Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 यूहन्ना 3:1 1 यूहन्ना 3:2 1 यूहन्ना 3:3 1 यूहन्ना 3:4 1 यूहन्ना 3:5 1 यूहन्ना 3:6 1 यूहन्ना 3:7 1 यूहन्ना 3:8 1 यूहन्ना 3:9 1 यूहन्ना 3:10 1 यूहन्ना 3:11 1 यूहन्ना 3:12 1 यूहन्ना 3:13 1 यूहन्ना 3:14 1 यूहन्ना 3:15 1 यूहन्ना 3:16 1 यूहन्ना 3:17 1 यूहन्ना 3:18 1 यूहन्ना 3:19 1 यूहन्ना 3:20 1 यूहन्ना 3:21 1 यूहन्ना 3:22 1 यूहन्ना 3:23 1 यूहन्ना 3:24



1 यूहन्ना 3:11 पर टिप्पणी: चाहना कि हम एक दूसरे से प्रेम करें
यह वचन बताता है कि ईसाई जीवन का मूल समाचार यही है: आरम्भ से वह संदेश, जिसे हमने सुना है, वह प्रेम का संदेश है। यह प्रेम केवल विचार नहीं, व्यवहार है—हम एक-दूसरे से प्रेम करें। यह परमेश्वर की किरण है जो विश्वासियों के भीतर रोशनी बनकर फैलती है और समाज में वास्तविक सद्भाव बनाए रखती है।
आदि संदर्भ और मूल संदर्भ
یہ वाक्य 1 यूहन्ना के परिचयात्मक संदेश से आता है, जहाँ लेखक यह स्पष्ट करता है कि सबसे महत्वपूर्ण तथ्य प्रेम है जिसे हमने आरम्भ से सुना है: भाइयों के बीच प्रेम। किशोर-युवाओं के जन्म से लेकर चर्च के भीतर वितरित हर क्षेत्र तक प्रेम का यह निर्देश सभी प्रार्थनाओं और सेवाओं की जड़ है। यह संदेश उन लोगों के लिए भी है जो जानना चाहते हैं कि ईश्वर के साथ सही संबंध कैसे बनता है—प्रेम के व्यवहार के बिना सच्ची भक्ति संभव नहीं।
मुख्य संदेश
यहीं से जो चीज़ें निकलती हैं, वे हैं: प्रेम वास्तविक है, स्थाई है और क्रोध, द्वेष या स्वार्थ से मुक्त है। प्रेम यह दिखाता है कि हम परमेश्वर के बच्चों के रूप में एक-दूसरे के लिए कैसे जीते हैं। यदि हम प्रेम में रहते हैं, तो हम न केवल उनके साथ सही व्यवहार करते हैं, बल्कि एक दूसरे के जीवन को भी संरक्षित करते हैं।
पवित्र शास्त्रीय थेम्स
- सत्यापन: प्रेम एक ऐसा नियम है जो आपसी रिश्ता बनाते और मजबूत करता है; यह नये नियम का सार है।
- पहचान: प्रेम के बिना भगवान की विद्यमानता और विश्वास का अर्थ खाली है; प्रेम ईश्वर की प्रकृति को दर्शाता है।
कई संबंधित शास्त्र-उद्धरण (Cross-references)
इन संदर्भों से प्रकट होता है कि प्रेम जीवन के हर क्षेत्र में क्रियाशील होना चाहिए: चरित्र में उन्नति, समुदाय में मेल-Jol, और ईश्वर के प्रति समर्पण में दृढ़ता।
ईश्वरीय उद्देश्य के अनुसार सामान्य समझ
प्रेम केवल भाव नहीं है, यह क्रिया है। हमें एक-दूसरे के पालन-पोषण, सहायता और धैर्य के साथ प्रस्तुत होना चाहिए। जो प्रेम दिखाता है, वह परमेश्वर की चमक बनकर दूसरों को आकर्षित करता है और चर्च को एक मजबूत समुदाय बनाता है।
आखिरी विचार
हम किस प्रकार प्रेम करते हैं, यह हमारे विश्वास की वास्तविक जड़ है। जब हम आरम्भ से चले आ रहे उस समाचार पर टिके रहते हैं कि हम एक-दूसरे से प्रेम करें, तब जीवन के प्रत्येक अवसर पर हम ईश्वर के मार्ग पर चलते हैं। यह प्रेम स्व-उन्नति से ऊपर उठकर दूसरों के कल्याण और परमेश्वर के राज्य के विस्तार की दिशा में प्रेरित करता है।
संक्षिप्त देवotional Reflection
आज के दिन सोचिए: क्या मेरे प्रेम का संकेत कभी-कभी नकारात्मक स्थितियों में कम पड़ जाता है? हर छोटे-छोटे कार्य—मुस्कान देना, मदद के लिए हाथ बढ़ाना, शिकायतों को क्षमा करना—ईश्वर के प्रेम को इस संसार में प्रकट करता है। इसलिए प्रतीक्षा न करें; प्रेम की आज की गतिविधि से शुरू करें और देखें कि कैसे चर्च और समाज में वास्तविक परिवर्तन होता है।
नोट: इस पाठ के लिए अनुशंसित पूर्वधारणा—“हम एक दूसरे से प्रेम रखें”—यह 1 यूहन्ना 3:11 का मूल संदेश है जिसे कई पुरातन टिप्पणीकारों ने भी मजबूत रूप से पुष्ट किया है।