1 यूहन्ना 3:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और तुम जानते हो, कि यीशु मसीह इसलिए प्रगट हुआ, कि पापों को हर ले जाए; और उसमें कोई पाप नहीं। (यूह. 1:29)

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1 यूहन्ना 3:5 पद-दर-पद बाइबल टीका

1 यूहन्ना 3:5 का अर्थ और संदर्भ

पाठ बताता है कि यीशु मसीह "प्रगट हुआ, कि पापों को हर ले जाए" और उसमें कोई पाप नहीं। इसका संदर्भ 1 यूहन्ना का उद्देश्य स्पष्ट करता है: सत्य को जानना और उसे मानना वह शास्त्र जो विश्वासयोग्यता और जीवन की गवाही को एक साथ बाँधता है। ऐसे समय में परमेश्वर का पुत्र आकर पाप का प्रभाव दूर करता है, ताकि यीशु में विश्वास रखने वाले लोग पवित्र जीवन जी सकें। 1 यूहन्ना 3:5 में प्रयुक्त “प्रगट हुआ” शब्द यह दर्शाता है कि यीशु संसार में दिखा, पाप के दुष्प्रभावों को खत्म करने हेतु आया, न कि केवल ज्ञान या दर्शन के लिए।

मुख्य अर्थ

यह verses यह पुष्ट करता है कि मसीह का अवतार विशेष उद्देश्य के साथ हुआ: पाप को हरना और माँगना नहीं बल्कि उसे पूरी तरह समाप्त करना। यदि कोई यीशु पर विश्वास करता है, तो उसका जीवन पवित्रता के नए मानदंड से ढल सकता है, क्योंकि पाप के नियंत्रण से उसे मुक्त किया गया है।

दो मुख्य विषय

  • यीशु का उद्देश्य पाप के जाल को तोड़ना है, ताकि हमारे भीतर नयी रूहानी जीवन शुरू हो सके।
  • यीशु में रहने से हम पाप के विरुद्ध जीतने की क्षमता पाते हैं, न कि पुराने शरीर के अनुसार ही जीवन बिताने की बाध्यता।

समानार्थी संदिग्ध विचार (Cross-references)

• यूहन्ना 1:29 — “देखिए, परमेश्वर का मेमना जो संसार के पाप को हरता है।” यह भी पाप के विनाश और मसीह के भूमिका को पुष्ट करता है।

• हमारे जीवन को पवित्र बनाने में 1 यूहन्ना 2:6 का संकेत—जो चाहे मसीह के समान चलना है, उसका जीवन व्यवहार में प्रकट होना चाहिए।

अनुप्रयोग

1) आश्वस्त रहें कि यीशु का आना पाप की ताकतों पर विजय का प्रमाण है; इसलिए डर के बजाय विश्वास रखें।

2) हर दिन की जिन्दगी में पाप की प्रवृत्ति के विरुद्ध जागरूकता बनाए रखें और पवित्र जीवन की इच्छा रखें।

संक्षेप

यह verse हमें याद दिलाता है कि मसीह का आना पाप के प्रभाव को हराने के लिए था, और जिनके भीतर वह रहता है, वे पवित्र जीवन की दिशा में प्रेरित होते हैं। यह विश्वास और व्यवहार दोनों में पवित्रता के अगले चरण की ओर संकेत है।

टिप्पणी नोट

ऐल्बर्ट बार्न्स, मैथ्यू हेन्री और एडम क्लार्क के पारंपरिक टिप्पणियाँ इस विषय पर एकीकृत करती हैं कि मसीह का कार्य पाप की सत्ता को चुनौती देता है और हमारे जीवन में नैतिक परिवर्तन लाने का परम प्रयास है। (उद्धरण शैली के अनुसार केवल आवश्यक संक्षेप उद्धरण साझा हैं।)

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 यूहन्ना 3:5 समानांतर पद और संबंधित वचन

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