Old Testament
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मत्ती 24:1 मत्ती 24:2 मत्ती 24:3 मत्ती 24:4 मत्ती 24:5 मत्ती 24:6 मत्ती 24:7 मत्ती 24:8 मत्ती 24:9 मत्ती 24:10 मत्ती 24:11 मत्ती 24:12 मत्ती 24:13 मत्ती 24:14 मत्ती 24:15 मत्ती 24:16 मत्ती 24:17 मत्ती 24:18 मत्ती 24:19 मत्ती 24:20 मत्ती 24:21 मत्ती 24:22 मत्ती 24:23 मत्ती 24:24 मत्ती 24:25 मत्ती 24:26 मत्ती 24:27 मत्ती 24:28 मत्ती 24:29 मत्ती 24:30 मत्ती 24:31 मत्ती 24:32 मत्ती 24:33 मत्ती 24:34 मत्ती 24:35 मत्ती 24:36 मत्ती 24:37 मत्ती 24:38 मत्ती 24:39 मत्ती 24:40 मत्ती 24:41 मत्ती 24:42 मत्ती 24:43 मत्ती 24:44 मत्ती 24:45 मत्ती 24:46 मत्ती 24:47 मत्ती 24:48 मत्ती 24:49 मत्ती 24:50 मत्ती 24:51



मुख्य व्याख्या बिंदु
मत्ती 24:24 में Jésus ने अंत समय के समयावसान में झूठे मसीहों और झूठे भविष्यद्वक्ताओं के उभार के बारे में चेतावनी दी है। उनके बड़े चिन्ह और अद्भुत काम दिखाकर वे चुने हुओं तक भी भ्रमित कर डालेंगे, परन्तु उनका उद्देश्य संसार को भयभीत करना और विश्वास को कमज़ोर करना है। सत्यान्वेषी विश्वास के लिए यह चेतावनी स्पष्ट कर देती है कि हमें चरित्र-आधारित पथ पर टिके रहना है, न कि शानदार चमत्कारों पर। वास्तविक पहचान विश्वास की स्थिरता, पौष्टिक शब्द और पवित्र आत्मा के नेतृत्व पर निर्भर करती है, न कि देखने में अद्भुत कृत्यों पर।
साहित्यिक प्रसंग
यह अनुभाग उसमें आता है जहाँ यीशु कह रहा है कि प्रेरितों के समय के बाद भी लोग धार्मिक छल-कपट से सतर्क रहें। 24 अध्याय में पूर्ण-विकास की बात है कि अंत के दिनों में भ्रमित करने वाले सिद्धांत और चमत्कार सामने आएंगे। यह एक चेतावनी है कि चमत्कारों की प्रचुरता भी कभी-कभी अंधविश्वास को बढ़ाती है; सच्चई तब परखी जाती है जब वह उपदेश और जीवन के क्रिया-प्रणालियों से मेल खाती है।
धर्मशास्त्रीय महत्व
परमेश्वर के अंतिम समय के कार्यक्रम में अनेक गलत रास्ते आना स्वाभाविक है, पर ECS के अनुसार ईमानदार विश्वास और पवित्र जीवन का परीक्षण बिताने वाले ही स्थिर रहते हैं। यह प्रमाण देता है कि चमत्कारिक परीक्षण व्यक्ति के हृदय की प्रेरणा नहीं बदलते, बल्कि यह देखने की बात है कि वह प्रेरणा परमेश्वर के वचन के अनुरूप है या नहीं।
पवित्र शास्त्र से सम्बद्ध प्रविष्टियाँ
नीति-संवाद और चिंतन के प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
यद्यपि झूठे मसीहा और झूठे भविष्यवक्ता अंत समय में उभरेंगे, हमारी सुरक्षा ईश्वर के वचन की कसौटी, जीवन की पवित्रता और आत्म-नियमन में है। सतर्क रहें, पर हार मानकर डगमगें नहीं; प्रेरितों की तरह दृढ़ विश्वास रखें और दीन-दulang जीवन जीते रहें ताकि सच का प्रकाश न खो जाए।
फुटनोट (महत्वपूर्ण उद्धरण संकेत)
नीचे शुद्ध उद्धरण मूल लेखकों से प्रासंगिक हैं, यदि समानता मिलती है:
“झूठे मसीह और झूठे भविष्यद्वक्ता उठ खड़े होंगे, और बड़े चिन्ह और अद्भुत काम दिखाएँगे, कि यदि हो सके तो चुने हुओं को भी बहका दें।”