Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 यूहन्ना 3:1 1 यूहन्ना 3:2 1 यूहन्ना 3:3 1 यूहन्ना 3:4 1 यूहन्ना 3:5 1 यूहन्ना 3:6 1 यूहन्ना 3:7 1 यूहन्ना 3:8 1 यूहन्ना 3:9 1 यूहन्ना 3:10 1 यूहन्ना 3:11 1 यूहन्ना 3:12 1 यूहन्ना 3:13 1 यूहन्ना 3:14 1 यूहन्ना 3:15 1 यूहन्ना 3:16 1 यूहन्ना 3:17 1 यूहन्ना 3:18 1 यूहन्ना 3:19 1 यूहन्ना 3:20 1 यूहन्ना 3:21 1 यूहन्ना 3:22 1 यूहन्ना 3:23 1 यूहन्ना 3:24



1 यूहन्ना 3:22 पर टीका (HINIRV)
पद बताता है कि ईश्वर से मंगे हर चीज कैसी मिलती है, यदि हमारी जीवनशैली उसकी आज्ञाओं के अनुरूप हो और वह जो कुछ भी पसंद करता है, वही करें। यह वह संबंधिक कारण है जिसमें भक्त की प्रार्थनाएँ सुनती और प्रत्यक्ष फल पाती हैं: विश्वास के साथ आज्ञापालन। संदर्भ में यह वाक्य यूहन्ना पहले चार के प्रकाशन के अंतर्गत है, जहाँ प्रेम, नैतिकता और विश्वास का मेल प्रमुख है।
केन्द्रित अर्थ
यहाँ “हम माँगते हैं” का आशय मात्र की चाह नहीं, बल्कि परमेश्वर के मार्ग पर चलकर-मंगे जाने वाले अनुरोध से है। जो व्यक्ति ईश्वर के द्वारा दिए गए नियमों को मानता है और जो कुछ भी भगवान को मान्य लगता है, उसे वह करता है, उसका दिल परमेश्वर के सत्य और उद्देश्य के अनुरूप ढल चुका होता है। इसलिए उसकी प्राथनाएँ प्रभावशाली परिणाम देती हैं—क्योंकि वे परमेश्वर के वचन के अनुरूप होती हैं।
मुख्य विषय
संदर्भित विचार (दो प्रमुख टीका-पंक्तियाँ)
Matthew Henry के अनुसार, “हम जो माँगते हैं, यदि वह सही इच्छा से है और हमारे जीवन में परिवर्तन का प्रमाण है, तो वह दिया जाता है।” Albert Barnes इंगित करते हैं कि आज्ञाओं के पालन का उद्देश्य आत्मिक समृद्धि और सुसंगतता है, न कि स्वार्थ। Adam Clarke इस वाक्य को यह बताने के रूप में देखते हैं कि ईश्वर अपने बच्चों की प्रार्थनाओं को तब तक नहीं छोड़ता जब तक वे उसकी प्रेरणा के अनुसार न हों।
क्रॉस-रेफरेंस
- योहान 15:7 (वचन–विधि): यदि आप मेरे स्मारकों में रहो और मेरी बातें आप में रहें, तो जो आप माँगोगे वह होगा। यह वचन बताता है कि बंधन–आश्रय और वाणी का अभिन्न संबंध है।
- जेम्स 4:3: जब आप मनचाही इच्छाओं से माँगते हैं, परन्तु वह नहीं मिलता, क्योंकि आप गलत कारणों से माँगते हैं। यह दर्शाता है कि ईश्वर की इच्छानुसार माँगना कितना महत्त्वपूर्ण है।
- 1 यूहन्ना 5:14-15: विश्वास और आत्म-उत्साह के साथ माँगना और यह विश्वास कि ईश्वर सुनेगा, यह एक समृद्ध सम्बन्ध का भाग है।
व्यावहारिक चिंतन
हम कैसे प्रार्थना करें ताकि यह वचन सच हो? अपने दिल को ईश्वर के हृदय-संदेश के अनुरूप ढालिए: ग़लत अभिलाषाओं को पहचानकर परित्याग करें, और उनके स्थान पर ऐसे निवेदन रखें जो परमेश्वर की वचन-आनुरूप हों। यह सत्यापित करें कि आपकी आंतरिक इच्छा ईश्वर की महिमा और लोगों के कारणों के साथ जुड़ी है, न कि केवल अपनी सुविधा के लिए।
संक्षेप
1 यूहन्ना 3:22 यह प्रस्तुत करता है कि प्रार्थना का प्रभाव, आज्ञाओं के पालन और परमेश्वर को प्रिय काम करने की मितव्ययिता से जुड़ा है। विश्वास के साथ नीति–उचित माँगें भगवान की इच्छा के अनुरूप हो तो वह हमें सुनता है और प्रतिफलित करता है।