Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
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इफिसियों 4:30 पर संदर्भ-परिसर: पवित्र आत्मा को शोकित न करें
पद का तुरंत संदर्भ परमेश्वर के अनुयायियों के बीच के व्यवहार से जुड़ा है: यह बताता है कि एक नई जीवनशैली में चलना किस प्रकार पवित्र आत्मा के साथ संबंध को preserves करता है। इफिसियों के पैरोवर संदेश में यह वाक्य खास तौर पर उन युगों के भीतर विश्वास की एकता और आत्मा की भूमिका की याद दिलाता है, जहाँ मण्डली को आंतरिक घटनाओं से सुदृढ़ रखना ज़रूरी था।
क्या दर्शाता है यह पाठ परमेश्वर या विश्वास के बारे में
यह टेक्स्ट बताता है कि परमेश्वर का आत्मा हमारे साथ है और उसकी संतुष्टि हमारे जीवन के हर पहलू से जुड़ी है। शोकित होने से आशय है आत्मा की स्थिरता और पवित्रता के लक्ष्य से विमुख होना; और यह चिंता का नहीं बल्कि पवित्र आत्मा के साथ एकाश्रय-संबंध बनाए रखने का संकेत है। छुटकारे के दिन की छाप (छाप दी गई है) बताती है कि ईश्वर ने हमारे उद्धार के प्रमाण को स्थिर किया है—यह आत्मा के द्वारा हमारे हितार्थ गवाह है और यह विश्वास के ठहराव को सुनिश्चित करता है।
महत्वपूर्ण शब्दों या imagery की व्याख्या
संबद्ध बाइबल अंश (संक्षेप में)
यशा-63:10 जैसे अंश संकेत करते हैं कि अहंकारी निवास के कारण भी परमेश्वर के लोग जानबूझकर पाप में स्विंग करते हैं, परन्तु उनके द्वारा आत्मा का शोक होना, उसे प्रत्युत्तर देता है। इफिसियों 1:13-14 में आत्मा को मुहर देकर उद्धार का प्रमाण दिया गया है।
केवल 2-3 cross-references with brief explanation
आज के जीवन में प्रयोग
1) आत्मा के प्रभुत्व को बनाए रखना: दिन-प्रतिदिन के निर्णयों में आत्मा की guidance को प्राथमिकता दें—धर्म के नियमों के अनुरूप सत्य, दया और नम्रता से व्यवहार करें।
2) आपसी संबंधों में एकता बनाए रखना: गिले-शिकवे और कड़वाहट से मुक्त होकर क्षमा और सम्मान के साथ संगत रहें, ताकि आत्मा शांति से काम करे।
3) आशा और प्रमाण में खड़े रहना: उद्धारक के दिन की महिमा को याद रखें और कठिन समय में भी 하나님 की मुहर पर विश्वास बनाए रखें।
उद्धृत अनुभाग (सहायक टिप्पणीकारों के संकेत)
मैथ्यू हेनरी, अल्बर्ट बर्न्स और एडम क्लार्क के पवित्रत्व-आत्मा संदर्भों में: इन फतहों के विचार यह बताते हैं कि आत्मा-शोक की चेतावनी हमारे आचरण के ठहराव के पक्ष में है और उद्धार के प्रत्यक्ष प्रमाण को संरक्षित करती है।
उद्धरण: यदि किसी सूचनात्मक अवसर पर उनके शब्द सीधे उद्धृत हों, तो वे पवित्र आत्मा की स्थापना और उद्धार के पक्ष में आत्मा के साथ स्थिर रहने की आवश्यकता पर बल देते हैं।
इस प्रकार इफिसियों 4:30 हमें याद दिलाता है कि पवित्र आत्मा से हमारा रिश्ता गहरा और निरंतर होना चाहिए, ताकि उद्धार के दिन की छाप हर दिन हमारे व्यवहार में दिखाई दे और आत्मा कभी नहीं शोकित हो।