Old Testament
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रोमियों 5:19 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
क्योंकि जैसा एक मनुष्य के आज्ञा न मानने से बहुत लोग पापी ठहरे, वैसे ही एक मनुष्य के आज्ञा मानने से बहुत लोग धर्मी ठहरेंगे।
रोमियों 5:19 पद-दर-पद बाइबल टीका
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रोमियों 5:19 समानांतर पद और संबंधित वचन
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फिलिप्पियों 2:8 (HINIRV) »
और मनुष्य के रूप में प्रगट होकर अपने आप को दीन किया, और यहाँ तक आज्ञाकारी रहा कि मृत्यु, हाँ, क्रूस की मृत्यु भी सह ली।

रोमियों 5:18 (HINIRV) »
इसलिए जैसा एक अपराध सब मनुष्यों के लिये दण्ड की आज्ञा का कारण हुआ, वैसा ही एक धार्मिकता का काम भी सब मनुष्यों के लिये जीवन के निमित्त धर्मी ठहराए जाने का कारण हुआ।

2 कुरिन्थियों 5:21 (HINIRV) »
जो पाप से अज्ञात था, उसी को उसने हमारे लिये पाप ठहराया, कि हम उसमें होकर परमेश्वर की धार्मिकता बन जाएँ।
क्यों यह वचन महत्वपूर्ण है
रोमियों 5:19 ईश्वर के उद्धार की योजना में एक केंद्रीय तर्क को संक्षेप करता है: मानव इतिहास में अदम और मसीह की दो चिह्नित प्रवृत्तियाँ — अवज्ञा और आज्ञापालन — व्यापक प्रभाव रखती हैं। यह वचन बताता है कि एक ही व्यक्ति के कर्म से अनगिनत लोगों पर प्रभाव पड़ता है, इसलिए व्यक्तिगत आज्ञापालन या अवज्ञापालन का सार्वजनिक और ऐतिहासिक परिणाम है। यह ज्ञान व्यक्तिगत नैतिकता, संवेदना और चर्च की मission को समझने में मदद करता है।
मूल संदर्भ
पौलुस यहाँ रोमियों के पत्र के मध्य में चर्चा कर रहा है कि पाप और अनुग्रह कैसे दुनिया में प्रवेश किए और उनका प्रभाव क्या रहा। पाठ से पहले के तर्क में वह बताता है कि आदम के पाप ने मृत्यु और दोष को सभी में प्रविष्ट कराया; अब वह तुलना करके दिखाता है कि मसीह के अधीन आज्ञा मानने से कैसे न्याय और जीवन फैलता है। यह वचन, कुल मिलाकर, एक विरोधाभास—एक स्रोत से गिरावट, दूसरे स्रोत से उद्धार—को सामने रखता है।
मुख्य संदेश
पौलुस का रोशनी में कहना है कि मानवता पर उत्कृष्ट प्रभाव व्यक्तिगत निर्णयों के कारण आता है। आदम की अवज्ञा से “बहुत लोग पापी ठहरे” — अर्थात् आदम का दोष पूरे मानवता को प्रभावित करने वाला है। इसी तरह मसीह का आज्ञापालन भी सार्वभौमिक प्रभाव रखता है: उसके समर्पण और आज्ञा मानने से कई लोग न्यायी ठहराए जाते हैं। गरिमा यह है कि उद्धार एक व्यक्तिगत घटना ही नहीं, बल्कि इतिहास में विस्तृत क्रिया है।
समर्थक बाइबिल विषय
प्रासंगिक क्रॉस-रेफरेंस
1) उपदेशों में आदम और मसीह की तुलना: 1 कुरिन्थियों 15:22 का संदर्भ—जहाँ कहा गया है कि “जिसी में आदम में मरते हैं, उसी में मसीह में जी उठेंगे।” यह दिखाता है कि दोनों व्यक्तियों के कर्मों का सार्वभौमिक प्रभाव है।
2) रोमियों 3:23–24: पाप और रighteousness के विषय की पृष्ठभूमि; यहाँ भी बताया जाता है कि मनुष्यों ने पाप किया, पर अनुग्रह के द्वारा धर्मी ठहराए जाते हैं।
3) इब्रानियों 2:14–17: मसीह ने मानवता के साथ भागीदारी ली ताकि वह मौत और पाप के बद्धों को छुड़ा सके—यह विचार रोमियों 5 के तर्क को औषधीय रूप में मजबूती देता है।
प्रकाश डालने वाले पारंपरिक टिप्पणियाँ (संक्षेप में)
मैथ्यू हेनरी ने संक्षेप में कहा कि आदम के पाप का प्रभाव सार्वजनिक और सार्वभौमिक है, और मसीह की आज्ञा का प्रभाव भी व्यापक है—एक प्रकार का प्रतिस्थापन प्रभाव। अल्बर्ट बार्न्स ने जोर दिया कि पौलुस का तर्क नैतिक और दैवीय आदेश के परिणामों पर आधारित है। एडम क्लार्क ने बताया कि "एक मनुष्य" की प्रतिनिधि भूमिका दोनों पक्षों में निर्णायक है। (उपरोक्त लेखकों के उद्धरणों के लिए संदर्भ: Matthew Henry; Albert Barnes; Adam Clarke — संक्षेप उद्धरण स्वरुप विचार सम्मिलित किया गया है।)
अंतिम विचार और ध्यानार्थ
रोमियों 5:19 हमें याद दिलाता है कि हमारे व्यक्तिगत निर्णय अकेले नहीं रहते। आदम की तरह अवज्ञा का रास्ता अनेकों को गिरावट में ले जा सकता है; पर मसीह की तरह आज्ञापालन का मार्ग भी अनेकों को जीवन की ओर ले जा सकता है। इसलिए यह वचन आत्म-निरीक्षण और समुदाय के लिए प्रेरणा देता है: क्या हमारे शब्द और कर्म ऐसे हैं कि वे जीवन और न्याय को फैलाएँ? व्यक्तिगत नज़रिये से, यह हम पर उभरे हुए प्रश्न के साथ छोड़ता है—क्या मैं उस प्रकार का प्रतिनिधि हूं जो दूसरों के लिए आशा और उद्धार का माध्यम बनता है?