Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मत्ती 24:1 मत्ती 24:2 मत्ती 24:3 मत्ती 24:4 मत्ती 24:5 मत्ती 24:6 मत्ती 24:7 मत्ती 24:8 मत्ती 24:9 मत्ती 24:10 मत्ती 24:11 मत्ती 24:12 मत्ती 24:13 मत्ती 24:14 मत्ती 24:15 मत्ती 24:16 मत्ती 24:17 मत्ती 24:18 मत्ती 24:19 मत्ती 24:20 मत्ती 24:21 मत्ती 24:22 मत्ती 24:23 मत्ती 24:24 मत्ती 24:25 मत्ती 24:26 मत्ती 24:27 मत्ती 24:28 मत्ती 24:29 मत्ती 24:30 मत्ती 24:31 मत्ती 24:32 मत्ती 24:33 मत्ती 24:34 मत्ती 24:35 मत्ती 24:36 मत्ती 24:37 मत्ती 24:38 मत्ती 24:39 मत्ती 24:40 मत्ती 24:41 मत्ती 24:42 मत्ती 24:43 मत्ती 24:44 मत्ती 24:45 मत्ती 24:46 मत्ती 24:47 मत्ती 24:48 मत्ती 24:49 मत्ती 24:50 मत्ती 24:51



मत्ती 24:29 का सारार्थिक nghĩa (HINIRV)
इस पद का तात्पर्य है कि क्लेश के तुरन्त बाद परमेश्वर का निर्णायक प्रदर्शन होगा: सूर्य अंधियारा होगा, चाँद का प्रकाश लौट जाएगा, सितारे गिरेंगे और आकाश की शक्तियाँ हिल जाएंगी। यह एक तीव्र परिवर्तन का दृश्य है जो末 दिनों के आक्रमण और पुनःस्थापन की बावत चेतावनी देता है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह वाक्य मत्ती के स्वर्गारोहण के कुछ समय बाद यीशु की भविष्यवाणी संवाद का हिस्सा है, जहां वह धर्मी और दुष्ट दोनों के अंत के संकेतों को वर्णित करते हैं। क्लेश के समय के बाद यह दिव्य चमत्कारिक परिवर्तन होगा, जिसे लोग त्रस्त अनुभव करेंगे और पाप-विपत्तियों का अंत होगा। परमेश्वर के राज्य की पूर्ण स्थापना couleur यहाँ संकेत है—जब आकाश-पतन की स्थितियाँ उपस्थित होंगी, तब मानव इतिहास की घड़ी एक नयी दिशा में चल पड़ेगी।
व्याख्यात्मक टिप्पणी
• सूर्य का अन्धियारा होना और चाँद के प्रकाश का जाना—ये प्रकृति-रोशनी में अचानक घटने वाले बदलाव हैं जो सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक अशांति के समय की भयानक वास्तविकता को व्यक्त करते हैं।
• आकाश की शक्तियाँ हिलाई जाएँगी—यह शब्द पृथ्वी-उपर के नियंत्रणक शक्तियों के अस्थिर होने का संकेत है, जब परमेश्वर के निर्णय की पूर्णता सामने आएगी।
• क्रमशः यह सब यीशु के पुनः आगमन से जुड़ा हुआ है: क्लेश के समाप्त होते ही महान उद्धार का समय आता है।
छोटे थीमैटिक पॉइंट्स
क्रॉस-रेफरेंसेस (संकेतों का संक्षेप गठन)
1) मरकुस 13 और लूका 21— यीशु के अंत के संकेतों का समकक्ष विवरण; इन अध्यायों में भी पृथ्वी-आकाश के परिवर्तन की भूमिका उभरती है। यह समझाता है कि क्लेश के दौरान और उसके बाद क्या अपेक्षित है।
2) द Joel 2— विभीषण और आकाशीय घटनाओं का प्रतीकात्मक संकेत; यह बताता है कि परमेश्वर के न्याय के समय आकाशीय चमत्कार कैसे प्रकट होते हैं।
3) अभिषेक के संदर्भ—पुनरुत्थान और राज्य की स्थापना के साथ, उद्धार का उद्देश्य स्पष्ट होता है कि अंत में परमेश्वर का राज सर्वत्र बन जाएगा।
संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष
जो लोग यीशु के लौटने की प्रतीक्षा में जीवन यापन करते हैं, वे क्लेश के समय कटु अनुभवों से भयभीत न हों; बल्कि विश्वास और पवित्र जीवन के साथ स्थिर रहें, क्योंकि परमेश्वर की योजना पूर्ण होने वाली है।
महत्वपूर्ण उद्धरण (उद्धृत स्रोत: public-domain टिप्पणीकारों से मिलते-जुलते संकेत)
हिन्दी प्रेषण के अनुसार, ऐसे समय में सतर्कता और विश्वासी दृढ़ता आवश्यक है; Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के संक्षिप्त विचारों के शब्द सीधे उद्धृत नहीं किए गए हैं, बल्कि उनके विचारों की प्रेरणा के समानार्थी सार प्रस्तुत किए गए हैं। यदि आप विशेष शब्दों के छोटे उद्धरण चाहते हैं, तो कृपया बताएं; मैं उन्हीं लेखक-स्त्रोतों से छोटे—मात्र उद्धरण उपलब्ध कराकर दे दूँगा।