मत्ती 24:35 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

आकाश और पृथ्वी टल जाएँगे, परन्तु मेरे शब्‍द कभी न टलेंगी।

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मत्ती 24:35 पद-दर-पद बाइबल टीका

मत्ती 24:35 पर टिप्पणी (HINIRV)

इस पद में यीशु भविष्यवाणी करते हैं कि आकाश और पृथ्वी यौन-परिवर्तन या क्षय से गुजरेंगे, परन्तु उसके शब्द कभी टलेंगे नहीं। इसका संदर्भ संदिग्ध संकेतों के बीच स्थिरता का विश्वास देता है—ईश्वर के उद्देश्य और उसकी वाणी की अटलता। शाब्दिक तौर पर यह समय की कसौटी पर है: ब्रह्मांडीय संरचना कितनी भी बदल जाए, प्रभु के उद्घोषण और भविष्यवाणियाँ समरूपी रहेंगी।

केंद्रीय भावार्थ

येशु कहते हैं कि संसार की सारी स्थिति परिवर्तनशील है—आकाश-प्रकृति कभी-कभी सहायिकी रूप से परिवर्तनशील दिखती है—पर उनके शब्द शाश्वत और अपरिवर्तनीय रहते हैं। यह पाठ विश्वासियों को आश्वस्त करता है कि परमेश्वर का संदेश और प्रतिज्ञा नहीं बदलेगी, चाहे दुनिया पलटे या क्षय हो जाए।

2–3 मुख्य विषय

  1. स्थिरता बनाम परिवर्तन: संसार की घटनाओं के बीच परमेश्वर की वाणी अचल रहती है; यह भरोसा देता है कि जो वह कहता है, वह पूर्ण होगा।
  2. कायमीता की गवाही: पूर्वसूचित संकेतों के बीच ईश्वर की योजना निरंकुश नहीं, बल्कि उचित समय पर पूरी होगी।
  3. आत्मविश्वास और उत्साह: परीक्षणों के समय में भी विश्वासियों को यीशु के Worte पर टिके रहने की प्रेरणा मिलती है।

संबद्ध बाइबल संदर्भ

1) मरकुस 13:31 और लूका 21:33—तीनों समानताएँ दिखाती हैं कि सर्वशक्तिमान की वाणी परिवर्तनशील संसार से ऊपर है।

2) यह 2 पतरस 3:10–11 के साथ मेल खाता है, जहाँ धरती के भयावह परिवर्तन भी परमेश्वर के आयोजनों के अंतर्गत अधीन हैं, और ईश्वर की पवित्रता के अनुरूप जीवन जीने की प्रेरणा मिलती है।

3) यह टेक्स्ट रेफरेंसम में रोम 15:4 और इब्रानी 6:18–19 के साथ भी संगत है, जहाँ पवित्र शास्त्रों की प्रेरणा और आशाएं स्थिर रहती हैं।

व्यावहारिक चिंतन

आज के समय में अराजकता, अंधविश्वास और अनिश्चितता के बीच यह वाक्य हमें स्मरण कराता है कि परमेश्वर की उद्घोषणा से बढ़कर कुछ भी नहीं—हम उनके शब्दों पर टिके रहें, और संसार की परिवर्तनशीलता के बीच उनके वचन के प्रकाश में जीवन जिएं। कठिन परिस्थितियों में भी प्रार्थना, विश्वास और चरित्र-निर्माण के लक्ष्य को न छोड़ें।

संक्षिप्त निष्कर्ष

आकाश-पृथ्वी के टल जाने की संभावना के विरुद्ध, यीशु का संदेश अचल है—उसकी वाणी कभी नहीं टूटती। यह भरोसा हमें जीवन के हर मोड़ पर आशा और धैर्य देता है, क्योंकि परमेश्वर का उद्देश्य और उसकी प्रेरिति सदा प्रबल रहती है।

संदर्भित उद्धरणs

एडम क्लार्क, आगमन और चरित्र पर चर्चा करते समय स्पष्ट करते हैं कि ईश्वर की कथन शाश्वत हैं और पृथ्वी की परिवर्तनशीलता उनके योजनाओं को प्रभावित नहीं करती। (यदि उपयुक्त हो, साइट के पाठकों के लिए क्लार्क के समान विचारों के हल्के संदर्भ जोड़े जा सकते हैं।)

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

मत्ती 24:35 समानांतर पद और संबंधित वचन

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यशायाह 40:8 (HINIRV) »
घास तो सूख जाती, और फूल मुर्झा जाता है; परन्तु हमारे परमेश्‍वर का वचन सदैव अटल रहेगा*। (1 पत. 1:24,25)

1 पतरस 1:25 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
1 पतरस 1:25 (HINIRV) »
परन्तु प्रभु का वचन युगानुयुग स्थिर रहता है*।” और यह ही सुसमाचार का वचन है जो तुम्हें सुनाया गया था। (लूका 16:17, 1 यूह. 1:1, यशा. 40:8)

गिनती 23:19 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
गिनती 23:19 (HINIRV) »
परमेश्‍वर मनुष्य नहीं कि झूठ बोले, और न वह आदमी है कि अपनी इच्छा बदले। क्या जो कुछ उसने कहा उसे न करे? क्या वह वचन देकर उसे पूरा न करे? (रोम. 9:6-2, तीमु. 2:13)

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