याकूब 1:21 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

इसलिए सारी मलिनता और बैर-भाव की बढ़ती को दूर करके, उस वचन को नम्रता से ग्रहण कर लो, जो हृदय में बोया गया और जो तुम्हारे प्राणों का उद्धार कर सकता है।

पिछला पद
« याकूब 1:20
अगला पद
याकूब 1:22 »

याकूब 1:21 पद-दर-पद बाइबल टीका

याकूब 1:21 पर सार भाव

इस पद का核心 संदेश है: मलिनता और झगड़े-हिंसा से मुक्त होकर, विनम्र हृदय से परमेश्वर के वे वचन ग्रहण करो जो हमारे जीवन के उद्धार का कारण बनते हैं।

पृष्ठभूमि और आयतन

याकूब के पत्र का यह भाग हमारे भीतर की अशुद्धियों पर सचेत करता है—बुराई की प्रवृत्तियाँ हमारे मन में उभर सकती हैं और धार्मिक बहाने के पीछे स्वार्थ दिख सकता है। पाठक से अपेक्षा है कि वह सतर्क हो, भीतर के मलिनपन को हटाकर ईश्वर के वचन को नमनपूर्वक 받아ए। “वचन” यहाँ परमेश्वर के उद्धारकर्ता संदेश का प्रतिनिधित्व करता है, जिसे हृदय में बोया गया कहा गया है और जो प्राणों का उद्धार कर सकता है।

व्याख्यात्मक अवलोकन

  • “सारी मलिनता और बैर-भाव” से तात्पर्य मन के भ्रष्ट प्रवृत्तियों, प्राकृत-कपट, और भाईचारे के बीच की कटुता से है।
  • “उपस्थित वचन को नम्रता से ग्रहण” का अर्थ है स्वीकृति के साथ सुनना और व्यक्तिगत स्तर पर परिवर्तन के लिए प्रतिबद्ध होना—केवल ज्ञान नहीं, बल्कि परिवर्तनकारी अभ्यास।
  • “जो हृदय में बोया गया” प्रतीकात्मक रूप से परमेश्वर के आत्मीय संदेश का दर्शक है जो मन में बिठाया गया है; यह जीवन की दिशा बदल सकता है।
  • “जो तुम्हारे प्राणों का उद्धार कर सकता है” उद्धार का ऐतिहासिक और आत्मिक प्रभाव दोनों को उद्घाटित करता है—बदला हुआ आचरण और विश्वास की जीवन्तता।

महत्वपूर्ण उद्धार प्रेरणा—तत्वगत निष्कर्ष

इस पद से निम्न विचार उभरते हैं:

अनुसंग पवित्र संदर्भ और तात्पर्य

हितकारी cross-references के साथ संक्षिप्त स्पष्टीकरण:

  • 2 कुरिन्थ 6:7— वचन और प्रभु की कृपा के साथ आत्म-आचरण का संयम।
  • यूहन्ना 15:3— वचन के अनुसार मानस के शोधन का महत्त्व।
  • यशायह 55:11— परमेश्वर के वचन के प्रभाव की धारणा, वह वास्तव में अकथित नहीं रहता।

संक्षिप्त व्यावहारिक उपदेश

अपने दिनचर्या में करें:

निष्कर्ष

याकूब 1:21 हमें याद दिलाता है कि वचन को ग्रहण करना केवल बौद्धिक अभ्यास नहीं है, बल्कि हृदय की परिवर्तन-यात्रा है। जब हम मलिनता और बैर-भाव को त्यागकर नम्रता से परमेश्वर के वचन को सुनते हैं, तब उद्धार की कृपा हमारे जीवन में ठहर जाती है और आत्मा का लाभ मिल पाता है।

संदर्भ-उद्धरण (कुल मिलाकर)

येक टिप्पणी मेंMatthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संकेतन से आवश्यक छोटे उद्धरण मिलते हैं: “वचन को नम्रता से ग्रहण करो”—ये विचार उनके आचरण-परिवर्तन के समन्वय को संलग्न करते हैं; उनके विकासित प्रकाशनों से प्राप्त संकल्पना का आत्म-गठन इस पाठ के साथ संगत है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

याकूब 1:21 समानांतर पद और संबंधित वचन

उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

इफिसियों 4:22 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
इफिसियों 4:22 (HINIRV) »
कि तुम अपने चाल-चलन के पुराने मनुष्यत्व को जो भरमानेवाली अभिलाषाओं के अनुसार भ्रष्ट होता जाता है, उतार डालो।

इफिसियों 1:13 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
इफिसियों 1:13 (HINIRV) »
और उसी में तुम पर भी जब तुम ने सत्य का वचन सुना, जो तुम्हारे उद्धार का सुसमाचार है, और जिस पर तुम ने विश्वास किया, प्रतिज्ञा किए हुए पवित्र आत्मा की छाप लगी।

1 पतरस 2:11 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
1 पतरस 2:11 (HINIRV) »
हे प्रियों मैं तुम से विनती करता हूँ कि तुम अपने आपको परदेशी और यात्री जानकर उन सांसारिक अभिलाषाओं से जो आत्मा से युद्ध करती हैं, बचे रहो। (गला. 5:24, 1 पत. 4:2)

HINIRV बाइबल की पुस्तक चुनें