Old Testament
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याकूब 1:21 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
इसलिए सारी मलिनता और बैर-भाव की बढ़ती को दूर करके, उस वचन को नम्रता से ग्रहण कर लो, जो हृदय में बोया गया और जो तुम्हारे प्राणों का उद्धार कर सकता है।
याकूब 1:21 पद-दर-पद बाइबल टीका
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याकूब 1:21 समानांतर पद और संबंधित वचन
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इफिसियों 4:22 (HINIRV) »
कि तुम अपने चाल-चलन के पुराने मनुष्यत्व को जो भरमानेवाली अभिलाषाओं के अनुसार भ्रष्ट होता जाता है, उतार डालो।

इफिसियों 1:13 (HINIRV) »
और उसी में तुम पर भी जब तुम ने सत्य का वचन सुना, जो तुम्हारे उद्धार का सुसमाचार है, और जिस पर तुम ने विश्वास किया, प्रतिज्ञा किए हुए पवित्र आत्मा की छाप लगी।

1 पतरस 2:11 (HINIRV) »
हे प्रियों मैं तुम से विनती करता हूँ कि तुम अपने आपको परदेशी और यात्री जानकर उन सांसारिक अभिलाषाओं से जो आत्मा से युद्ध करती हैं, बचे रहो। (गला. 5:24, 1 पत. 4:2)
याकूब 1:21 पर सार भाव
इस पद का核心 संदेश है: मलिनता और झगड़े-हिंसा से मुक्त होकर, विनम्र हृदय से परमेश्वर के वे वचन ग्रहण करो जो हमारे जीवन के उद्धार का कारण बनते हैं।
पृष्ठभूमि और आयतन
याकूब के पत्र का यह भाग हमारे भीतर की अशुद्धियों पर सचेत करता है—बुराई की प्रवृत्तियाँ हमारे मन में उभर सकती हैं और धार्मिक बहाने के पीछे स्वार्थ दिख सकता है। पाठक से अपेक्षा है कि वह सतर्क हो, भीतर के मलिनपन को हटाकर ईश्वर के वचन को नमनपूर्वक 받아ए। “वचन” यहाँ परमेश्वर के उद्धारकर्ता संदेश का प्रतिनिधित्व करता है, जिसे हृदय में बोया गया कहा गया है और जो प्राणों का उद्धार कर सकता है।
व्याख्यात्मक अवलोकन
महत्वपूर्ण उद्धार प्रेरणा—तत्वगत निष्कर्ष
इस पद से निम्न विचार उभरते हैं:
अनुसंग पवित्र संदर्भ और तात्पर्य
हितकारी cross-references के साथ संक्षिप्त स्पष्टीकरण:
संक्षिप्त व्यावहारिक उपदेश
अपने दिनचर्या में करें:
निष्कर्ष
याकूब 1:21 हमें याद दिलाता है कि वचन को ग्रहण करना केवल बौद्धिक अभ्यास नहीं है, बल्कि हृदय की परिवर्तन-यात्रा है। जब हम मलिनता और बैर-भाव को त्यागकर नम्रता से परमेश्वर के वचन को सुनते हैं, तब उद्धार की कृपा हमारे जीवन में ठहर जाती है और आत्मा का लाभ मिल पाता है।
संदर्भ-उद्धरण (कुल मिलाकर)
येक टिप्पणी मेंMatthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संकेतन से आवश्यक छोटे उद्धरण मिलते हैं: “वचन को नम्रता से ग्रहण करो”—ये विचार उनके आचरण-परिवर्तन के समन्वय को संलग्न करते हैं; उनके विकासित प्रकाशनों से प्राप्त संकल्पना का आत्म-गठन इस पाठ के साथ संगत है।