Old Testament
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रोमियों 5:16 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और जैसा एक मनुष्य के पाप करने का फल हुआ, वैसा ही दान की दशा नहीं, क्योंकि एक ही के कारण दण्ड की आज्ञा का फैसला हुआ, परन्तु बहुत से अपराधों से ऐसा वरदान उत्पन्न हुआ कि लोग धर्मी ठहरे।
रोमियों 5:16 पद-दर-पद बाइबल टीका
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रोमियों 5:16 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यशायाह 1:18 (HINIRV) »
यहोवा कहता है, “आओ*, हम आपस में वाद-विवाद करें: तुम्हारे पाप चाहे लाल रंग के हों, तो भी वे हिम के समान उजले हो जाएँगे; और चाहे अर्गवानी रंग के हों, तो भी वे ऊन के समान श्वेत हो जाएँगे।

प्रेरितों के काम 13:38 (HINIRV) »
इसलिए, हे भाइयों; तुम जान लो कि यीशु के द्वारा पापों की क्षमा का समाचार तुम्हें दिया जाता है।

उत्पत्ति 3:6 (HINIRV) »
अतः जब स्त्री ने देखा* कि उस वृक्ष का फल खाने में अच्छा, और देखने में मनभाऊ, और बुद्धि देने के लिये चाहने योग्य भी है, तब उसने उसमें से तोड़कर खाया; और अपने पति को भी दिया, जो उसके साथ था और उसने भी खाया। (1 तीमु. 2:14)
रोमियों 5:16 परिदृश्य और संदेश
रोमियों 5:16 में पाप के एक ही परिणाम के विरुद्ध दान की अनुग्रह की विपरीत गाथा प्रस्तुत है—जहाँ पहलीAdam के पाप से दण्ड का एक निर्णायक परिणाम आता है, वहीं नए दाय से बहुत से अपराधों के बावजूद एक वरदान उत्पन्न हुआ जो हमें धर्मी ठहराता है। यह वाक्य पौलुस के दृष्टिकोण का एक केंद्रबिंदु है: धर्म और उद्धार का स्रोत एक ही परमेश्वर की अनुग्रहपूर्ण योजना है, जिसमें पाप के कारण होने वाला दण्ड और विश्वास के द्वारा मिलने वाला न्याय दोनों एक दिशा में काम करते हैं।
केंद्र बिंदु
यह पंक्ति बताती है कि परमप्रधान ईश्वर की योजना में, पाप के परिणामों के कारण जो दण्ड आया, वही एक मात्र कारण नहीं कि दान भी असमर्थ रहे; बल्कि पाप एक ही कारण से दण्ड देता है, परन्तु विश्वास में आने पर दान का भंडार अधिक बहुगुणित होकर जुड़ जाता है। इस तुलना से यह स्पष्ट होता है कि दान का प्रभाव केवल बराबरी की राहत नहीं देता, बल्कि धर्मी ठहराने का एक नया स्तर स्थापित करता है, जो पाप के कारण पहले से अनुमेय नहीं था।
दो-तीन प्रमुख थीम
संबंधित पाठ
इस विचारधारा को समझाने के लिए कुछ दृश्य संदर्भ उपयोगी हैं:
इन संदर्भों से समझ आता है कि पवित्र लेखन एक संतुलन प्रदर्शित करता है—पाप से दण्ड और दान से धर्मी ठहरना एक ही ईश्वरीय पहल से नियंत्रित होते हैं।
व्यावहारिक चिंतन
किसी भी दिनचर्या में इस वचन से प्रेरणा लें: जब हमें एहसास होता है कि हमने पाप किया है, तो आशा का मार्ग है—ईश्वर की अनुग्रह से उद्धार संभव है। जीवन के हर क्षेत्र में धर्मी व्यवहार का निरंतर अभ्यास करें, क्योंकि दान केवल एक बिंदु नहीं, बल्कि एक जीवनशैली है जो विश्वास पर स्थिर रहती है।
सीधे निष्कर्ष
रोमियों 5:16 सिखाता है कि पाप के कारण दण्ड और दान के कारण धर्मी ठहरना एक ही ईश्वरीय योजना के दो परिणाम हैं। यह अनुग्रह का महान विधान है: एक जन्म से नहीं, परन्तु विश्वास से—हम परमेश्वर की पुण्यताओं में पुनः जीवित होते हैं।
संक्षिप्त उद्धरण उल्लेख
यदि उपलब्ध हो, नीचे पवित्र-लेखन पर आधारित पुराने सार्वजानिक टिप्पणीकारों के सीधे उद्धरणों के लिए संकेत दिया जाएगा: मैथ्यू हेनरी, अल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के संक्षिप्त शब्द।