Old Testament
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याकूब 1:10 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और धनवान अपनी नीच दशा पर; क्योंकि वह घास के फूल की तरह मिट जाएगा।
याकूब 1:10 पद-दर-पद बाइबल टीका
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याकूब 1:10 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 पतरस 1:24 (HINIRV) »
क्योंकि “हर एक प्राणी घास के समान है, और उसकी सारी शोभा घास के फूल के समान है: घास सूख जाती है, और फूल झड़ जाता है।

1 यूहन्ना 2:17 (HINIRV) »
संसार और उसकी अभिलाषाएँ दोनों मिटते जाते हैं, पर जो परमेश्वर की इच्छा पर चलता है, वह सर्वदा बना रहेगा।

अय्यूब 14:2 (HINIRV) »
वह फूल के समान खिलता, फिर तोड़ा जाता है; वह छाया की रीति पर ढल जाता, और कहीं ठहरता नहीं।
याकूब 1:10 का संदर्भ और संदर्भ-स्थिति
याकूब पत्र का यह पाठ धन-सम्पदा की अस्थिरता के संदर्भ में है। विख्यात धनी व्यक्ति और नम्र आचरण के बीच के विरोध को दिखाते हुए यह बताता है कि सांसारिक धन एक क्षणभंगुर घास-फूल के समान है। याकूब प्रेरित ने चेतावनी दी है कि धन का स्थायित्व नहीं, बल्कि एक दिन वह मिट जाएगा, जबकि ईश्वर की दृष्टि में चरित्र और आस्थावान जीवन अधिक मूल्यवान है।
मुख्य संदेश का सार
पदार्थ: धनवान को अपनी नीच दशा पर घोर अभिमान नहीं रखना चाहिए, क्योंकि धन घास के फूल की तरह एक पल में गिर सकता है। यह उद्धृत विचार सांसारिक सम्पन्नता के साथ जुड़ी नाजुकता और विनम्रता का आह्वान है।
तीन प्रमुख विषय
संबद्ध पाठ (cross-references) और उनका संक्षिप्त अर्थ
सूक्ष्म व्यावहारिक विचार
इस पद का व्यवहारिक पाठ यह है: जीवन के किसी भी चरण में धन की स्थिति कैसी भी हो, एक व्यक्ति के लिए नम्रता और आस्थावान विश्वास बनाए रखना अधिक मूल्यवान है। धन के क्षणिक आकर्षण के बीच भी परमेश्वर की आलोचना न करें, बल्कि अपने उपयोग को प्रायः निष्काम और उदार बनाएं।
निष्कर्ष
याकूब 1:10 धन-सम्पदा की क्षणिकता को उजागर करता है और नैतिक-आचार के महत्त्व को पुष्ट करता है। धन घास के फूल की तरह मिट जाएगा, जबकि शांत और नम्र मन परमेश्वर के निकट स्थिर रहते हैं। सच durationचरित्र और विश्वास है जो जीवन की वास्तविक सम्पदा बनाते हैं।
इस पाठ के भीतर Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के अभिधारणीय विचारों का संक्षेपिक मिलान यह दिखाता है: धन की अस्थिरता की स्मृति से प्रभु के साथ जीवन का वास्तविक मूल्य उभरकर आता है। प्रगट उद्धरण स्वीकार्य होने पर, वे कहते हैं कि धन की महत्त्वाकांक्षा अस्थिर है और आंतरिक चरित्र ही स्थायित्व देता है।