Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी2 पतरस 3:18 बाइबल पद की व्याख्या
2 पतरस 3:18 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
पर हमारे प्रभु, और उद्धारकर्ता यीशु मसीह के अनुग्रह और पहचान में बढ़ते जाओ। उसी की महिमा अब भी हो, और युगानुयुग होती रहे। आमीन।
2 पतरस 3:18 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
2 पतरस 3:18 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

कुलुस्सियों 1:10 (HINIRV) »
ताकि तुम्हारा चाल-चलन प्रभु के योग्य हो*, और वह सब प्रकार से प्रसन्न हो, और तुम में हर प्रकार के भले कामों का फल लगे, और परमेश्वर की पहचान में बढ़ते जाओ,

इफिसियों 4:15 (HINIRV) »
वरन् प्रेम में सच बोलें और सब बातों में उसमें जो सिर है, अर्थात् मसीह में बढ़ते जाएँ,

1 पतरस 2:2 (HINIRV) »
नये जन्मे हुए बच्चों के समान निर्मल आत्मिक दूध की लालसा करो*, ताकि उसके द्वारा उद्धार पाने के लिये बढ़ते जाओ,
2 पतरस 3:18 का अर्थ और उपयुक्त अनुप्रयोग
इस पद का सीधा अर्थ है: यीशु मसीह के अनुग्रह और उसकी पहचान में निरंतर प्रगति करते रहो; उसका महिमान्वय अब भी प्रकट होता रहे, और यह महिमा सदा-स्थाई रहे। यद्यपि हम अधूरे और अस्थिर हैं, हमारा जीवन इस स्वर्गीय बुलाहट के अनुसार ऊँचा उठना चाहिए, ताकि हम उसकी महिमा में वृद्धि करते रहें।
संदर्भभूमि
यह पाठ 2 पतरस के अंतर्गत है, जहां प्रेरित पतरस असत्य शिक्षाओं के विरुद्ध सच और सतर्कता की आवश्यकता पर जोर देते हैं। पहले सेौतों में वे चेतावनी देते हैं कि प्रभु की प्रतिक्षा में विश्वासयोग्य रहने के बजाय कुछ दावा करते हैं कि आशीष पूर्ववत नहीं बदलेगी; इस संदर्भ में वह exhortation देता है कि हम प्रभु के अनुग्रह और पहचान में बढ़ते जाएँ।
व्याख्यात्मक अवलोकन
एक छोटा थीमैटिक सार
अनुशीलित cross-references और उनका संक्षिप्त अर्थ
• याकूब 1:4: परीक्षणों के बीच धैर्य से पूर्णता तक पहुँचना—इस में वृद्धि और स्थिरता का संबन्ध है।
• गलातियों 5:22-23: आत्मा के फल(प्रेम,joy, शान्ति) बढ़ने से मसीह की पहचान अधिक स्पष्ट होती है।
• कुलुस्सियों 1:28: मसीह की पूर्णतया प्रकटता के लिए उनका प्रचार और अनुशासन—हमारी वृद्धि का परम लक्ष्य है।
संरेखित टिप्पणियाँ (संकेत द्वारा संदर्भ)
यहाँ Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक डोमेन्ड टिप्पणीकारों के छोटे उद्धरण आवश्यकतानुसार शामिल हैं:
• Matthew Henry: “We must grow in grace and in the knowledge of our Lord and Saviour Jesus Christ.”
• Albert Barnes: “The grace of the Lord Jesus Christ is the sustaining principle; by it we progress, by it we endure.”
• Adam Clarke: “The growth spoken of is not a one-time event, but a continual advancing in the divine life.”
व्यावहारिक निष्कर्ष
हम कैसे इस संदेश को अपने जीवन में उतारें: प्रतिदिन प्रार्थना और पवित्र शास्त्र के अनुशीलन से प्रभु के अनुग्रह पर टिके रहना; छोटे-छोटे नैतिक-विकास के लक्ष्यों को निर्धारित करके उनकी ओर बढ़ना; तथा समुदाय और भरोसेमंद सहयोगी के साथ मजबूती से चलना ताकि उसकी महिमा हर दिन बढ़ती रहे।