Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी2 पतरस 1:2 बाइबल पद की व्याख्या
2 पतरस 1:2 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
परमेश्वर के और हमारे प्रभु यीशु की पहचान के द्वारा अनुग्रह और शान्ति* तुम में बहुतायत से बढ़ती जाए।
2 पतरस 1:2 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
2 पतरस 1:2 समानांतर पद और संबंधित वचन
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फिलिप्पियों 3:8 (HINIRV) »
वरन् मैं अपने प्रभु मसीह यीशु की पहचान की उत्तमता के कारण सब बातों को हानि समझता हूँ। जिसके कारण मैंने सब वस्तुओं की हानि उठाई, और उन्हें कूड़ा समझता हूँ, ताकि मैं मसीह को प्राप्त करुँ।

2 पतरस 3:18 (HINIRV) »
पर हमारे प्रभु, और उद्धारकर्ता यीशु मसीह के अनुग्रह और पहचान में बढ़ते जाओ। उसी की महिमा अब भी हो, और युगानुयुग होती रहे। आमीन।

यूहन्ना 17:3 (HINIRV) »
और अनन्त जीवन यह है, कि वे तुझ एकमात्र सच्चे परमेश्वर को और यीशु मसीह को, जिसे तूने भेजा है, जानें।
2 पतरस 1:2 — परमेश्वर के और हमारे प्रभु यीशु की पहचान के द्वारा अनुग्रह और शांति तुम में बढ़ती जाए
इस पद का ठिकाना है प्रेरित-पत्र की आरम्भिक पंक्तियाँ, जहाँ पतरस विश्वास के लिए उचित आधार और प्रेरणा के स्रोत को सामने रखते हैं। यीशु मसीह के नाम से अनुग्रह और शांति की अभिवृद्धि की मंगलकामनाएं जैसी यह प्रार्थना, पाठक के बीच एक सघन रिश्ता स्थापित करती है: परमेश्वर की कृपा और यीशु के साथ संगति ही वह स्रोत है जिससे देव-जीवन के सारे लाभ बहते हैं।
कथन कितनी गहराई से बताता है
इस वाक्य में दर्ज परमेश्वर के और हमारे प्रभु यीशु की पहचान से अनुग्रह और शांति का प्रवाह संभव होता है। पहचानों के आधार पर ही विश्वासी जीवन की वास्तविक दिशा मिलती है—यानी परमेश्वर के क्रोध से नहीं, उसकी कृपा से और यीशु के सुधरे हुए उपदेशों के मार्ग पर। यह पहचान आत्मीय संबंध की भाषा है: परमेश्वर के पुत्र के रूप में मान्यता और उनके साथ भागीदारी का अवसर।
महत्वपूर्ण शब्द और चित्र
Related passages (संक्षेप में) और उनका संयोग
– रोम 5:1-2: शांति का प्रवेश मनःशान्ति से है जो विश्वास के परिणामस्वरूप मिलती है।
– याकूब 4:6: परमेश्वर दया से अधिक प्रेम करता है और दया की ऊँचाई तक अनुग्रह बढ़ाता है।
– यूहन् 1:16-17: बढ़ती कृपा और सत्य की ओर अग्रसर यात्रा का आधार यीशु के अनुग्रह में है।
प्रमुख टीका-संप्रेषण (आधार स्रोतों से समेकित अवलोकन)
Matthew Henry के शब्दों में, “अनुग्रह और शांति का मेल आत्मा के साथ ईश्वर-सम्बन्ध में पूर्णता लाता है।” Albert Barnes कहते हैं कि यह अभिवादन विश्वास की प्रगति के लिए प्रेरणा है—जब हम परमेश्वर की पहचान से जीवन पाते हैं, तब शांति स्थिर रहती है। Adam Clarke इस वाक्य को प्रभुत्व-संस्कार के रूप में देखते हैं: ईश्वर की पहचान पर दृढ़ विश्वास से अनुग्रह बढ़ता है और हमारे जीवन में शांति के फल दिखाई देते हैं।
व्यावहारिक प्रस्तुतिकरण
आज के विश्वासी के लिए यह शिक्षा सरल सी है: अपनी पहचान को परमेश्वर और यीशु में सुरक्षित करें, ताकि हर दिन का व्यवहार कृपा-युक्त और शांतिपूर्ण बने। संकट के समय भी याद रखें कि अनुग्रह पहले है, और उससे शांति का अनुभव होता है।
क्रॉस-रेफरेंस और संक्षिप्त व्याख्या
– रोम 15:13: आशा के साथ परमेश्वर की शांति आपकी आत्मा में भरोसा भरती है। यह सम्बन्ध उसी अनुग्रह से प्रवाहित होता है जिसे आप यीशु में पाते हैं।
– फिल 4:7: परमेश्वर की शांति, जो सभी समझ से परे है, हृदयों को और विचारों को मसीह यीशु में टिकाए रखती है।
इस प्रकार, 2 पतरस 1:2 हमें बताता है कि विश्वास की यात्रा में अनुग्रह और शांति की वृद्धि सीधे परमेश्वर के पहचान-आधारित सम्बन्ध पर निर्भर है।