Old Testament
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रोमियों 5:9 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तो जब कि हम, अब उसके लहू के कारण धर्मी ठहरे, तो उसके द्वारा परमेश्वर के क्रोध से क्यों न बचेंगे?
रोमियों 5:9 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
रोमियों 5:9 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 थिस्सलुनीकियों 1:10 (HINIRV) »
और उसके पुत्र के स्वर्ग पर से आने की प्रतीक्षा करते रहो जिसे उसने मरे हुओं में से जिलाया, अर्थात् यीशु को, जो हमें आनेवाले प्रकोप से बचाता है।

इफिसियों 2:13 (HINIRV) »
पर अब मसीह यीशु में तुम जो पहले दूर थे, मसीह के लहू के द्वारा निकट हो गए हो।

रोमियों 5:9 पर दृष्टिपात: क्यों महत्त्वपूर्ण है यह verse और इसका मूल संदर्भ
यह पद दर्शाता है कि ईश्वर की चयनित कृपा के अंतर्गत हम मनुष्य के लिए जो दाम बकाया था, वह यीशु मसीह के लहू के द्वारा चुकाया गया है। जब हम अब लहू के कारण धर्मी ठहरे हैं, तब भी परमेश्वर के क्रोध से हमारी सुरक्षा केवल उसी क्रोध-प्रतिशोध से ऊपर है जो पाप के कारण आया था। इस विचार का मूल अर्थ यह है कि क्रूस का बल हमारे लिए बाध्य नहीं बल्कि उद्धार का मार्ग है—न केवल पाप के परिणाम से मोचन, बल्कि परमेश्वर की धर्मी न्याय के साथ एक नई स्थिति प्राप्त करना।
प्रारम्भिक संदर्भ और संदेश
रोमियों पर पत्र रोम के पाठक उन लोगों के लिए लिखा गया था जो इस्लामिक-युग के सामाजिक-धार्मिक दबावों के बीच ईसाई जीवन की गहराई को समझना चाहते थे। पॉल यहाँ यह दिखाते हैं कि नैतिक दुर्बलता, पाप और शारीरिक दोषों के बावजूद ईश्वर की प्रेमपूर्ण न्याय-योजना कैसे सफल होती है। रो 5:9 में बताया गया है कि उद्धार की सर्वोच्च स्थिति—धर्मी ठहरना—हम केवल Jesus के लहू के कारण प्राप्त करते हैं। यह एक न्याय-संगत ईश्वर और प्रेम-प्रधान उद्धारकर्ता का संतुलन-संदेश है।
मुख्य विचार
सुसंगति-आधार: अन्य बाइबल विचार
इस सिद्धांत को और स्पष्ट करने के लिए नीचे तीन cross-references से मदद मिलती है:
इन संदर्भों में प्रेम, न्याय और उद्धार का एक समन्वित चित्र उभरता है—क्रूस बिना उद्धार संभव नहीं, और सही-न्यायपूर्ण ईश्वर के साथ शांति का रास्ता लहू के प्रभाव से संभव होता है।
उद्धार-उद्धार के उद्देश्य के साथ व्यवहार
जो विश्वासी हैं, वे अपने उद्धार को एक जीवित अनुभव के रूप में समझें। यह शरीर-परिणामों से मुक्त नहीं होता, परन्तु पवित्र आत्मा के द्वारा एक नई पहचान देता है। जब भी हम पाप-केन्द्रित व्यवहार से त्रस्त होते हैं, हमें याद रखना चाहिए कि लहू का मूल्य हमें पुनः न्याय-संगत स्थिति में लाता है—हम परमेश्वर के क्रोध से नहीं चुभते, क्योंकि हम मसीह में हैं।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
- क्रोध से भयभीत न रहें; कर्म से नहीं बल्कि मसीह के रक्त के प्रभाव से धर्मी ठहरना संभव है।
- आत्म-निरक्षा के बजाय ईश्वर की कृपा पर निर्भर रहें; आत्म-बल से नहीं, बल्कि यीशु के बलिदान से शक्ति पाएं।
- जीवन में दृढ़ आशा रखें, क्योंकि उद्धार का आधार केवल अपने-अपने कर्म नहीं, बल्कि लहू की रीति है जो पाप के प्रभाव को रोकता है।
संक्षिप्त देवotional सार
जब हम महान पापों से डरे नहीं रोके जाते, तब भी ईश्वर की महिमा वही रहती है। हमारे धर्मी ठहरने का कारण सबसे पहले यीशु का बलिदान है। उसकी लहू के कारण, हम क्रोध से सुरक्षित रहते हैं और नवीन जीवन की ओर बढ़ते हैं। यह सत्य हर परिस्थिति में हमारी आस्था को स्थिर बनाता है—कि उद्धार का मार्ग हर समय, हर घड़ी हमारे साथ है।
उद्धार के इस संदेश को नम्रता और धन्यवाद के साथ ग्रहण करें; क्योंकि यह प्रेम का उच्चतम प्रदर्शन है—ईश्वर ने हमारे लिए स्वयं अपना पुत्र दे दिया।
Cross-reference उपशीर्षक: खासतौर पर प्रयोग करने योग्य पंक्तियाँ सीमित हैं; नीचे दिये गये संदर्भ सिर्फ मार्गदर्शन के लिए हैं:
रोमियों 3:25-26; 1 कोरिंथ 15:22-23; यहोशुवा 2:18 (कथा-आधार)