Old Testament
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रोमियों 5:15 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
पर जैसी अपराध की दशा है, वैसी अनुग्रह के वरदान की नहीं, क्योंकि जब एक मनुष्य के अपराध से बहुत लोग मरे, तो परमेश्वर का अनुग्रह और उसका जो दान एक मनुष्य के, अर्थात् यीशु मसीह के अनुग्रह से हुआ बहुत से लोगों पर अवश्य ही अधिकाई से हुआ।
रोमियों 5:15 पद-दर-पद बाइबल टीका
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रोमियों 5:15 समानांतर पद और संबंधित वचन
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रोमियों 6:23 (HINIRV) »
क्योंकि पाप की मजदूरी* तो मृत्यु है, परन्तु परमेश्वर का वरदान हमारे प्रभु मसीह यीशु में अनन्त जीवन है।

रोमियों 5:12 (HINIRV) »
इसलिए जैसा एक मनुष्य के द्वारा पाप जगत में आया, और पाप के द्वारा मृत्यु आई, और इस रीति से मृत्यु सब मनुष्यों में फैल गई, क्योंकि सब ने पाप किया। (1 कुरि. 15:21-22)

इफिसियों 2:8 (HINIRV) »
क्योंकि विश्वास के द्वारा अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है, और यह तुम्हारी ओर से नहीं, वरन् परमेश्वर का दान है;
मुख्य निष्कर्ष
रोमियों 5:15 में बताये गए तुलना-युक्त शब्दों के माध्यम से प्रेरित लेखन यह सिखाता है कि परमेश्वर का अनुग्रह और यीशु मसीह का वरदान, अपराध के विपरीत, बहुत अधिक और अधिक व्यापक प्रभाव डालते हैं—यह दया की मात्रा नहीं, बल्कि संतोष और उद्धार की उपलब्धता है जो पूरे मानवता के लिए खुली है। যद्यपि एक व्यक्ति के अपराध से बहुत लोग मरते हैं, परमेश्वर का अनुग्रह और दान बहुधा अधिकाई से बढ़कर आता है और यह उद्धार की राह बनाता है।
पाठ-संदर्भ का साहित्यिक context
यह पद पाप और अनुग्रह की तुलनात्मक चर्चा का केंद्र है। पूर्वकथित अनुच्छेदों में Paul बताता है कि Adam के द्वारा पाप entered into the world और उसके कारण मृत्यु प्रभावी हुई; परन्तु यीशु मसीह के द्वारा अनुग्रह और जीवन का दान बहुतेरे जीवों तक पहुँचा। यहाँ “अनेकता से” या “बहुधा” का प्रयोग यह दर्शाता है कि चोट और अवरोध के बजाय प्रभु की कृपा से बहुधा अधिक लाभ मिलता है।
धार्मिक महत्व
गलातियों-यंदियों से संबंध
यहाँ रोमियों में वर्णित “अनेकता से अधिकाई” प्रकरण अन्य NT पाठों से संगति बनाता है—उदा. यीशु के पाप क्षय और जीवन के उपहार का सार्वभौमिकता का विचार। “चुकौती” के बजाय “चर्चित दयाकृपा” का उल्लेख प्रेरित करता है कि उद्धार एक विशेष व्यक्ति के कारण नहीं, बल्कि समग्र प्रेम के कारण है।
प्रेरितों के विचारों से संकेत
Padhaaya गया पाठ Paul की परमेश्वर-प्रकृति के बारे में गहराई से पूछता है: क्या उद्धार का डीएनए एक ही क्रिया है जिसे प्रकृति के आयामों में फैलाया गया है? यह दिखाता है कि अनुग्रह की शक्तियाँ अपने आप में उत्तरदायित्व और आशा बनकर आयीं हैं।
रोम Romans 5:15 से विचार-विन्यास
अर्थात् पाप के कारण जो मृत्यु है, वह परमेश्वर के अनुग्रह और यीशु मसीह के दान द्वारा बहुधा अधिकाई से उपलब्ध है। यह उद्धार के स्रोत के रूप में क्रिया-प्रधान है—न केवल अपराध-निवारण, बल्कि जीवन-जीवंत गर्व से परे एक नई स्थिति।
Cross-reference और उनके छोटے संकेत
1) रोमियों 3:24— अनुग्रह के कारण उद्धार; संपूर्ण विश्वास। यह बताता है कि अनुग्रह का लाभ विश्वास पर निर्भर है, न कि कर्मों पर।
2) रोमियों 6:23— पाप का परिणाम मृत्यु है, परन्तु ईश्वर की दया जीवन का वरदान है।
3) ईफिसियों 2:8–9— उद्धार अनुग्रह द्वारा और विश्वास से, कृपा के कारण, मानव के कर्मों पर नहीं।
प्रेरणा से प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
पाप के परिणाम से मृत्यु एक प्रकृति है, परन्तु परमेश्वर का अनुग्रह और यीशु मसीह का दान बहुधा बढ़कर आता है। यह उद्धार का सार्वत्रिक दायरा है—एक नयी जिंदगी, एक नया संबंध, और एक असीम कृपा।
उद्धरण-संदर्भ: यदि आप Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के समान विचार-रेखा से अमूल्य संकेत देखना चाहें, तो उनके सार्वजनिक-डायरी टिप्पणियों में इस पाठ के अनुग्रह-प्रभाव, प्रभु-उद्धार की व्यापकता, और पाप-हमारी स्थिति के प्रति नम्रता के विश्लेषण मिलते हैं।