2 पतरस 1:5 पद-दर-पद बाइबल टीका
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2 पतरस 1:5 समानांतर पद और संबंधित वचन
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फिलिप्पियों 4:8 (HINIRV) »
इसलिए, हे भाइयों, जो-जो बातें सत्य हैं, और जो-जो बातें आदरणीय हैं, और जो-जो बातें उचित हैं, और जो-जो बातें पवित्र हैं, और जो-जो बातें सुहावनी हैं, और जो-जो बातें मनभावनी हैं, अर्थात्, जो भी सद्गुण और प्रशंसा की बातें हैं, उन्हीं पर ध्यान लगाया करो।

2 पतरस 1:2 (HINIRV) »
परमेश्वर के और हमारे प्रभु यीशु की पहचान के द्वारा अनुग्रह और शान्ति* तुम में बहुतायत से बढ़ती जाए।

अर्थ का सीधा सार
2 पतरस 1:5 में प्रेरित पतरस यह बताता है कि आप अपने विश्वास के साथ-साथ चार अद्वितीय गुणों को जोड़ते जाएँ: सद्गुण, समझ, आत्म-नियन्त्रण, सहनशीलता, प्रभु यीशु के ज्ञान के साथ प्रेम। इस पंक्ति का मूल तात्पर्य यह है कि ईमानदार विश्वास को क्रियात्मक गुणों से समर्थ बनाना चाहिए ताकि हमारा जीवन परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप बढ़ सके।
पृष्ठभूमि और संकल्पना
पतरस के पहले पत्र के संदर्भ में यह शृंखला विश्रामित आशा और चरित्र-विकास के बारे में है। धर्मशास्त्र में 2 पतरस 1:5-7 एक सात-घटक धार्मिक विकास का क्रम देता है: विश्वास के साथ आरंभ और सद्गुण से आगे बढ़ना, फिर समझ, आत्म-नियन्त्रण, धैर्य, पवित्रता, प्रेम। यह धारणात्मक आह्वान है कि ईमानदार जीवन केवल विश्वास से नहीं, बल्कि गुणों के निरंतर संयोजन से बनता है।
व्याख्यात्मक अवलोकन
संरचित विषय-वस्तु
अन्य सम्बद्ध ग्रंथ-आइडिया
तो तुस्सी समझिए कि विश्वास के साथ सत्कार और धीरज बैठता है; यह वही क्रम है जो क्लेमेंट और चर्च-परंपरा में भी सिद्ध हुआ।
याकूब 1:4 से प्रेरणा मिलती है कि परीक्षण के समय धैर्य कार्य करता है, ताकि आप पूर्ण और अभाव-रहित बनें; यह भी इसी सीख की पुष्टि है कि गुणों का अभ्यास हमें पूर्ण बनाता है।
अभियानों 3:18 में यीशु के ज्ञान के साथ प्रेम को नापना सिखाया गया है—यह बताता है कि समझ और प्रेम एक-दूसरे से जुड़ते हैं ताकि चरित्र की परिमार्जन हो।
प्रमुख टिप्पणी-संयोजन
हिनिर्व अनुवाद में इस वाक्य के भीतर के दृश्य में, पुराने प्रवचनों से प्रसिद्ध विचार मिलते हैं कि विश्वास के साथ प्रयत्न से हम अपने आंतरिक स्वभाव को ढालते हैं। मानक पवित्र-लेखन-व्याख्या-सम्पदा से Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke ने इस क्रम को निम्न प्रकार समझाया है:
— Henry इस क्रम को एक जीवन-निर्वाह का मार्ग बताता है जिसमें विश्वास-निष्ठा से चाल शुरू होती है, जिससे नैतिक गुण उभरते हैं; sonra समझ आती है ताकि सही निर्णय संभव हो।
— Barnes दिखाते हैं कि सद्गुणों का विकास आत्म-परिश्रम और प्रभु-ज्ञान को जोड़ता है; ताकि विश्वास कार्रवाई में परिणत हो।
— Clarke के अनुसार, यह क्रम आत्म-सुधार की सतत प्रक्रिया है जो ईमानदारी और पवित्र जीवन की दिशा को पुष्ट करता है, ताकि हम विश्वासी बनकर लाचार न रहें।
संक्षिप्त थीम-नोट
व्यावहारिक निष्कर्ष
आज आपके दिनचर्या में आप किस प्रकार अपने विश्वास के अनुसार गुण जोड़ते हैं? एक सरल कदम चुनिए: हर दिन एक छोटा गुण चुनें—जैसे संतोष या धैर्य—और उसे व्यवहार में लाने के लिए २४ घंटे के लिए अल्प-उद्धार करें। इससे आपका ज्ञान-चेतना और निर्णय-शक्ति दोनों दृढ़ होंगे।