यशायाह 40:15 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

देखो, जातियाँ तो डोल की एक बूंद या पलड़ों पर की धूल के तुल्य ठहरीं; देखो, वह द्वीपों को धूल के किनकों सरीखे उठाता है।

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यशायाह 40:15 पद-दर-पद बाइबल टीका

यशायाह 40:15 पर commentary (HINIRV)

यह पंक्ति ऐसा दृश्य प्रस्तुत करती है जो परमेश्वर की महिमा और मानव समाज की नश्वरता को एक साथ उभारती है। जहाँ सारी जातियाँ, पलड़े पर रखी डोल के समान छोटी और अयोग्य लगती हैं, वहीं परमेश्वर आकाश से धरती तक सब कुछ धारण करने वाला महान निर्माता है। यह Verse मानव तानाशाहियों के संदिग्ध प्रभाव को चुनौती देता है और हमारे जीवन में ईश्वर के अधिकार को स्पष्ट करता है।

पर्व के स्थान में यह पद

यशायाह 40 में प्रवचनों का उद्देश्य यह है कि लोगों में परमेश्वर की महिमा और उद्धार की योजना की वास्तविकता जागृत हो। 40:15 दर्शाता है कि परमेश्वर संपूर्ण तौक-तौल से परे है; नतीजतन, राष्ट्र, कुल, या मानव-योजनाओं की महत्ता उसकी दृष्टि में गौण है। “जातियाँ…” और “पलड़ों” की तुलना से यह समझ आता है कि मानव साम्राज्य कितने छोटे और क्षुद्र हैं, जबकि परमेश्वर सबका अधिकारी है।

मुख्य आध्यात्मिक शिक्षा

  • परमेश्वर की महानता बनाम मानव की नगण्यता: सत्ता और कतरों के मूल्य का वास्तविक आकलन यही है कि ईश्वर सबका मालिक है और सभी विचार या शक्तियाँ उसका अधिकार नहीं छीन सकतीं।
  • विश्वास की शिक्षा: हर असली आशा वही देता है जो सारी सृष्टि को धार देता है; हमारी सुरक्षा और स्थिरता उसी पर है जो अनजानताओं को भी नियंत्रित करता है।

अनुशासनात्मक तुलना

– बनाम अन्य ग्रंथ: परमेश्वर की महिमा के बारे में नीचे के संदर्भ इन विचारों को पुष्ट करते हैं—यशायाह 40:12–14 में परमेश्वर के बलेपन और ज्ञान की तुलना; मीका 2:13 में उद्धारकर्ता का अग्रिम आह्वान; 1 पतरस 5:11 में परमेश्वर की सत्ता और बल की स्थिरता।

विधिवत अनुप्रयोग

– अपने दृष्टिकोण को साधे रखना: किसी भी राष्ट्रीय या वैचारिक ताकत के सामने दया, नम्रता और विश्वास बनाए रखें, क्योंकि वास्तविक निर्णायक शक्ति वही है जो सृष्टि को संचालित करती है।

– आस्था बनाम भय: बड़ी प्रणालियों के बीच भी, ईश्वर की योजना सुरक्षित रहती है; हमारे निर्णय उनकी दिशा में होने चाहिए ताकि जीवन में स्थिरता मिले।

क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप) और उनका संक्षिप्त अर्थ

– यशायाह 40:12–14: परमेश्वर के ज्ञान और सामर्थ की महानता का पूरक परिचय देता है, जो हर विद्यमान सत्ता से ऊपर है।

– मत्ती 11:28–30: परमेश्वर के हाथ में हल्का-फुल्का बोझ नहीं, बल्कि शांति और विश्राम की राह मिलती है; यह दृश्य हमारे जीवन में सच्चे उद्धार की प्रकृति बताता है।

– 1 पतरस 5:6–7: ईश्वर के समक्ष हमारेhak इज्जत और चिंता कम होना चाहिए; वह सब कुछ संभाल लेता है।

सारांश

यशायाह 40:15 एक शक्तिशाली स्मरण कराता है कि मनुष्य की महिमा सीमित है, जबकि परमेश्वर के राज्य की महिमा अस्वीकार्य नहीं। यह उद्धारक संदेश है कि हर बड़े भीड़-भाड़ और सत्ता-प्रधानता के बीच ईश्वर की पहचान और नियंत्रण बना रहता है। हमारी आस्था नश्वर गर्व को नहीं, बल्कि परमेश्वर की असीम शक्ति को स्वीकार करे।

उद्धरण स्रोत की ओर संकेत: नीचे के विचारों में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-घोषित टिप्पणियाँ एकीकृत हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यशायाह 40:15 समानांतर पद और संबंधित वचन

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यशायाह 40:22 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यशायाह 40:22 (HINIRV) »
यह वह है जो पृथ्वी के घेरे के ऊपर आकाशमण्डल पर विराजमान है; और पृथ्वी के रहनेवाले टिड्डी के तुल्य है; जो आकाश को मलमल के समान फैलाता और ऐसा तान देता है जैसा रहने के लिये तम्बू ताना जाता है;

यिर्मयाह 10:10 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यिर्मयाह 10:10 (HINIRV) »
परन्तु यहोवा वास्तव में परमेश्‍वर है; जीवित परमेश्‍वर और सदा का राजा वही है। उसके प्रकोप से पृथ्वी काँपती है, और जाति-जाति के लोग उसके क्रोध को सह नहीं सकते। (नहू. 1:6)

यशायाह 59:18 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यशायाह 59:18 (HINIRV) »
उनके कर्मों के अनुसार वह उनको फल देगा, अपने द्रोहियों पर वह अपना क्रोध भड़काएगा और अपने शत्रुओं को उनकी कमाई देगा; वह द्वीपवासियों को भी उनकी कमाई भर देगा। (जक. 17:10, प्रका. 20:12,13, नहू. 1:2, प्रका. 22:12)

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