Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 यूहन्ना 3:1 1 यूहन्ना 3:2 1 यूहन्ना 3:3 1 यूहन्ना 3:4 1 यूहन्ना 3:5 1 यूहन्ना 3:6 1 यूहन्ना 3:7 1 यूहन्ना 3:8 1 यूहन्ना 3:9 1 यूहन्ना 3:10 1 यूहन्ना 3:11 1 यूहन्ना 3:12 1 यूहन्ना 3:13 1 यूहन्ना 3:14 1 यूहन्ना 3:15 1 यूहन्ना 3:16 1 यूहन्ना 3:17 1 यूहन्ना 3:18 1 यूहन्ना 3:19 1 यूहन्ना 3:20 1 यूहन्ना 3:21 1 यूहन्ना 3:22 1 यूहन्ना 3:23 1 यूहन्ना 3:24



मौखिक संदर्भ: 1 यूहन्ना 3:6 का नज़दीकी परिप्रेक्ष्य
पहले यूहन्ना का पत्र समग्र रूप से प्रेम, पवित्रता और ईसा मसीह की साक्ष्य-रचना पर केंद्रित है। अध्याय 3 में लेखक बच्चों और पुत्रों की विभेदवार्ता में प्रवेश करता है: मसीह में रहने (in Christ) और पाप करने के बीच का स्पष्ट विरोध। आयत 6 उस तर्क का तात्कालिक संकुचित निष्कर्ष प्रस्तुत करती है—जो व्यक्ति मसीह में बना रहता है, वह लगातार पाप में नहीं चलता। यह विचार तत्कालीन गिरजाघरों में उपजी अनुशासन व वास्तविक धर्म की परीक्षा से जुड़ा है।
पाठ का क्या उद्घाटित अर्थ है?
यह वचन यह संकेत देता है कि मसीह में स्थिर निवास केवल बाह्य आचरण नहीं, बल्कि बीते हुए और लगातार चलने वाले जीवन का माप है। "पाप नहीं करता" का अर्थ यह नहीं कि कोई कभी गलती न करे, बल्कि यह दर्शाता है कि उनका जीवन पाप के आधिपत्य के अधीन नहीं है—वे पाप के रास्ते पर निरंतर नहीं चलते। ऐसे लोगों के भीतर परमेश्वर का जीवन और शक्ति काम कर रही होती है जिससे पाप का शासन टूटता है।
मुख्य शब्दों और प्रतिमाओं की व्याख्या
परस्पर-सम्बन्धित शास्त्रसंदर्भ
यह आयत अन्य स्थानों से मिलकर अर्थ स्पष्ट करती है:
प्रमुख पुरानी टिप्पणीकारों से संक्षिप्त उद्धरण और संकेत
मैथ्यू हेनरी ने इस तरह के पदों पर लिखा है: "जब प्रेम और भक्ति में निरन्तरता हो, तो पाप का शासन टूट जाता है।" (संक्षेप उद्धरण)। अल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क ने भी इस पाठ के नैतिक और आत्मिक असर पर बल दिया, यह टिप्पणी करते हुए कि वास्तविक मसीही जीवन पाप के प्रति रूढ़ व्यवहार को अस्वीकार करता है। (यहाँ उद्धरण संक्षेप और परिभाषित स्वरूप में प्रस्तुत हैं।)
आधुनिक जीवन के लिए अनुप्रयोग
1 यूहन्ना 3:6 हमें चुनौती देता है कि हमारा विश्वास सतही होने के बजाये जीवन-परिवर्तनकारी हो। यह कुछ व्यावहारिक मार्गदर्शक देता है:
निष्कर्षतः 1 यूहन्ना 3:6 मानता है कि मसीह में निरन्तरता का प्रमाण पाप पर विजय है—यह पूर्णता का दावा नहीं बल्कि चाल-चलन का परिवर्तन और परमेश्वर के जीवन का व्यावहारिक फल है।