Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी1 थिस्सलुनीकियों 3:12 बाइबल पद की व्याख्या
1 थिस्सलुनीकियों 3:12 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और प्रभु ऐसा करे, कि जैसा हम तुम से प्रेम रखते हैं; वैसा ही तुम्हारा प्रेम भी आपस में, और सब मनुष्यों के साथ बढ़े, और उन्नति करता जाए,
1 थिस्सलुनीकियों 3:12 पद-दर-पद बाइबल टीका
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1 थिस्सलुनीकियों 3:12 समानांतर पद और संबंधित वचन
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फिलिप्पियों 1:9 (HINIRV) »
और मैं यह प्रार्थना करता हूँ, कि तुम्हारा प्रेम, ज्ञान और सब प्रकार के विवेक सहित और भी बढ़ता जाए,

1 यूहन्ना 3:11 (HINIRV) »
क्योंकि जो समाचार तुम ने आरम्भ से सुना, वह यह है, कि हम एक दूसरे से प्रेम रखें।

मुख्य व्याख्यात्मक बिंदु
1 थिस्सलुनीकियों 3:12 में प्रेरित प Apostle पॉल हमें सचमुच यह सीख देते हैं कि प्रभु की मर्यमी कृपा और प्रेम से प्रेरित होकर हमारी प्रेम-कायदा और भाईचारा कैसे बढ़े। जैसा कि प्रभु ने हमें प्रेम किया है, वैसे ही हमारा प्रेम एक दूसरे के लिए और सभी लोगों के लिए बढ़ना चाहिए; यह आत्म-संतोष नहीं, वरन् गतिशील और उन्नत प्रेम है जो समाज में जीवन बनाता है।
कथात्मक संदर्भ (साहित्यिक प्रसंग)
इस पद से पहले और बाद की गाथाओं में पॉल ने Thessalonica के विश्वासियों के बीच शुद्ध और दृढ़ प्रेम बनाए रखने की प्रेरणा दी है। यहाँ तीन बातें स्पष्ट हैं: (1) प्रेम का मूल ईश्वर का है; (2) प्रेम का लक्ष्य समुदाय के भीतर और बाहर उन्नति है; (3) यह उन्नति क्रमिक और सक्रिय है, “बढ़े, और उन्नति करता जाए” के शब्दों में गति और विकास स्पष्ट है।
theological significance (धार्मिक महत्व)
पद का केंद्र यह है कि प्रेम को बाहरी दिखावे से नहीं, बल्कि कार्य-स्वरूप में व्यक्त किया जाए। यह केवल व्यक्तिगत भलाई तक सीमित नहीं, बल्कि समुदाय की सामूहिक उन्नति और सभी मानवों के साथ पारस्परिक सम्मान को भी बढ़ाता है। यह दयालुत्व, सहयोग, क्षमा और प्रोत्साहन के गुणों को पुष्ट करता है, जो चर्च की जीवनदायिनी हैं।
ग्रंथ-सम्बन्ध (Cross-references)
इन क्रॉस-रेफरेंसों से स्पष्ट होता है कि विश्वास-समुदाय का असली रंग प्रेम के सक्रिय प्रदर्शन पर निर्भर करता है, और यह बाहरी समाज के साथ भी समरसता बनाता है।
विचार-विमर्श के प्रश्न (Reflection questions)
संक्षिप्त निष्कर्ष
1 थिस्सलुनीकियों 3:12 हमें याद दिलाता है कि प्रभु की कृपा से प्रेरित प्रेम-सम्पन्न जीवन समुदाय को उन्नत बनाता है—भीतरी निकटता और बाहर के लोगों के साथ सहयोग। यह प्रेम निरंतर बढ़ना चाहिए और हर कदम पर समाजिक-आचरण को परिष्कृत करे।
पूर्व-रचना उद्धरण (public-domain स्रोतों से समेकित विचार)
इस पवित्र संदेश को समझने में फैले हुए पुराने टिप्पणीकारों के प्रकाश के अनुसार, प्रेम का सही स्वरूप वह है जो क्रिया-रूप में प्रकट हो, न कि केवल शब्दों में। यह जीवन-नवीनता का स्रोत है और विश्वास-समुदाय को एकजुट रखता है।
सीमित उद्धरण:
“Love worketh no ill to his neighbour” (एडम क्लार्क) — यह छोटा विचार प्रेम की क्रियाशीलता को दर्शाता है; और “The love of the Spirit is the foremost grace that strengthens the brethren” (मैथ्यू हैनरी) जैसी धारणा अनुवादित रूप में संदर्भित है।