Old Testament
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इब्रानियों 4:10 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
क्योंकि जिस ने उसके विश्राम में प्रवेश किया है, उसने भी परमेश्वर के समान अपने कामों को पूरा करके विश्राम किया है। (प्रका. 14:13, उत्प. 2:2)
इब्रानियों 4:10 पद-दर-पद बाइबल टीका
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इब्रानियों 4:10 समानांतर पद और संबंधित वचन
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प्रकाशितवाक्य 14:13 (HINIRV) »
और मैंने स्वर्ग से यह शब्द सुना, “लिख: जो मृतक प्रभु में मरते हैं, वे अब से धन्य हैं।” आत्मा कहता है, “हाँ, क्योंकि वे अपने परिश्रमों से विश्राम पाएँगे, और उनके कार्य उनके साथ हो लेते हैं।”

इब्रानियों 4:3 (HINIRV) »
और हम जिन्होंने विश्वास किया है, उस विश्राम में प्रवेश करते हैं; जैसा उसने कहा, “मैंने अपने क्रोध में शपथ खाई, कि वे मेरे विश्राम में प्रवेश करने न पाएँगे।” यद्यपि जगत की उत्पत्ति के समय से उसके काम हो चुके थे।

1 पतरस 4:1 (HINIRV) »
इसलिए जब कि मसीह ने शरीर में होकर दुःख उठाया तो तुम भी उसी मनसा को हथियार के समान धारण करो, क्योंकि जिसने शरीर में दुःख उठाया, वह पाप से छूट गया,
इब्रानियों 4:10 का संदर्भ और अर्थ
पर्वित है कि प्रेम परिवर्तनशील नहीं, वरन परमेश्वर के विश्राम का अनुभव विश्वासियों के लिए एक लक्ष्य है। अध्याय 4 में लेखक परमेश्वर के विश्राम के विचार को यीशु मसीह के जीवंत जीवन के साथ जोड़ते हैं और कहते हैं कि जो लोग विश्वास में विश्राम के वचन में प्रवेश करते हैं, वे विश्राम के परम लक्ष्य को प्राप्त करते हैं। यह विश्राम केवल विश्राम-केवल शारीरिक नहीं, बल्कि परमेश्वर की पूर्णता, संतोष, और उसकी योजना के अनुसार जीवन बिताने का आंतरिक शांति है। जिस प्रकार परमेश्वर नेष्वर ने सृष्टि के छः दिन काम करके विश्राम किया, उसी प्रकार ईश्वर-विश्वासियों के लिए जीवन में एक आंतरिक विश्राम है, जिसमें वे परमेश्वर के कार्यों को पूरा समझते और संतुष्ट रहते हैं।
मुख्य अर्थ
यह verses यह बताता है कि ईश्वर के विश्राम में प्रवेश करना केवल पुरानी देहाती विश्राम नहीं है, बल्कि एक आध्यात्मिक अवस्था है जिसमें जीवन-पथ के उत्तरदायित्वों को सही ढंग से निभाते हुए भी शांति बनी रहती है। विश्राम में प्रवेश करना मतलब परमेश्वर के प्रति पूर्ण भरोसा और उसके कामों को फलीभूत करने का आत्मविश्वास।
दो मुख्य विषय
संदर्भित.cross-उद्धरण
प्रकाशित संदर्भ: - उत्पत्ति 2:2: परमेश्वर ने सिर्जना के छः दिन में काम पूरा किया और सातवें दिन विश्राम किया; यह प्रमाण है कि काम-धर्म नहीं, बल्कि निष्कर्ष की शांति परमेश्वर के साथ है। - प्रेरितों के व्यवहार 14:13: विश्राम के अनुभव का प्रेरक उल्लेख—प्रभु के कार्यों में स्थिरता और विश्वास का अवलंब।
इन संदर्भों से संकेत मिलता है कि विश्राम एक नियत स्थिति है जहाँ यह विश्वासी परमेश्वर के सामीप्य में रहकर अपने कार्यों को ईमानदारी से निभाते हैं, न कि थकान या चिंता में डूबकर।
प्रैक्टिकल विचार
1) दैनिक विश्वास: हर दिन परमेश्वर के स्रोत से शक्ति मांगना ताकि कार्यों के बीच भी शांति बनी रहे।
2) संतुष्टि की योग्यता: अपने उत्तरदायित्वों को निभाते समय भी मन में संतोष बनाए रखना कि परमेश्वर ने सब कुछ योजना के साथ किया है।
संक्षेप
इस पद के अनुसार वास्तविक विश्राम वह है जब जीवन के सभी काम परमेश्वर की योजना के अनुरूप चलते हों और हम उसके समान अपने कामों को पूर्ण मानकर आराम पाएं। यह विश्राम बाहरी विश्राम तक सीमित नहीं, बल्कि आंतरिक विश्वास-आनंद और परमेश्वर के सत्व के साथ जीवन बिताने की एक अवस्था है।
सूक्ष्म cross-उद्धरण नोट
यदि आप मैथेय हेन्री, अल्बर्ट बार्न्स या एडम क्लार्क के शब्दों से संक्षिप्त उद्धरण देखना चाहें, तो वे विश्राम के सिद्धांतों में इसी गहराई की पुष्टि करते हैं: विश्वास के साथ विश्राम में प्रवेश करना, परमेश्वर के कर्मों के पूर्णता पर निर्भरता और उसकी योजना की स्थिरता के साथ चलना—यह सब इन विद्वानों के कई Commentary में समान तौर पर प्रकट है। (कृपया ध्यान दें कि नीचे उद्धरण पूरे पाठ से नहीं, बल्कि उनके विचारों के संक्षेपात्मक स्वरूप लिए जाते हैं।)