मत्ती 24:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और जब वह जैतून पहाड़* पर बैठा था, तो चेलों ने अलग उसके पास आकर कहा, “हम से कह कि ये बातें कब होंगी? और तेरे आने का, और जगत के अन्त का क्या चिन्ह होगा?”

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मत्ती 24:3 पद-दर-पद बाइबल टीका

मत्ती 24:3 पर टिप्पणी (HINIRV)

जब यीशु जैतून पहाड़ पर बैठा था, चेलों ने पास आकर पूछ लिया, “इन चीज़ों के होने की कौन-सी घड़ी है? तेरे लौटने और जगत के अंत के चिन्ह क्या होंगे?” यह प्रसंग उन प्रश्नों के साथ जुड़ा है जो उसके अंतकालीनप्रकाश के बारे में केंद्रित हैं। वरदान यह है कि यीशु ने उस समय के संकेतों को एक व्यवस्थित ढांचे में पेश किया ताकि विश्वासीज़ सावधानीपूर्वक जानें कि किस क्रम में घटनाएँ घटेंगी और किस भरोसे पर वे स्थिर रहें।

मुख्य अर्थ

यह वाक्य चेलों की जिज्ञासा का उन्नत चरण दिखाता है: आध्यात्मिक तैयारी की माँग के साथ भविष्य की घटनाओं के बारे में स्पष्टता। यीशु जानबूझकर चेतावनी देते हैं कि समय-समयों में बहकी सोच से बचना चाहिए; बल्कि, वे संकेत देते हैं जो सतर्कता और दृढ़ विश्वास को प्रेरित करें।

मुख्य विषय

  • आत्म-समर्पण बनाम जागरूकता: विश्वासियों को होशियार रहने और चपल-फुसलाव से बचने के लिए कहा गया है, ताकि वे कभी-कभी नहीं भटकें।
  • दृढ़ आशा के लिए प्रतीक्षा: यीशु के आने की प्रतीक्षा में स्थिरता और विनम्र प्रतीक बनना आवश्यक है।
  • युग-पूर्व संकेत: उन संकेतों की चर्चा जो विश्व के परिवर्तन और परमेश्वर के विभाजन की ओर इशारा करते हैं, ताकि पाठक प्रत्याशित परिशोधन समझ सकें।

पुष्ट विचार/कुंजी प्वाइंट्स

– प्रभु के आगमन की अंतिम तिथि की पुख्ता जानकारी नहीं दी गई, पर संकेतों की दिशा स्पष्ट की गई है।

– पवित्र जीवन और विश्वास-योग्यता के अनुरूप तैयारी ही सही उत्तर है; घबराहट या उदासीनता से बचना चाहिए।

क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप में)

1) 마र्k 13:5-8: Jesus warns about many that will come in His name, signaling enduring discernment amid calamitous signs. यह संकेत देता है कि चित्त को स्थिर रखना अति आवश्यक है।

2) लूका 21:7-11: Jesus elaborates on señales and the political and natural upheavals that precede His return, emphasizing vigilance.

3) प्रकाशित 6:12-17: अंर्तदृष्टि परन्तु गहरी चेतावनी कि आकाश-झंकार और पृथ्वी-हठाहट के बीच परमेश्वर के दिन आ पहुँचेगा।

व्यावहारिक चिंतन

हम किन्हीं भुगतनों या समाचारों से भय को नहीं, बल्कि धैर्य और प्रार्थना से उत्तर दें। अपने शब्दों और कर्मों में यीशु के शुद्ध जीवन के आचरण को बनाए रखें; लोगों के साथ नम्रता और करुणा दिखाएं ताकि अंत के दिनों में भी हमारा ejemplary जीवन एक संकेत बने।

संक्षिप्त सार

चेलों की जिज्ञासा का उद्देश्य केवल भविष्य की घटनाओं को जानना नहीं था, बल्कि अपनी दैनिक आचार-व्यवहार को अधिक पवित्र बनाना था। यीशु ने चेतावनी दी कि संकेतों के पीछे आत्म-विश्वास बनाए रखें और उनकी प्रतीक्षा में दृढ़ रहें।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

मत्ती 24:3 समानांतर पद और संबंधित वचन

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जब वह जैतून के पहाड़ पर मन्दिर के सामने बैठा था, तो पतरस और याकूब और यूहन्ना और अन्द्रियास ने अलग जाकर उससे पूछा,

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जैसे नूह के दिन थे, वैसा ही मनुष्य के पुत्र का आना भी होगा।

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