Old Testament
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रोमियों 5:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और धीरज से खरा निकलना, और खरे निकलने से आशा उत्पन्न होती है;
रोमियों 5:4 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
रोमियों 5:4 समानांतर पद और संबंधित वचन
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याकूब 1:12 (HINIRV) »
धन्य है वह मनुष्य, जो परीक्षा में स्थिर रहता है; क्योंकि वह खरा निकलकर जीवन का वह मुकुट पाएगा, जिसकी प्रतिज्ञा प्रभु ने अपने प्रेम करनेवालों को दी है।

1 पतरस 5:10 (HINIRV) »
अब परमेश्वर जो सारे अनुग्रह का दाता है, जिसने तुम्हें मसीह में अपनी अनन्त महिमा के लिये बुलाया, तुम्हारे थोड़ी देर तक दुःख उठाने के बाद आप ही तुम्हें सिद्ध और स्थिर और बलवन्त करेगा*।

1 पतरस 1:6 (HINIRV) »
इस कारण तुम मगन होते हो, यद्यपि अवश्य है कि अब कुछ दिन तक नाना प्रकार की परीक्षाओं के कारण दुःख में हो,
रोमियों 5:4 का तात्पर्य और संदर्भ
पदम 5:4 से आरम्भ होने वाले विचार बताते हैं कि दुःखों की प्रक्रिया, धैर्य को विकसित करती है, और धैर्य अंततः आशा को बनाती है। यह उसका क्रम है—कठिनाइयाँ, धैर्य, और फिर आशा। यह पवित्र कथा कहती है कि ईश्वर की क्रिया हमारे अनुभवों के भीतर काम करती है, ताकि हमारी आस्था दृढ़ हो जाए।
ईश्वर और विश्वास के बारे में पाठ से निकलने वाले संकेत
पवित्र वचन बताता है कि trials से समृद्ध धीरज बनता है, जो विश्वास को स्थिर रखता है। जब मनुष्यों के सामने कठिन परीक्षा आती है, तब भी ईश्वर अपने दया-भरे मार्ग से हमारा हाथ थामे रहता है; और धीरज से विकसित आशा हमें बताती है कि परमेश्वर अभी भी हमारे साथ है और उसका वादा पूरा होगा।
मुख्य शब्दों या imagery की स्पष्ट व्याख्या
• धीरज (धैर्य): कठिन समय में स्थिर रहना, निराश न होना, स्वेच्छाचारिता के बजाय विश्वास पर टिके रहना।
• खरा निकलना: परीक्षणों के बीच दृढ़ रहा जाना, बिना डगमगाए ईश्वर के वादे पर टिके रहना।
• आशा: धैर्य के बाद उगने वाला भरोसा कि परमेश्वर के पूर्णकालिक उद्देश्य हमारे लिए भले हैं और वह समय पर पूरी करूंगा।
अन्य सम्बन्धित पाठ
इन cross-refs से स्पष्ट है कि संकट केवल एक समय-वाला चरण नहीं, बल्कि परमेश्वर की पवित्र योजना का भाग है जो हमारी आस्था को परिपक्व बनाता है।
प्रयोगात्मक अनुप्रयोग
आज के विश्वासियों के लिए इस क्रम से सीख यह है कि कठिनाइयों में धैर्य को बढ़ाएं, न कि हतोत्साहित हों। स्थिर प्रार्थना, परमेश्वर के वादे पर स्मरण, और समुदाय में सहायता से धीरज विकसित होता है। जैसे-जैसे धैर्य गहरा होता है, हमारी आशा दृढ़ होती है कि ईश्वर की कृपा समय पर उचित समाधान देगी।
महत्वपूर्ण उद्धरण (क्यों आवश्यक थेरेपी?)
यहां के विचार Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक डोमेन टिप्पणीकारों के अनुरूप संयोजन को उद्धृत किया गया है। नीचे दिए गए बिल्कुल शब्द-शब्द उद्धरण केवल संदर्भ के लिए हैं:
• Matthew Henry: “The trial of our faith worketh patience.” (निकट संदर्भ में प्रत्यक्ष उद्धरण का संक्षेपित सार)
• Albert Barnes: trials produce perseverance and hope, refining faith through experience.
• Adam Clarke: through tribulation, endurance is formed, and endurance produces hope.
नोट: ऊपर के उद्धरण केवल प्रवचनों के संकेत देते हैं। यदि आवश्यक हो तो आप मौलिक संदर्भ पाठ से विस्तृत उद्धरण देख सकते हैं।