Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीइब्रानियों 2:11 बाइबल पद की व्याख्या
इब्रानियों 2:11 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
क्योंकि पवित्र करनेवाला और जो पवित्र किए जाते हैं, सब एक ही मूल से हैं, अर्थात् परमेश्वर, इसी कारण वह उन्हें भाई कहने से नहीं लजाता।
इब्रानियों 2:11 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
इब्रानियों 2:11 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

इब्रानियों 10:10 (HINIRV) »
उसी इच्छा से हम यीशु मसीह की देह के एक ही बार बलिदान चढ़ाए जाने के द्वारा पवित्र किए गए हैं। (इब्रा. 10:14)

इब्रानियों 10:14 (HINIRV) »
क्योंकि उसने एक ही चढ़ावे के द्वारा उन्हें जो पवित्र किए जाते हैं, सर्वदा के लिये सिद्ध कर दिया है।

रोमियों 8:29 (HINIRV) »
क्योंकि जिन्हें उसने पहले से जान लिया है उन्हें पहले से ठहराया भी है कि उसके पुत्र के स्वरूप में हों ताकि वह बहुत भाइयों में पहलौठा ठहरे।
मुख्य बिंदु
इब्रानियों 2:11 में परमेश्वर—जो पवित्र करते हैं और जिन्हें पवित्र किया गया है—उनके बीच गहरा एकत्व दर्शाया गया है। येशु के भीतर पत्र लिखा गया कि भगवान के पवित्रता और कृपा से वह अपने भाइयों में समान भागीदारी बनाकर उन्हें अपने साथ भागीदार मानते हैं। यह वचन भरोसे, सम्मान, और पारिवारिक संबंधों की बदौलत उस गहरे कर्तव्य की ओर संकेत करता है जिसमें पवित्रीकरण और भाईचारे के बंधन एक साथ चलते हैं।
साहित्यिक संदर्भ
यह पाठ यूनिटेड फ्रेमवर्क में है जहाँ लेखक यह दिखाते हैं कि यीशु, जो सृष्टिकर्ता नहीं बल्कि सुसमाचार के पवित्र उद्देश्य के तहत मानवजाति के लिए आकर पवित्र बनते हैं, स्वयं उन लोगों के साथ एक ही मूल से हैं जिन्हें वह पवित्र करता है। यह उद्धारकार्य के बीच भाईचारे की अभिव्यक्ति है—यीशु को “भाई” कहना माने कि वह मानवजाति के लिए दया, विश्वास और निष्ठा के साथ एक समान भूमिका में हैं।
धार्मिक महत्त्व
- पवित्र करनेवाला और पवित्र किए गए सब एक ही मूल से: यह बताता है कि परमेश्वर की पवित्रता और अधिकारिता से जन्म लेने वाले संबंध एक स्वभाव के हैं, न कि merely सामाजिक संबंंध। इसका परिणाम यह है कि विश्वासियों के लिए Jesus एक आदरणीय भ्राता के रूप में जाना जाता है।
- “इसी कारण वह उन्हें भाई कहने से नहीं लजाता”: यीशु द्वारा भाइयों को अपनाने का यह संकेत बताता है कि दया और विश्वास से भरा रिश्ते परमेश्वर की मंगलपर्व से जुड़ता है; यह हमारे प्रति उसका सम्मान और प्रेम स्थिर है।
पाठ के साहित्यिक संरचना से सीख
- पवित्रता की दयालुता: भगवान अपने लोगों की पवित्रता के लिए जिम्मेदार है और यह दया के साथ जुड़ी है।
- भ्रातृत्व का अधिकार: यीशु पुत्र-उच्चता में भी अपने भाइयों के साथ एक ही मूल में होने का दावा नहीं छोड़ते; यह हमारी-उसके साथ एकत्र भागीदारी की पुष्टि है।
उचित क्रॉस-रेफरेंस
1) रोम 8:29— परमेश्वर ने जिनको पहले से जाना, उन्हें पुत्रत्व के रूप में ग्रहण किया; यह बਿਨा भेदभाव के भाईचारे का आधार बनता है।
2) फिलिप्पि 2:6-8— यीशु की विनम्रता और मानव रूप में स्व-त्याग का उदाहरण; पवित्रता और भ्रातृत्व का समन्वय स्पष्ट होता है।
3) 1 पतरस 1:14-16— पवित्रता में आहुति और यह संसार के अनुसार नहीं जीना, परमेश्वर के पवित्र स्वरूप के अनुरूप होना।
सोच-विचार के प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
इब्रानियों 2:11 हमें बताता है कि परमेश्वर की पवित्रता और प्रेम से बने रिश्ते एक एकीकृत परिवार की रचना करते हैं—जहाँ यीशु अपने भाइयों-बहनों के साथ एक ही मूल से हैं और उन्हें अपने साथ बुलाते हैं। यह विचार हमारे लिए प्रेरणा है कि पवित्र जीवन के बजाय भी, भला-चंगा समुदाय और समान अधिकार के साथ एकजुट रहें।
संदर्भ आयात (उद्धरण) - Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke से कोई भी स्पष्ट छोटे उद्धरण उपलब्ध हों तो बताएं; फिलहाल इन पंक्तियों में संक्षिप्त सार प्रस्तुत किया गया है।