Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 यूहन्ना 3:1 1 यूहन्ना 3:2 1 यूहन्ना 3:3 1 यूहन्ना 3:4 1 यूहन्ना 3:5 1 यूहन्ना 3:6 1 यूहन्ना 3:7 1 यूहन्ना 3:8 1 यूहन्ना 3:9 1 यूहन्ना 3:10 1 यूहन्ना 3:11 1 यूहन्ना 3:12 1 यूहन्ना 3:13 1 यूहन्ना 3:14 1 यूहन्ना 3:15 1 यूहन्ना 3:16 1 यूहन्ना 3:17 1 यूहन्ना 3:18 1 यूहन्ना 3:19 1 यूहन्ना 3:20 1 यूहन्ना 3:21 1 यूहन्ना 3:22 1 यूहन्ना 3:23 1 यूहन्ना 3:24



1 यूहन्ना 3:5 का अर्थ और संदर्भ
पाठ बताता है कि यीशु मसीह "प्रगट हुआ, कि पापों को हर ले जाए" और उसमें कोई पाप नहीं। इसका संदर्भ 1 यूहन्ना का उद्देश्य स्पष्ट करता है: सत्य को जानना और उसे मानना वह शास्त्र जो विश्वासयोग्यता और जीवन की गवाही को एक साथ बाँधता है। ऐसे समय में परमेश्वर का पुत्र आकर पाप का प्रभाव दूर करता है, ताकि यीशु में विश्वास रखने वाले लोग पवित्र जीवन जी सकें। 1 यूहन्ना 3:5 में प्रयुक्त “प्रगट हुआ” शब्द यह दर्शाता है कि यीशु संसार में दिखा, पाप के दुष्प्रभावों को खत्म करने हेतु आया, न कि केवल ज्ञान या दर्शन के लिए।
मुख्य अर्थ
यह verses यह पुष्ट करता है कि मसीह का अवतार विशेष उद्देश्य के साथ हुआ: पाप को हरना और माँगना नहीं बल्कि उसे पूरी तरह समाप्त करना। यदि कोई यीशु पर विश्वास करता है, तो उसका जीवन पवित्रता के नए मानदंड से ढल सकता है, क्योंकि पाप के नियंत्रण से उसे मुक्त किया गया है।
दो मुख्य विषय
समानार्थी संदिग्ध विचार (Cross-references)
• यूहन्ना 1:29 — “देखिए, परमेश्वर का मेमना जो संसार के पाप को हरता है।” यह भी पाप के विनाश और मसीह के भूमिका को पुष्ट करता है।
• हमारे जीवन को पवित्र बनाने में 1 यूहन्ना 2:6 का संकेत—जो चाहे मसीह के समान चलना है, उसका जीवन व्यवहार में प्रकट होना चाहिए।
अनुप्रयोग
1) आश्वस्त रहें कि यीशु का आना पाप की ताकतों पर विजय का प्रमाण है; इसलिए डर के बजाय विश्वास रखें।
2) हर दिन की जिन्दगी में पाप की प्रवृत्ति के विरुद्ध जागरूकता बनाए रखें और पवित्र जीवन की इच्छा रखें।
संक्षेप
यह verse हमें याद दिलाता है कि मसीह का आना पाप के प्रभाव को हराने के लिए था, और जिनके भीतर वह रहता है, वे पवित्र जीवन की दिशा में प्रेरित होते हैं। यह विश्वास और व्यवहार दोनों में पवित्रता के अगले चरण की ओर संकेत है।
टिप्पणी नोट
ऐल्बर्ट बार्न्स, मैथ्यू हेन्री और एडम क्लार्क के पारंपरिक टिप्पणियाँ इस विषय पर एकीकृत करती हैं कि मसीह का कार्य पाप की सत्ता को चुनौती देता है और हमारे जीवन में नैतिक परिवर्तन लाने का परम प्रयास है। (उद्धरण शैली के अनुसार केवल आवश्यक संक्षेप उद्धरण साझा हैं।)