Old Testament
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इब्रानियों 2:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
उसने उस आनेवाले जगत को जिसकी चर्चा हम कर रहे हैं, स्वर्गदूतों के अधीन न किया।
इब्रानियों 2:5 पद-दर-पद बाइबल टीका
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इब्रानियों 2:5 समानांतर पद और संबंधित वचन
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2 पतरस 3:13 (HINIRV) »
पर उसकी प्रतिज्ञा के अनुसार हम एक नये आकाश और नई पृथ्वी की आस देखते हैं जिनमें धार्मिकता वास करेगी। (यशा. 60:21, यशा. 65:17, यशा. 66:22, प्रका. 21:1, 27)

इब्रानियों 6:5 (HINIRV) »
और परमेश्वर के उत्तम वचन का और आनेवाले युग की सामर्थ्य का स्वाद चख चुके हैं*।

प्रकाशितवाक्य 11:15 (HINIRV) »
जब सातवें स्वर्गदूत ने तुरही फूँकी, तो स्वर्ग में इस विषय के बड़े-बड़े शब्द होने लगे: “जगत का राज्य हमारे प्रभु का और उसके मसीह का हो गया और वह युगानुयुग राज्य करेगा।” (दानि. 7:27, जक. 14:9)
मुख्य व्याख्या: दाइजेस्टेड लक्ष्य—युग के आनेवाले जगत के अधिकार के बारे में
इब्रानियों 2:5 में कहा गया है कि उसने उस आनेवाले जगत को, जिसकी चर्चा हम कर रहे हैं, स्वर्गदूतों के अधीन न किया। इस आयत का प्रमुख विचार यह है कि ईश्वरीय योजना में भविष्य का पूर्णत्व—जगत का मानवीय-आख्यान और नई सृष्टि—स्वर्गदूतों के नियंत्रण के अधीन नहीं है बल्कि प्रभु यीशु के द्वारा स्थापित महान उद्देश्य के अंतर्गत है। यह बताता है कि हमारी आशा परमेश्वर की योजना के उच्च स्थान पर स्थित है, जो कि एक दिन पूरी की जानी है, और जिसमें देवीय प्रबलता मानव इतिहास के भीतर क्रिया-रूप लेती है।
पाठ के साहित्यिक सन्दर्भ ( literary context )
यह वाक्य पत्रुस-लेखक के संदर्भ में है, जो चेतावनी देता है कि चमत्कारी स्वर्गदूतों के साथ तुलना करके ईमानदारी की धारणा में भटकना नहीं चाहिए। फिर भी यहाँ पर “उस आनेवाले जगत” का उल्लेख उन लोगों के लिए आश्वासन है जो विश्वास के द्वारा परमेश्वर के राज्य के वास्तविक आधार की प्रतीक्षा कर रहे हैं। यह अंश पुराने नियम की पुरानी अपेक्षाओं और नए नियम की पूर्णता के बीच एक पुल की तरह कार्य करता है—यानी वह दायित्व जो ईश्वर ने मनुष्यों के लिए निर्धारित किया है, वह स्वर्गीय सत्ता के अधीन नहीं, बल्कि उद्धारकर्ता के उद्घोष में पूर्ण होता है।
धर्मशास्त्रीय महत्व (theological significance)
यह आयत हमें यह संकेत देती है कि ईश्वर की योजना पूरी तरह से उद्धार संसार के लिए बनाई गई है—स्वर्गदूत इस योजना के नियंत्रण-कर्ता नहीं हैं, बल्कि उन्हें भी उसके पूर्णत्व के साथ सहयोग करना है। नया सृजन और उसकी शिक्षा, जिसमें मानवजाति को न केवल बचाया गया है बल्कि पिता की महिमा में विकसित किया जाएगा, वह Christus के माध्यम से आगे बढ़ेगा। यह स्थिरता प्रभु यीशु के नेतृत्व और क्रillosया के अंतर्गत है, न कि स्वर्गदूतों के विधान के आधार पर।
आयत से जुड़ी प्रवचनों के उदाहरण (cross-references) और उनके प्रभाव
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि क्रायस्पर के तहत ब्रह्माण्डीय सत्ता का उद्देश्य मानवकल्याण और परमेश्वर के राज्य की स्थापना है, न कि किसी अन्य महत्त्व की सत्तात्मक संरचना।
जीवंत मन-मंत्रण (questions for reflection)
संक्षिप्त निष्कर्ष
ईश्वर की योजना में भविष्य का जगत অवश्य पूर्ण होगा, पर वह प्रभु यीशु के द्वारा और उनके शासन के द्वारा ही पूरा होगा—स्वर्गदूत उस योजना के नियंत्रणकर्ता नहीं हैं। इस आयत ने हमें विश्वास-जीवन में एक स्थिर केंद्र दिया कि हमारे प्रतीक्षित जगत की वास्तविकता उद्धारकर्ता की सत्ता, कृपा और कार्य के साथ जुड़ी है।
पवित्र-उद्धरण (exact quotes from classical commentators, if available)
Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke से इस आयत के लिए संक्षिप्त मूल्यांकन मिलते हैं, परन्तु यहाँ सीधे उनके पूर्ण उद्धरण शामिल नहीं किए जा रहे हैं। उनके विश्लेषणों में सामान्यतः यह भावना है कि भविष्य का जगत और उद्धार का क्रम परमेश्वर के तात्कालिक और दूरगामी उद्देश्य के भीतर घटित होता है, और स्वर्गदूत उसका नियंत्रण-कर्ता नहीं।