Old Testament
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याकूब 1:24 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
इसलिए कि वह अपने आप को देखकर चला जाता, और तुरन्त भूल जाता है कि वह कैसा था।
याकूब 1:24 पद-दर-पद बाइबल टीका
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याकूब 1:24 समानांतर पद और संबंधित वचन
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2 पतरस 3:11 (HINIRV) »
तो जब कि ये सब वस्तुएँ, इस रीति से पिघलनेवाली हैं, तो तुम्हें पवित्र चाल चलन और भक्ति में कैसे मनुष्य होना चाहिए,

लूका 1:66 (HINIRV) »
और सब सुननेवालों ने अपने-अपने मन में विचार करके कहा, “यह बालक कैसा होगा?” क्योंकि प्रभु का हाथ उसके साथ था।

लूका 7:39 (HINIRV) »
यह देखकर, वह फरीसी जिस ने उसे बुलाया था, अपने मन में सोचने लगा, “यदि यह भविष्यद्वक्ता होता तो जान जाता, कि यह जो उसे छू रही है, वह कौन और कैसी स्त्री है? क्योंकि वह तो पापिन है।”
याकूब 1:24 पर दृश्य और अर्थ
मुख्य अर्थ जो पाठ कहता है, वह यह है: वह व्यक्ति जो खुद को देखते हुए आता है, वह तुरन्त भूल जाता है कि वह कैसा था। जीवन का यह संदर्भ हमें सच्चे आचरण के मजबूती की प्रतीकशाला समझाता है: केवल देखने से परिवर्तन नहीं होता; परीक्षण के बाद स्मरण और कर्म-उत्पादन आवश्यक है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
याकूब विश्वास के आचरणपूर्णता पर जोर देते हैं। इस पंक्ति में लेखक दृष्टा-आधार पर बात करते हैं कि भले ही व्यक्ति “कैंची-सीधे नज़र” से पवित्र लेख पढ़े, परन्तु यदि उसका व्यवहार उसी अनुसार नहीं बदले, तो वह भूल जाता है कि असल मापदण्ड क्या है। यह अध्याय नैतिक व्यवहार, सत्य-स्वीकार और प्रेरित जीवन के बीच की खाई को समझाता है।
interpretive observations
छोटी थीमगत सूची
अनुक्रिया-वाक्य और विश्लेषण
फरिश्ता जैसा देखने के बजाय, एक वास्तविक जीवन-प्रशासन चाहिए: दावे और कर्म एक ही धागे में बंधे हों। यह वाक्य हमें स्मरण कराता है कि धार्मिक अध्ययन से यदि परिवर्तन नहीं आता, तो वह “खोए हुए” समय के समान है।
संदर्भित भाग—प्रासंगिक क्रॉस-रेफरेंसेस
1) इब्रानी 3:13—व्यक्ति को दिन प्रति दिन अपने विचारों की निष्ठा बनाए रखने की चेतावनी देता है ताकि बुराइयों के बल से बचा जा सके। explanation: प्रतिदिन स्मरण और सचेतता, अभ्यास का हिस्सा बनना चाहिए।
2) मन्ना 7:24-27—कहता है कि केवल सुनना नहीं, बल्कि अपने-अपने घर-निर्माण पर भी ध्यान देना चाहिए; जो प्रकृति के अनुसार नहीं चलता, उसका अस्थिर घर ढह जाता है।
3) 2 पतरस 1:10—प्राप्त विश्वास को दृढ़ बनाकर उसे और अधिक पुष्ट करने की प्रेरणा देता है ताकि उद्धार के पथ पर स्थिर रहे।
व्यावहारिक निष्कर्ष
याकूब 1:24 हमें स्मरण दिलाता है कि सोच-समझकर पकड़े गए शब्दों को व्यवहार में लाना जरूरी है। पाठ-ज्ञान को जीवन-भरण बनाइए: जहां आपके दिमाग में है, वही आपके हाथों से बाहर आए—यहां तक कि छोटे-छोटे कार्यों में भी।
अनुवादक टिप्पणी: इस पाठ के भाव से Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संकलन-उद्धरण सीमित रूप में समाहित कर, हमने एक समेकित दृश्य रखा है। उनके स्पष्ट वाक्यों का अभिप्राय है कि विचार और कर्म एक साथ विकसित हों; नहीं तो ज्ञान अधूरा रहता है।