Old Testament
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इब्रानियों 4:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तो फिर वह किसी विशेष दिन को ठहराकर इतने दिन के बाद दाऊद की पुस्तक में उसे ‘आज का दिन’ कहता है, जैसे पहले कहा गया, “यदि आज तुम उसका शब्द सुनो, तो अपने मनों को कठोर न करो।” (भज. 95:7-8)
इब्रानियों 4:7 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
इब्रानियों 4:7 समानांतर पद और संबंधित वचन
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भजन संहिता 95:7 (HINIRV) »
क्योंकि वही हमारा परमेश्वर है, और हम उसकी चराई की प्रजा, और उसके हाथ की भेड़ें हैं। भला होता, कि आज तुम उसकी बात सुनते! (निर्ग. 17:7)

इब्रानियों 3:15 (HINIRV) »
जैसा कहा जाता है, “यदि आज तुम उसका शब्द सुनो, तो अपने मनों को कठोर न करो, जैसा कि क्रोध दिलाने के समय किया था।”

मूल अर्थ (स्पष्ट सार):
इब्रानियों 4:7 में कहा गया है कि परमेश्वर दाऊद की पुस्तक के अनुसार “आज का दिन” ठहराते हैं और मनुष्यों से कहते हैं कि अगर वे उसका शब्द सुनते हैं तो अपने मनों को कठोर न करें। यह एक आह्वान है कि हम प्रभु के आशीर्वचन के सामने आज ही प्रतिक्रिया दें, न कि उसे टाल कर भावी अवसरों पर स्थगित करें।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह अध्याय 4 का भाग ईसा मसीह के पीछे प्रतिपादन के रूप में “आराम का अध्याय” है। लेखक यह दिखाते हैं कि परमेश्वर ने पहले युवाओं के जमाने से लेकर आज तक के लोगों के लिए अपने आराम का प्रस्ताव रखा है, परन्तु असंख्य लोग उन प्रस्तावों को ठुकराते रहे। यहाँ “आज” शब्द एक ताजा, निरंतर अनुभव के अवसर के रूप में प्रस्तुत किया गया है—ताकि हर पीढ़ी अपने जीवन में ईश्वर के शब्द को मान्यता दे।
व्याख्या के प्रमुख बिंदु
व्याख्यात्मक नोट्स (सार)
- “आज” का अवसर धर्म-जीवन में निरन्तर चलने वाला वर्तमान है, न कि पीछे हटने का समय।
- भक्तों को चूंकि प्रभु के शब्द के अधीन रहना चाहिए, इसलिए धर्म-जीवन में अडिगता और विनम्रता आवश्यक है।
संबंधित आयतें (संक्षिप्त पक्षपोत)
1) भजन 95:7-8: परमेश्वर की उपस्थिति में देखते हुए, हमारे हृदय को नम रखने की जरूरत पर जोर। इससे “आज” के दिन में क्रिया में आना सरल होता है।
2) हैब 3-4 अध्याय: ईश्वर के आराम के संदेश को समझाने के लिए पुरानी व नवई व्यवस्था के बीच संबंध को दर्शाते हैं।
3) मत्ती 11:28-30: शांति और विश्राम का वास्तविक स्रोत, जो आज भी हमारे लिए है, क्योंकि यह उद्धार का निमंत्रण है।
पवित्र शब्द से जुड़ी विशिष्ट बातें
यह पंक्ति दाऊद की कविताओं के संदर्भ को उद्धृत करती है, जो कि युग-युग के लिए व्यवहारिक चेतावनी और आहुति है—“आज” के दिन प्रभु के साथ संगत रहें।
व्यावहारिक takeaway
हर दिन प्रभु के शब्द को सुनना और उसके अनुसार अपने जीवन को ढालना आवश्यक है। आज के दिन में विश्वास को ठहराने से ही शांत रीति से जीवन के मुश्किल पहाड़ काटे जा सकते हैं।
महत्वपूर्ण उद्धरण (यदि लागू हो)
यह भाग में Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के शास्त्रीय टिप्पणीकारों के प्रत्यक्ष संक्षिप्त विचार कभी-भी सम्मिलित किए जाते हैं; उपलब्ध होने पर नीचे छोटे उद्धरणों के रूप में दिया जाएगा:
– “यदि आज तुम उसका शब्द सुनो, तो अपने मनों को कठोर न करो।” (भज 95:7-8 का संदर्भ)
क्रॉस-रेफरेंस और उनके संक्षिप्त स्पष्टीकरण
1) भज 95:7-8 — प्राचीन स्मृति से प्रेरणा: व्यक्त करता है कि ईश्वर के पथ पर तत्कालिकता है और मन का नम्र होना अनिवार्य है।
2) हैब 3-4 — आराम के विषय की व्याख्या: परमेश्वर के आराम के अनुभव को जीने के लिए विश्वासी को अपने जीवन में सच्चे विश्वास के साथ चलना चाहिए।
3) मत्ती 11:28-30 — विश्राम का मूल स्रोत: प्रभु में शांति पाना संभव है, जो कि जीवन के सारे दबावों को संभाल लेती है।