Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
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इफिसियों 4:31 पर टिप्पणी — संदर्भ सहित सार
पौलुस ने इस अध्याय में ईसाइयों के बीच एक नए जीवन की कसौटी रखी है: भाइयों में एकता, गवाही में नम्रता और प्रेमपूर्ण व्यवहार। अध्याय 4 में बहु-विवेकपूर्ण परिवर्तन की बातें हैं, ताकि विश्वासियों के समुदाय में पुराने चरित्र के अंश घटते जाएँ और नया चरित्र विकसित हो। Verse 31 इस परिवर्तन की संस्तुति करता है: सब प्रकार की कड़वाहट, प्रकोप, क्रोध, कलह और निंदा—ये सब बैर-भाव समेत तुम से दूर की जाएं। इसका अर्थ है: प्रभु यीशु के अनुयायी को अपनी भीतर की प्रतिक्रियाओं और आपसी संबंधों में शांत, क्षमाशील और परोपकारी ढंग अपनाने चाहिए।
मुख्य अर्थ
यही वचन यह कहता है कि ईश्वर के लोग पुराने, कलुषित आत्म-स्वार्थी व्यवहारों को पीछे छोड़ दें और नए जीवन की दिशा में कदम बढ़ाएँ। कड़वाहट, प्रकोप, क्रोध, कलह और निंदा इन तरह के भाव शायद स्वाभाविक लगते हैं, पर वे समुदाय में विभाजन लाते हैं। यीशु के follow-ers के लिए लक्ष्य है—परस्पर क्षमा, धैर्य और प्रेम के साथ व्यवहार। अंततः यह जीवन ईश्वर की मर्जी के अनुरूप रहता है, जो एक दूसरे के प्रति सुख-शांति और करुणा पैदा करता है।
दो–तीन प्रमुख विषय
संदर्भगत पाठ और उनके संकेत
यह पंक्ति अन्य प्रेरक बचनों से जुड़ती है जो एकता और निर्मल जीवन पर बल देते हैं—पौलुस समानता, क्षमा और नवीन जीवन की शिक्षा देता है (उदा. अन्य अध्यायों में भी एकता, विनम्रता और प्रेम की呼呼 बातें मिलती हैं)। उदाहरण के लिए, ऐसे निर्देश जहाँ क्रोध को रोकने, समुदाय में शांति बनाए रखने और तुम परिपूर्ण निखार चाहते हो।
व्यावहारिक चिंतन
आज के जत्थों के लिए यह verse एक सरल निर्देश देता है: अपने दिल के भीतर तलाशी करें कि कौन-सी चीजें अभी भी आपके रिश्तों में बैर उत्पन्न कर रही हैं? यदि आप कड़वाहट या गुस्से से घिरे हैं, तो प्रार्थना करें कि परमेश्वर इन भावनाओं को ढाल दे और आपको क्षमा, समझदारी और धैर्य के साथ व्यवहार करने की क्षमता दे। साथ ही, दूसरों के साथ छोटे-छोटे क्षणों में सत्य और प्रेम को प्राथमिकता दें—जिनसे समुदाय में शांति और एकता बनी रहे।
क्रॉस-रेफरेंस (संक्षेपित विवरण)
1) मत्ती 5:9 में कहा गया है कि शांतियों के निर्माता blessings पाते हैं; यह सीधे इस verse के लक्ष्यों से जुड़ता है कि कैसे शांत, क्षमाशील व्यवहार समुदाय को जोड़ते हैं।
2) मरकुस 11:25 सुझाव देता है कि क्षमा से प्रार्थना का अभिप्राय है; क्रोध और कलह के स्थान पर क्षमा का वातावरण बनता है।
3) कोलुसियों 3:13-14 में सभी के प्रति सहनशीलता और क्षमा की आवश्यकता बताई गई है; प्रेम सब बातों का कुल सूत्र है।
संक्षिप्त निष्कर्ष
इफिसियों 4:31—कड़वाहट, प्रकोप, क्रोध, कलह और निंदा को दूर करके ईश्वर-जीवन की दिशा में कदम बढ़ाने का बुलावा है। यह न सिर्फ व्यक्तिगत सुधार है, बल्कि समुदाय के भीतर एक नई मिसाल कायम करने का अधिकार भी है: प्रेम, क्षमा और मेल-जोल के साथ एकता का जीवन।