Old Testament
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याकूब 1:14 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
परन्तु प्रत्येक व्यक्ति अपनी ही अभिलाषा में खिंचकर, और फँसकर परीक्षा में पड़ता है।
याकूब 1:14 पद-दर-पद बाइबल टीका
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याकूब 1:14 समानांतर पद और संबंधित वचन
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मरकुस 7:21 (HINIRV) »
क्योंकि भीतर से, अर्थात् मनुष्य के मन से, बुरे-बुरे विचार, व्यभिचार, चोरी, हत्या, परस्त्रीगमन,

इफिसियों 4:22 (HINIRV) »
कि तुम अपने चाल-चलन के पुराने मनुष्यत्व को जो भरमानेवाली अभिलाषाओं के अनुसार भ्रष्ट होता जाता है, उतार डालो।

मत्ती 15:18 (HINIRV) »
पर जो कुछ मुँह से निकलता है, वह मन से निकलता है, और वही मनुष्य को अशुद्ध करता है।
याकूब 1:14 का सीधा अर्थ
इस पद का मूल तात्पर्य है: हर व्यक्ति अपने भीतर की अभिलाषाओं के द्वारा प्रेरित हो कर उसे आकर्षित करता है, और फिर इन्हीं इच्छाओं के कारण वह परीक्षा में फँस जाता है। अर्थात हमारे अन्दर की इच्छा-शक्ति ही भ्रम और दोष के प्रवेश द्वार बनती है; dış से नहीं, बल्कि हमारे अपने मन की चाह-पूर्ति की भावना ही परीक्षा का कारण बनती है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
याकूब के पत्र में नैतिक परीक्षा और चरित्र निर्माण की चर्चा है। यहाँ प्रेरणा भीतर से आती है—यानी मन में उठती चाहतें, जो समय के साथ कर्म बन कर अभिशाप या आशीर्वाद बनती हैं। पहले अध्याय में ही यह दिखाया गया है कि हर वस्तु परमेश्वर से नहीं, बल्कि मानव की इच्छा से जन्म लेती है; और इच्छा पूरी होते ही पाप निकल आता है, फिर पाप हमारे कर्मों को पूरा कर के मृत्यु तक पहुँचा देता है।
व्याख्यात्मक अवलोकन
संदर्भित विचार: प्राचीन टिप्पणीकारों से संक्षिप्त इनसाइट
Matthew Henry ने कहा कि मानव की इच्छा स्वयं अपने आप में पाप का स्रोत बन जाती है, और यह ही परीक्षा की कुंजी है। Albert Barnes ने समझाया कि परीक्षा के समय हमारी इच्छाओं का नियंत्रण महत्वपूर्ण है—यदि हम इन आग्रहों के चुगुल से सिकड़ जाएँ, गोया हमने पाप को बुलावा दे दिया। Adam Clarke ने संकेत किया कि यह वाक्य एक चेतावनी है कि हम स्वार्थी अभिलाषाओं के कारण नैतिक गिरावट के जोखिम में रहते हैं।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप में)
1) होशियाः 7:11-12: आंतरिक फँसाव और मूर्त भय के दौरान भरोसे का स्थान परमेश्वर है; बाहर से आकर्षण न होकर भीतर की निष्ठा टूटती है।
2) रोम 7:8-11: पाप कैसे भीतर से उत्पन्न होता है और कैसे धर्मिता के विरुद्ध संघर्ष करता है; आत्म-स्वीकृति और परिवर्तन की आवश्यकता।
3) 1 पतरस 1:14: पवित्र जीवन के लिए नए रवैये की प्रेरणा जो असत्य-आकर्षण से दूरी बनाता है।
संक्षिप्त निष्कर्ष-व्यावहारिक takeaway
जीवन में हर निर्णय से पहले अपनी आंतरिक इच्छाओं को जाँचें; अगर वे परमेश्वर की इच्छा के विरुद्ध बढ़ें, तो वे परीक्षा बन जाएँगी। प्रभु के मार्ग पर स्थिर रहने के लिए आत्म-नियमन और पवित्र आचरण की साधना बनाए रखें; जब हम अपनी कमजोरियों को ईमानदारी से स्वीकार कर के उसकी मदद मांगते हैं, तब ही परीक्षा से विजय संभव है।