Old Testament
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रोमियों 5:21 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
कि जैसा पाप ने मृत्यु फैलाते हुए राज्य किया, वैसा ही हमारे प्रभु यीशु मसीह के द्वारा अनुग्रह भी अनन्त जीवन के लिये धर्मी ठहराते हुए राज्य करे।
रोमियों 5:21 पद-दर-पद बाइबल टीका
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रोमियों 5:21 समानांतर पद और संबंधित वचन
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रोमियों 5:14 (HINIRV) »
तो भी आदम से लेकर मूसा तक मृत्यु ने उन लोगों पर भी राज्य किया*, जिन्होंने उस आदम, जो उस आनेवाले का चिह्न है, के अपराध के समान पाप न किया।

तीतुस 2:11 (HINIRV) »
क्योंकि परमेश्वर का अनुग्रह प्रगट है, जो सब मनुष्यों में उद्धार लाने में सक्षम है*।

रोमियों 6:23 (HINIRV) »
क्योंकि पाप की मजदूरी* तो मृत्यु है, परन्तु परमेश्वर का वरदान हमारे प्रभु मसीह यीशु में अनन्त जीवन है।
रोमियों 5:21 पर निबंधित व्याख्या
मुख्य बिंदु: पाप के राज को समाप्त कर अनुग्रह के राज्य को स्थापित करता है यीशु मसीह; जहाँ एक तरफ मृत्यु पाप के कारण फैलती है, वहीं वहाँ अनंत जीवन और धर्म बनाए रखने के लिए अनुग्रह कार्य करता है, ताकि धर्मी ठहराए जाएँ। इस पद में, पाप की पकड़ और अनुग्रह की अधिक गूंजती विजय का चक्र स्पष्ट होता है: पाप ने मृत्यु को राज्य किया; अनुग्रह ने उसी अर्थ में, आजीवन, धार्मिक स्थिति के लिए धर्म ठहराने का अधिकार दिया।
साहित्यिक संदर्भ (लिटरेरी कॉन्टेक्स्ट)
रोमियों की पुस्तक में पॉल ने मानव जाति के पुरखों से आरम्भिक पाप के प्रभाव, कानून की अभाव, और फिर सुसमाचार के माध्यम से ऋण-चुकता के मार्ग को पेश किया। इस पद में "जैसा ... राज्य किया" की संरचना पाप-राज्य और अनुग्रह-राज्य के बीच तुलना प्रस्तुत करती है।
धार्मिक महत्त्व
1) अनुग्रह—जीवन का स्रोत: जैसे पाप ने मृत्यु के अधिकार को स्थापित किया, वैसे ही प्रभु यीशु मसीह के द्वारा अनुग्रह ने जीवन को स्थाई और प्रभावी बना दिया है। 2) धर्मी ठहरना—क्रिस्तीय न्याय: पवित्र-न्याय के अनुसार मसीह के द्वारा दया और धर्मी ठहराव का प्रकाशित होना दर्शाता है कि विश्वास के राज्य में उपलब्धि है। 3) चक्र का पुनर्निर्माण: मृत्यु के बराबर से जीवन की ओर की यह दिशा मानव इतिहास में परिवर्तन का संकेत है।
क्रॉस-रेफरंसेज और उनका संक्षिप्त संबंध
परिचर्चित प्रश्न (Reflection)
संक्षिप्त निष्कर्ष
रोमियों 5:21 हमें याद दिलाता है कि पाप की ताकत मृत्यु के कारण राज्य करती रही, किंतु अनुग्रह की ताकत प्रभु यीशु मसीह के माध्यम से मृत्यु पर विजय और जीवन के राज्य को स्थापित करती है। जहां पाप ने कब्जा किया, वहाँ अनुग्रह ने धर्मी ठहराने का अधिकार देकर धर्म और जीवन में नया 왕त्व दिया है।
पूर्व-आधार उद्धरण (नोट)
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Matthew Henry और Adam Clarke के विचारों को संक्षेप में समाहित किया गया है: “अनुग्रह भी अनन्त जीवन के लिये धर्मी ठहराते हुए राज्य करे”—यह विचार उनके क्रियात्मक धर्मी-स्थापना के अनुरूप है।