1 पतरस 1:25 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

परन्तु प्रभु का वचन युगानुयुग स्थिर रहता है*।” और यह ही सुसमाचार का वचन है जो तुम्हें सुनाया गया था। (लूका 16:17, 1 यूह. 1:1, यशा. 40:8)

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1 पतरस 1:25 पद-दर-पद बाइबल टीका

Meaning in One Sentence

परन्तु प्रभु का वचन युगानुयुग स्थिर रहता है—यही सच्चे विश्वास का आधार है, क्योंकि शास्त्र के अभिन्न वचन के विपरीत न कभी टूटते हैं, और यही सुसमाचार का चेतावनी और आत्मिता प्रदान करने वाला संदेश है जिसे हमने सुना है।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

1 पतरस 1:25 उद्धरण का मूल यहूदियों के विचारों में है कि 하나님 का वचन स्थिर और अविनाशी है, जबकि मनुष्य की नियति परिवर्तनशील है। इस पाठ में प्रेरित पतरस यह बतला रहे हैं कि प्रभु का वचन स्थायित्व के साथ चलने वाला है और वही संदेश है जिसे ईसामुख से सुनाया गया है—यही जीवित सुसमाचार का केंद्र है।]

व्याख्या के मुख्य बिंदु

  • युगानुयुग स्थिर रहने वाला वचन: परमेश्वर का वचन चिरस्थायी है; समय के साथ नहीं बदलता।
  • सुसमाचार का तथ्य: वही प्रसंग है जिसे श्रोताओं ने सुना और स्वेच्छा से विश्वास किया; यह बाँचने और समझने के योग्य है, न कि केवल पुराणी स्मृति।
  • अनुष्ठानिक दायित्व: विश्वासियों के लिए इस स्थायित्व को स्मरण रखना एक जीवनचरित का आधार बन जाता है—जीवन-परिवर्तनकारी प्रभाव डालता है।

अनुवादित संदिग्ध नोट्स (व्याख्या से जुड़ी दृष्टि)

यहां पर Luke 16:17, 1 John 1:1, Isaiah 40:8 जैसे समान विचारों के साथ भी स्पष्ट रूप से यह बार-बार दिखता है कि परमेश्वर का वचन अचल है, और वही मार्गदर्शक है जिसे ईश्वरीय सुसमाचार के रूप में सुनाया गया है।

कथात्मक-थीमैटिक सार

  • स्थिरता बनाम परिवर्तन: परमेश्वर का वचन स्थिर है; मनुष्य के विचार और समय के साथ उसका प्रभाव बना रहता है।
  • सुसमाचार का आवाहन: यह वचन जीवन देने वाला संदेश है जो पहले सुना गया था और अब भी जीवित है।

क्रॉस-रेफरेंसेस और उनका संक्षिप्त अर्थ

लूका 16:17 और 1 यूहन्ना 1:1 में उद्धृत स्थिरता की प्रकृति यही दर्शाती है कि ईश्वर का वचन समयानुसार बदल नहीं सकता। यशा 40:8 बताता है कि आहत और नाश न हो सकने वाले शब्द ही रहते हैं; यह संगत है कि सुसमाचार का संदेश भी अमर है।

व्यावहारिक अनुप्रयोग

हम अपने जीवन में इस वचन की स्थिरता पर टिकें: भय के समय में आशा दें, संदेह के क्षणों में स्मरण करें कि प्रभु का वचन अभी भी सच है और वह हमारे विश्वास की नींव है।

इतिहास-प्रश्न

1) इस वचन के कारण हमारे दैनिक जीवन में विश्वास की स्थिरता कैसे उभरती है? 2) आधुनिक चुनौती के बीच सुसमाचार की सच्चाई को कैसे बनाए रखें? 3) किस प्रकार यह स्थिरता सामाजिक-आचरण को प्रभावित करती है?

उद्धृत अनुभाग (संक्षेप)

पांच-पंक्ति सार: परमेश्वर का वचन स्थिर है; यह सुसमाचार का संदेश है जिसे पहले भी सुना गया और अब भी जीवित है; इसलिए विश्वासियों को इसे आधार बनाकर जीवन बिताना चाहिए।

नोट: नीचे दिए गए स्पष्ट उद्धरण सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों से संदर्भित हैं यदि उपलब्ध हों—Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke—परन्तु मूल लेख में हमने सार-सार विचारों को नया रूप दिया है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 पतरस 1:25 समानांतर पद और संबंधित वचन

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