Old Testament
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रोमियों 5:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
केवल यही नहीं, वरन् हम क्लेशों में भी घमण्ड करें, यही जानकर कि क्लेश से धीरज,
रोमियों 5:3 पद-दर-पद बाइबल टीका
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रोमियों 5:3 समानांतर पद और संबंधित वचन
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याकूब 1:2 (HINIRV) »
हे मेरे भाइयों, जब तुम नाना प्रकार की परीक्षाओं में पड़ो तो इसको पूरे आनन्द की बात समझो*,

याकूब 1:12 (HINIRV) »
धन्य है वह मनुष्य, जो परीक्षा में स्थिर रहता है; क्योंकि वह खरा निकलकर जीवन का वह मुकुट पाएगा, जिसकी प्रतिज्ञा प्रभु ने अपने प्रेम करनेवालों को दी है।

2 कुरिन्थियों 12:9 (HINIRV) »
और उसने मुझसे कहा, “मेरा अनुग्रह तेरे लिये बहुत है; क्योंकि मेरी सामर्थ्य निर्बलता में सिद्ध होती है।*” इसलिए मैं बड़े आनन्द से अपनी निर्बलताओं पर घमण्ड करूँगा, कि मसीह की सामर्थ्य मुझ पर छाया करती रहे।
अर्थ का सीधा विवरण
रोमियों 5:3 में प्रेरित पौलुस क्लेशों को न केवल सहने की, बल्कि उनसे घमण्ड करने की बात करते हैं—यह घमण्ड धैर्य का फल है, जो पवित्र आत्मा के प्रभाव से भीतर बिकुल आत्मविश्वास पैदा करता है कि कठिनाइयों के माध्यम से परमेश्वर हमें दृढ़ बनाता है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
रोमियों का पत्र अर्ध-सभायिती धारणाओं के बीच विश्वास की जीवनीशैली को स्थापित करता है। इस पद में हम देखते हैं कि वे जो स्थितियाँ सामान्यतः अस्वीकार्य समझते, उनके भीतर भी ईश्वर की अन्तर्निहित कृपा और चंगाई की संभावना दिखाते हैं। क्लेश तब आयातित नहीं होता जब हम चिरस्थायी सुख के पीछे भागते हैं, बल्कि यह वह अवसर है जहाँ धैर्य और चरित्र बनता है।
विश्लेषणात्मक अवलोकन
चंद्र-थीम: संकल्प और विश्वास की उन्नति
यथार्थ संदर्भ—अन्य संदर्भों से संयोजन
1) रोमियों 8:28— कि सभी चीजें मिलकर उनका भला करती हैं जो परमेश्वर से प्रेम करते हैं; क्लेश भी इस योजना का भाग हैं।
2) याकूब 1:2–4— परीक्षण कष्टों को खुशी की निगाह से देखने की प्रेरणा देता है ताकि धीरज पूरा हो जाए।
3) रोमियों 12:12— आशा में धैर्य और दु:ख में प्रार्थना के साथ स्थिर रहने का आह्वान।
प्रयोगात्मक निचोड़
क्लेश के समय ईश्वर की कृपा पर भरोसा बनाए रखें; धीरज बनता है, और धीरज अंततः चरित्र को विकसित करता है। यह केवल दर्द का अनुभव नहीं, बल्कि विश्वास के परिपक्व होने की प्रक्रिया है।
कथन-उद्धरण (उद्धृत टिप्पणीकारों से मिलते-जुलते विचार)
Matthew Henry के अनुसार, क्लेश केMethods से प्रेरित धीरज ईश्वर के उद्देश्य के अनुरूप हमारे विश्वास को पुष्ट करता है; Albert Barnes इस धारण को स्पष्ट करते हैं कि धैर्य परीक्षणों के बीच हमारे विश्वास की गहराई दिखाता है; Adam Clarke बताते हैं कि यह घमण्ड का नहीं, बल्कि साहस और आध्यात्मिक दृढ़ता का परिणाम है।
यदि आप चाहें तो ये विचार आराम से पढ़कर अपनी आत्मा के लिए एक ठहराव बनाते हैं—क्योंकि इन पंक्तियों में कष्ट को भी परमेश्वर की शिक्षण क्रिया के रूप में देखा गया है।
संक्षिप्त निष्कर्ष
क्लेश से घमण्ड वह विरल धारण है जो हमारे आत्म-समझ को उन्नत करती है। धीरज उसी क्रम का उत्पादन है जिसका तात्पर्य है—परमेश्वर के उद्देश्य के अनुसार हम कठिनाईयों में भी भरोसा बनाए रखें और उसके अनुसार जीयें।
कठोराई के साथ सुझाव