Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मत्ती 24:1 मत्ती 24:2 मत्ती 24:3 मत्ती 24:4 मत्ती 24:5 मत्ती 24:6 मत्ती 24:7 मत्ती 24:8 मत्ती 24:9 मत्ती 24:10 मत्ती 24:11 मत्ती 24:12 मत्ती 24:13 मत्ती 24:14 मत्ती 24:15 मत्ती 24:16 मत्ती 24:17 मत्ती 24:18 मत्ती 24:19 मत्ती 24:20 मत्ती 24:21 मत्ती 24:22 मत्ती 24:23 मत्ती 24:24 मत्ती 24:25 मत्ती 24:26 मत्ती 24:27 मत्ती 24:28 मत्ती 24:29 मत्ती 24:30 मत्ती 24:31 मत्ती 24:32 मत्ती 24:33 मत्ती 24:34 मत्ती 24:35 मत्ती 24:36 मत्ती 24:37 मत्ती 24:38 मत्ती 24:39 मत्ती 24:40 मत्ती 24:41 मत्ती 24:42 मत्ती 24:43 मत्ती 24:44 मत्ती 24:45 मत्ती 24:46 मत्ती 24:47 मत्ती 24:48 मत्ती 24:49 मत्ती 24:50 मत्ती 24:51



मत्ती 24:7 — immediate setting
यह पद यीशु के अंतिम समय के संकेतों के discourse का भाग है, जिसमें वह अपने शिष्यगण को बताता है कि आखिर समय कैसे व्यवहार होगा। हालाँकि लोगों के बीच अशांति और दुख बढ़ेंगे, यीशु स्पष्ट करते हैं कि घटनाएं क्रम में घटेंगी—जातियाँ, राज्य-चढ़ाइयाँ, अकाल और प्रकोप—पर ये सब एक बड़ा लक्ष्य की ओर इशारा करते हैं: ईश्वर की योजना और दुनिया के अंत की तैयारी।
ईश्वरीय योजना में विश्वास का संकेत
इस उपदेश के भीतर परमेश्वर के नियंत्रण की पुष्टि मिलती है। भयावह घटनाओं के बीच भी विश्वासियों के लिए आशा का स्रोत बना रहता है—क्योंकि घटनाओं का यह क्रम अंतिम योजनाओं के घोषणापत्र की तरफ इशारा करता है। यह पंक्ति दर्शाती है कि इतिहास एक ईश्वर-निर्दिष्ट मार्ग पर चल रहा है, जिसमें प्रताड़ना और परेशानी भी एक समय पर समाप्त होकर परम सत्ता के उद्धार में परिणत होते हैं।
शब्दों की व्याख्या
Cross-reference और उनके संबंध
- लूका 21:11 में पृथ्वी-आकस्मिक प्रभाव और चिह्नों की चर्चा; यह बताता है कि यीशु के आने के पूर्व विश्व-चिह्न विश्वसनीय प्रतीक हैं।
- मत्ती 13:25-30 में बुरे जालियों के बीच अच्छे बीज की सुरक्षा; यहाँ स्पष्ट होता है कि दुष्ट तत्त्व समय-समय पर चैलेंज देते हैं, पर परमेश्वर के उद्देश्य स्थिर रहते हैं।
- रोम 8:22-23 में पाप और गिरावट के कारण धरती की पीड़ा; यह बताता है कि Creation अभी भी उद्धार की पूरी सोनचिरैया की प्रतीक्षा कर रहा है।
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि दुख और अस्थिरता अंतता नहीं, बल्कि वैश्विक परिवर्तन के पूर्वप्रस्थान हैं, जिनमें विश्वासियों को स्थिर आस्था की आवश्यकता रहती है।
प्रयोगात्मक दृष्टिकोण—आज के लिए
- धैर्य और जागरूकता: सामाजिक-राजनीतिक अशांति के समय भी चर्च और व्यक्ति भरोसे के साथ आस्था बनाए रखें।
- न्याय और करुणा: खतरों के बीच एक-दूसरे की मदद करना, अनाथों व निर्धनों के प्रति संवेदना उजागर करना चाहिए।
- आशा की दृष्टि: यह शोचनीय घटनाओं के बावजूद एक परमेश्वर की योजना की याद दिलाता है कि अंत में न्याय और नई सृष्टि आएगी।
एतिहासिक-तालीमी उद्धरण (संक्षेप)
मूले टिप्पणीकारों के संकेतों के अनुसार, यह पाठ दिखाता है कि ऐतिहासिक विपत्तियाँ समय-समय पर होती रहीं, पर विश्वासियों के लिए प्रत्यक्ष उद्धार और परमेश्वर के सिंहासन का स्थायित्व है।
नोट: नीचे उद्धृत कोई भी प्रत्यक्ष वाक्य Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के समानरूप से संक्षेपित रूप में प्रयोग हुआ है; पूर्ण टेक्स्ट उद्धरण यहां नहीं दिया गया है।