Old Testament
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रोमियों 5:13 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
क्योंकि व्यवस्था के दिए जाने तक पाप जगत में तो था, परन्तु जहाँ व्यवस्था नहीं, वहाँ पाप गिना नहीं जाता।
रोमियों 5:13 पद-दर-पद बाइबल टीका
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रोमियों 5:13 समानांतर पद और संबंधित वचन
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रोमियों 4:15 (HINIRV) »
व्यवस्था तो क्रोध उपजाती है और जहाँ व्यवस्था नहीं वहाँ उसका उल्लंघन भी नहीं।

1 यूहन्ना 3:4 (HINIRV) »
जो कोई पाप करता है, वह व्यवस्था का विरोध करता है; और पाप तो व्यवस्था का विरोध है।

रोमियों 5:13 पर व्याख्या: व्यवस्था के बिना पाप की हालत
मुख्य interpretive बिंदु: पाप संसार में तब तक स्पष्ट नहीं था जब तक व्यवस्था नहीं आई; कानून आने से पहले भी पाप था, पर उसके लिए गिनती नहीं होती थी। यह आयतन इस बात को दर्शाता है कि कानून के प्रत्यक्ष संदर्भ के भीतर पाप को स्पष्ट पहचाना जाता है, और अपराध-गणना का आधार कानून ही बनता है।
साहित्यिक संदर्भ
पद रोमियों 5–7 अध्याय में पाप, कानून और प्रेरित विश्वासियों की स्थिति पर एक सम्यक परिप्रेक्ष्य देता है। यहाँ पवित्रशास्त्र समझाता है कि कानून के उभरे बिना भी संसार में पाप था, परन्तु “जहाँ व्यवस्था नहीं, वहाँ पाप गिना नहीं जाता”—यानी कानून के कारण ही पाप की गणना सुस्पष्ट होती है। Apostle Paul यह दिखाते हैं कि पाप और व्यवस्था दो अवधारणाएँ हैं—पहले पाप की प्रकृति न पहचान पर्याप्त थी, लेकिन कानून ने दायित्व, जवाबदेही और नैतिक स्पष्टता दी।
theological significance (धर्मशास्त्रीय महत्व)
यह वाक्य दिखाता है कि कानून उसे अज्ञान नहीं बनाते जो पाप से मुक्त हैं; बल्कि पाप की सच्चाई और उसकी मांग कानून से ही उभर कर सामने आती है। इसे हम निम्नलिखित बिंदुओं में समझते हैं: - कानून ने पाप की पहचान और दण्ड के मानक दिए। - पाप तब भी मौजूद था, पर उसका अपराध-गणना कानून आने के बाद ही संभव हो पाती है। - यह व्यवस्था-केवलता नहीं, बल्कि गहरे Grace के लिए पंरपरा है जिसमें विश्वास द्वारा उद्धार की आवश्यकता स्पष्ट होती है—क्योंकि चूँकि पाप के संदर्भ और दायित्वों की परीक्षा कानून से होती है, इसलिए विश्वास अब Gesetz के अनुसार नहीं, बल्कि परमेश्वर की कृपा के अनुसार जीना सिखाता है।
Cross-references (संकेतित क्रॉस-रेफरेंसेस)
इन क्रॉस-रेफरेंसेस से यह स्पष्ट होता है कि कानून–पाप–उद्धार का क्रम विश्वास के पूर्ण आयाम को रेखांकित करता है: कानून पाप की प्रकृति को दिखाता है; उद्धार grace से आता है और विश्वास में जीने की नई जिंदगी देती है।
प्रश्न-प्रतिबिंब
खुला निष्कर्ष
Romans 5:13 यह संदेश देता है कि कानून-पुण्य-गुण नहीं, बल्कि पाप की परख और दायित्व के लिए एक संदर्भ स्थापित करता है। लेकिन उद्धार के लिए हमारी गति विश्वास और कृपा से जुड़ी है। यह अध्याय हमें प्रेरित करता है कि हम कानून को जानकर भी उसके मुकाम पर जीवन न छोड़ें, बल्कि परमेश्वर की कृपा में जीवन यापन करें।
महत्वपूर्ण उद्धरण (यदि उपलब्ध): Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के मूल-रेपर्स से यदि कोई सीधी पंक्ति उपलब्ध हो, तो उसे वांछित जगहों पर उद्धृत किया गया है; यहां यदि सीधे पाठ नहीं दिया गया है तो उनके विचारों के सार का स्वागत है।