Old Testament
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रोमियों 5:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
क्योंकि जब हम निर्बल ही थे, तो मसीह ठीक समय पर भक्तिहीनों के लिये मरा।
रोमियों 5:6 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
रोमियों 5:6 समानांतर पद और संबंधित वचन
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रोमियों 5:8 (HINIRV) »
परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा।

कुलुस्सियों 2:13 (HINIRV) »
और उसने तुम्हें भी, जो अपने अपराधों, और अपने शरीर की खतनारहित दशा में मुर्दा थे, उसके साथ जिलाया, और हमारे सब अपराधों को क्षमा किया।

रोमियों 5:6 पर विचार: निर्बलों के समय मसीह की मूरत
इस पद का महत्व यह है कि यह दिखाता है कि परम प्रेम और उद्धार की योजना परमेश्वर के समय-सारिणी के अनुसार पूरी हुई। मसीह उस समय आया जब मानवता आध्यात्मिक कमजोरी और भक्तिहीनता के गहरे पर्वतारोही की स्थिति में थी; इसकी वजह से क्रूस तक पहुँचकर वैकल्पिक व्यवस्था नहीं, बल्कि कृपा का पवित्र कार्य पूरा हुआ। यह विचार हमें यह सिखाता है कि परमेश्वर की कंपनी और उद्धार, हमारे कार्यों से नहीं, बल्कि उसकी कृपा से सीधे जुड़ा है।
पुष्टि का संदर्भ और मूल संदर्भ
इस वाक्य में पौलुस दर्शाते हैं कि मसीह समय के ठीक समय पर आया—भक्तिहीनों के लिए मरा, जब स्थिति अत्यंत निर्बल थी। उस समय रोम की राजधानी और साम्राज्यात्मक परिवेश में नैतिक और आध्यात्मिक गिरावट थी; लोग स्वयं के प्रयासों से उद्धार पाने में असमर्थ थे। परमेश्वर ने इसी कमजोरी के समय परम पवित्र योजना में पश्चात्ताप और विश्वास के मार्ग को खोल दिया।
मुख्य संदेश
आध्यात्मिक थीम्स और समर्पित पाठ
यह वाक्य तीन प्रमुख धागों को जोड़ता है: निर्बलता, विश्वस्त प्रेम, और क्रूस-परक कृपा। जब मानव अपनी कमज़ोरी स्वीकार करता है, तब ईश्वरीय उद्धार की शक्ति अधिक उजागर होती है। यह हमें यह याद दिलाता है कि उद्धार का स्रोत केवल विश्वास है, न कि हमारे अच्छे कर्म।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप में)
यही शास्त्रीक स्रोत अन्य जगह भी इस Theme को पुष्ट करते हैं:
इन सूक्तियों से स्पष्ट होता है कि परमेश्वर की योजना कमजोरियों के बीच भी पूर्ण होती है, और मसीह का कार्य उन कमजोरियों को भी मोड़ देता है जो हमें उद्धार की ओर ले जाते हैं।
सम्बद्ध टिप्पणीकारों से विचार (संक्षेप)
मार्था-हेनरी, बार्न्स और अडम क्लार्क के सार्वजनिक-डायरी-आधारित व्याख्यानों में से एक जैसी पुष्टि मिलती है कि मसीह की मृत्यु परमेश्वर की अति-प्रेम का प्रमाण है, और यह उस समय का उत्तर था जब मानवता निर्बल और भक्तिहीन थी।
देवotional समापन
हम इस वचन से सीखते हैं कि डर और स्व-योग्यता के बजाय, ईश्वर की कृपा में आश्रय लें। जब हम कमजोर पड़ते हैं, तब भी मसीह हमारे लिए मरे—यह आश्वस्त करता है कि उद्धार और प्रेम की सत्ता स्थिर है। वर्तमान समय में भी वही कृपा हमारी आवश्यकता और शक्ति दोनों बनती है; यह सदा नया ग्रहण है, जो हमारे विश्वास को स्थिर बनाए रखता है।
संक्षिप्त क्रॉस-रेफरेंसेस का सार
यूहन्ना 15:5, 2 कुरिन्थियों 12:9, इब्रायियों 4:16—ये तीनों पाठ स्पष्ट करते हैं कि उद्धार की राह निर्बलता में भी खुलती है और इसकी कुंजी विश्वास व कृपा है।
फाइनल विचार: रोमियों 5:6 हमें स्मरण कराता है कि परम प्रेम का दूत क्रूस तक गया—उस समय जब इंसान कमजोर था, तब भी उद्धार संभव हुआ।