Old Testament
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यशायाह 40:8 का स्पष्ट अर्थ
घास सूख जाती है और फूल मुरझा जाते हैं, परन्तु परमेश्वर का वचन सदैव अटल रहता है। इसका तात्पर्य यह है कि प्रकृति की निर्भरता क्षणभंगुर है, किन्तु ईश्वर के विश्वासयोग्य दायित्व और वचन स्थिर रहते हैं। यह वचन हमसे उन परिस्थितियों में भी आशा बनाये रखने को कहता है जब मानव जीवन अस्थिर प्रतीत होता है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यशायाह पुस्तक के इस हिस्से में ईश्वर ने राज्य के आकाशीय गुणों와 उद्धार की उम्मीदों का उद्घाटन किया है। पहले के अध्यायों में प्रकृति की नश्वरता, क्षय और निर्भरता दिखायी गई थी, परन्तु यहाँ ईश्वर अपने विश्वस्नीय वचन की अनंत स्थिरता का प्रत्यक्ष प्रमाण देते हैं। यह संदेश बन्धुओं को अनुग्रह, साहस और विश्वास देता है कि परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी कठिन हों, परमेश्वर का वचन अचल है।
व्याख्यात्मक अवलोकन
कथनात्मक निष्कर्ष (थीमैटिक पॉइंट्स)
अन्य संबंधित पंक्तियाँ (क्रॉस-रेफरेंस)
परोक्ष प्रभाव और व्यवहारिक takeaway
जब परिस्थितियाँ पल-पल परिवर्तित होती दिखें, तब हमें अपनी आस्था को घास-फूस की तरह नष्ट होने दें; बल्कि परमेश्वर के वचन की अटलता पर टिके रहें। दैनंदिन जीवन में दैनिक प्रार्थना, आधिकारिक विश्वसनीय बाइबल पठन-ध्यान और परमेश्वर के वचन पर निर्भर रहने से स्थिरता मिलती है।
संदर्भ उद्धरण (कम मात्रा में)
मैथ्यू हेनरी, एल्बर्ट बर्न्स और एडम क्लार्क की प्रकाशित टिप्पणी से जहाँ तक उल्लेखित है, उनके मौलिक शब्दों का संख्यात्मक उद्धरण यहाँ शामिल किया गया है यदि उपलब्ध है:
जगह-जगह कहा गया है कि परमेश्वर के वचन उच्चतम स्थिरता का प्रतिमान है; प्रकृति की चीजें परिवर्तनशील हैं, पर वचन अटल है।
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