Old Testament
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याकूब 4:17 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
इसलिए जो कोई भलाई करना जानता है और नहीं करता, उसके लिये यह पाप है।
याकूब 4:17 पद-दर-पद बाइबल टीका
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याकूब 4:17 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यूहन्ना 9:41 (HINIRV) »
यीशु ने उनसे कहा, “यदि तुम अंधे होते तो पापी न ठहरते परन्तु अब कहते हो, कि हम देखते हैं, इसलिए तुम्हारा पाप बना रहता है।

यूहन्ना 15:22 (HINIRV) »
यदि मैं न आता और उनसे बातें न करता, तो वे पापी न ठहरते परन्तु अब उन्हें उनके पाप के लिये कोई बहाना नहीं।

याकूब 4:17 — इसलिए जो कोई भलाई करना जानता है और नहीं करता, उसके लिये यह पाप है
परिवेश और पाठ का संदर्भ: यह पद याकूब के नैतिक स्पष्ट्यकरण का हिस्सा है, जिसमें विश्वास के साथ व्यवहार का जोड़ स्पष्ट किया गया है। विचारणीय बात यह है कि विश्वास केवल शब्दों तक सीमित नहीं रहता, वह क्रियात्मक प्रेम और सही निर्णयों में प्रकट होता है। यहाँ कहा गया है कि जो भलाई करने में सक्षम है पर उसका प्रयोग नहीं करता, वह पाप के दायरे में आ जाता है; यह एक नैतिक आत्म-चेतना का आग्रह है, कि अल्लाह के प्रेम को व्यवहार में उतारा जाए।
ईश्वर से जुड़ी समझ और विश्वास की प्रकृति
यह पाठ बताता है कि ईश्वर के नियम केवल सिद्धान्त नहीं, बल्कि जीवन के व्यावहारिक आचरण हैं। वास्तव में विश्वास बिना क्रिया के पूर्ण नहीं होता। जब हम जानते हैं कि भलाई करना चाहिए, और फिर भी उससे पीछे हटते हैं, तो हमारा विश्वास अधूरा और असंगत रहता है। यह स्मरण दिलाता है कि ईश्वर का प्रेम सक्रिय है, और उसकी मर्जी के अनुरूप行动 करने से ही आत्माओं को जीवन मिलता है।
मुख्य शब्दों और छवियों की व्याख्या
अन्य मिसाल—क्रॉस-रेफरेंसेज़
जोड़ने के लिए तीन पासेज जो इस विचार के साथ संरेखित होते हैं:
पावर्त विचार—2–3 व्यावहारिक निष्कर्ष
आज के जीवन के लिए अनुप्रयोग
जो लोग जानते हैं कि किसी के लिए भलाई करना उचित है—चाहे वह सहायता, करुणा, या नैतिक समर्थन हो—उनके लिए यह सचेतन संकेत है कि कर्म ही विश्वास का पूरा प्रमाण हैं। अपने आसपास के लोगों के लिए छोटे-छोटे, पर स्थायी उपाय करें: कॉल करें, मदद दें, धर्मार्थ कार्यों में सहभागिता लें, और अपने निर्णयों में ईश्वर की इच्छा को प्राथमिकता दें।
नोट: नीचे उद्धरणों के लिए Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke से शाब्दिक परिचित टिप्पणियाँ संक्षेप में शामिल की गई हैं (जहाँ उपलब्ध)।