Old Testament
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रोमियों 5:14 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तो भी आदम से लेकर मूसा तक मृत्यु ने उन लोगों पर भी राज्य किया*, जिन्होंने उस आदम, जो उस आनेवाले का चिह्न है, के अपराध के समान पाप न किया।
रोमियों 5:14 पद-दर-पद बाइबल टीका
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रोमियों 5:14 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 कुरिन्थियों 15:45 (HINIRV) »
ऐसा ही लिखा भी है, “प्रथम मनुष्य, अर्थात् आदम, जीवित प्राणी बना” और अन्तिम आदम, जीवनदायक आत्मा बना।

रोमियों 8:22 (HINIRV) »
क्योंकि हम जानते हैं, कि सारी सृष्टि अब तक मिलकर कराहती और पीड़ाओं में पड़ी तड़पती है।

रोमियों 5:17 (HINIRV) »
क्योंकि जब एक मनुष्य के अपराध के कारण मृत्यु ने उस एक ही के द्वारा राज्य किया, तो जो लोग अनुग्रह और धर्मरूपी वरदान बहुतायत से पाते हैं वे एक मनुष्य के, अर्थात् यीशु मसीह के द्वारा अवश्य ही अनन्त जीवन में राज्य करेंगे।
रोमियों 5:14 पर commentary — जीवन, पाप और इतिहास का अवलोकन
यह श verse हमारे लिए एक अहम जाँच लेकर आता है: क्रिया-व्यापी मृत्यु कैसे आदम से मूसा तक आकाश के नीचे के लोगों के बीच शासन करती रहीं—इतिहास का यह भाग बताता है कि पाप की बाधाओं और दायित्वों के बावजूद ईश्वर की योजना कितनी गहरी और ठोस है। इस व verse में लिखा गया संकेत यह है कि आदम के अपराध के प्रतीक के रूप में आने वाले मसीह के आगमन से पहले भी मृत्यु ने मानवीयता पर प्रभाव डाला था, और यह स्मरण कराता है कि परमेश्वर का राज्य, धार्मिक लोकाचार और पाप पर रोक लगाने की क्षमता, सिर्फ एक क्षणिक घटना नहीं है, बल्कि एक ऐसी योजना है जो पूर्णता तक फैली है।
प्रतीकात्मक संदर्भ और मूल संदर्भ
पद कहता है कि “तो भी आदम से लेकर मूसा तक मृत्यु ने उन लोगों पर भी राज्य किया, जिन्होंने उस आदम, जो उस आनेवाले का चिह्न है, के अपराध के समान पाप न किया।” यह मिथ्या तुलना नहीं, बल्कि एक सच्ची समझ देता है: आदम के पाप का प्रभाव सभी मानव-जाति पर पड़ा। परन्तु मूसा के समय तक मृत्यु के साथ-साथ चेलों और राष्ट्रों में पाप के परिणामों के स्वरूप में कुछ भिन्नताएँ भी देखने को मिलती हैं। नया नियम कहना है कि उस आनेवाले चिह्न का प्रतीक भी पहले कदम पर परख नहीं गया; फिर भी मृत्यु ने उस समय भी शासन किया जब लोग परमेश्वर के चिह्न और नियमों से परे हो रहे थे।
मूल संदेश
इस पद का प्रमुख संदेश यह है कि पाप के प्रभाव ने सभी मनुष्यों को प्रभुत्व में लिया, भले ही वे हर एक व्यक्ति सीधे आदम के जैसे न चले हों। लेकिन परमेश्वर की योजना में एक नया मोड़ है: आने वाला यह चिह्न—यानी मसीह—जो नहीं केवल एक इतिहास-चिह्न है, बल्कि पाप के राज को चुनौती देने वाला है। इस जमा-स्थिति में भी देव-कार्य का लक्ष्य न्याय और जीवन के मार्ग को खोलना है, ताकि सचेत और विश्वासमें रहने वाले लोग भी उद्धार पा सकें।
मुख्य थीम्स और संगत बाइबल उपदेश
उपयुक्त क्रॉस-रेफरेंसेस
य audit-lite cross references: रोमियों 3:10-12; 8:3; 1 कुरिन्थियों 15:21-22।
संदर्भ-व्याख्या:
एतिहासिक-तकनीकी विचार
यह संदर्भ हमारे लिए यह दर्शाता है कि बाइबल का इतिहास एक निरंतर कथा है—पाप, दण्ड, और उद्धार के बीच का संघर्ष—जो अंततः पुनर्जीवन और स्थिरता की ओर ले जाता है। यह विचार कुछ प्रसिद्ध टिप्पणीकारों के दृष्टिकोण से भी सहारा पाता है:
Matthew Henry के अनुसार, यह स्पष्ट संकेत है कि पाप के प्रभाव का दायरा व्यापक है और उद्धार की आवश्यकता universal है, जिससे विश्वासयोग्य सभी लोग भागीदार बनते हैं। Albert Barnes भी पाप के प्रभाव और मसीह के आगमन के क्रम को समझाते हैं, मानते हैं कि पुराने कानून के विशाल इतिहास में भी पाप और मृत्यु की शक्ति बनी रहती है, पर नया सामर्थ्य आने के साथ उद्धार की राह खुलती है। Adam Clarke ने यह कहा है कि इस verse में पुरानी व्यवस्था से नई व्यवस्था के बीच एक bridge बनता है, जिसमें मृत्यु के शासन को एक समय पर सीमित दिखाया गया है ताकि बहती-जाने असफलताओं के बीच भी प्रभु की महिमा चमक उठे।
देवotional reflection
हम इस verse को देखते हैं तो याद आता है: मानवता को पाप से मुक्त कराने की ईश्वर की योजना कितनी गहरी है। चाहे आप आज स्वयं को पाप के कठिन दबाव में पाएं, या इतिहास की गहराइयों में मानवता के संघर्ष देखें, याद रखें कि आरोहण का मार्ग वही है जो ईश्वर ने तय किया है—यीशु मसीह के माध्यम से। यह भरोसा हमें धैर्य और आशा देता है कि मृत्यु और पाप के बावजूद, जीवन की नई रोशनी चमक सकती है।