Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीरोमियों 5:10 बाइबल पद की व्याख्या
रोमियों 5:10 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
क्योंकि बैरी होने की दशा में उसके पुत्र की मृत्यु के द्वारा हमारा मेल परमेश्वर के साथ हुआ, फिर मेल हो जाने पर उसके जीवन के कारण हम उद्धार क्यों न पाएँगे?
रोमियों 5:10 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
रोमियों 5:10 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

2 कुरिन्थियों 5:18 (HINIRV) »
और सब बातें परमेश्वर की ओर से हैं*, जिस ने मसीह के द्वारा अपने साथ हमारा मेल मिलाप कर लिया, और मेल मिलाप की सेवा हमें सौंप दी है।

रोमियों 8:32 (HINIRV) »
जिस ने अपने निज पुत्र को भी न रख छोड़ा, परन्तु उसे हम सब के लिये दे दिया, वह उसके साथ हमें और सब कुछ क्यों न देगा?

2 कुरिन्थियों 4:10 (HINIRV) »
हम यीशु की मृत्यु को अपनी देह में हर समय लिये फिरते हैं*; कि यीशु का जीवन भी हमारी देह में प्रगट हो।
रोमियों 5:10 – यह सुसमाचार क्यों महत्व रखता है?
यह वचन बताता है कि परमेश्वर के साथ हमारा मेल कैसे हुआ और वह मेल क्यों अंतिम रूप से उद्धार की कुंजी है। यद्धपि हम शैतान के कारण बैरी हुए थे, तो भी परमेश्वर ने अपने पुत्र मरे बिना नहीं रखा; उसका बलिदान हमारे गिरे हुए स्वभाव को जगाकर उसे फिर से जीवन देता है। यह वचन विश्वासयोग्य प्रेम की चिरस्थायी दृढ़ता को उद्घाटित करता है: अगर मेल हो गया है तो उद्धार कैसे संभव है? इस छोटे वाक्य में ईश्वर की महान कृपा, मनुष्यों के दोष और Christ के द्वारा किए गए माध्यम से उद्धार का पूर्ण आश्वासन छुपा है।
原 Context का सार
रोमियों के पाठ में पौलुस यीशु मसीह के द्वारा मनुष्य के भीतर प्रविष्ट 息 परिवर्तन की गाथा बताते हैं। प्रारम्भ में मानवता पाप के कारण परमेश्वर से दूर हो गई, परन्तु यीशु मसीह के बलिदान से वह दूरी मिटती है। यह verse “बैरी होने की दशा” (अर्थ: पापी अवस्था) में हुए युद्ध को उद्धार की दिशा देती है और यह स्पष्ट करती है कि कर्मकांडों से नहीं, बल्कि यीशु के कारण ही हमारे साथ उद्धार का संबंध बना है।
मुख्य संदेश
1) बैरी अवस्था में भी परमेश्वर प्रेम दिखाता है: मसीह की मृत्यु के द्वारा हमारे साथ मेल हुआ। 2) मेल बन जाने पर उद्धार के रास्ते खुलते हैं: अब जीवन के कारण भी उद्धार संभव। 3) यह उद्धार सतही नहीं, बल्कि जीवन-परिवर्तनकारी है—हम नवजीवन के भीतर परमेश्वर के साथ स्थिर संबंध बनाते हैं।
पवित्रशास्त्रीय थीम्स
क्रॉस रेफरेंसेस (संक्षेप में, बिना पूर्ण पद उद्धरण)
- यूहन्ना 3:16 के प्रेम-व्यवहार पर आधारित अनुभाव: परमेश्वर ने संसार से ऐसा प्रेम किया कि अपने पहलेपन्न पुत्र को दिया ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, उद्धार पाए। यह विचार रोमियों 5 के उद्धार के आधार को पुष्ट करता है।
- रोमियों 3:24-25: उद्धार और विश्वास के जरिए चुकौती का तथ्य, जो हमारे पापों के कारण धर्मी ठहराता है।
- 1 कुरिन्थियों 15:22: पहले मानव के कारण मृत्यु, पर दूसरे मानव के कारण जीवन की आशा प्रवर्तित होती है।
टिप्पणी से मिलने वाले निष्कर्ष
- मैथ्यू हेनरी: परमेश्वर का प्रेम एक ऐसे क्रिया-कार्य के रूप में दिखता है जिसमें उन्होंने हमारे पापों के परिणामों से हमें मुक्त कर दिया। उद्धार की राह केवल मसीह के मरने से संभव है।
- एलबर्ट बार्न्स: बैरी स्थिति से मेल बनना, पुनर्जीवन प्राप्त करना—ये सब परमेश्वर की कृपा के साथ सम्बन्धित हैं। यह विश्वासियों को आश्वासन देता है कि उद्धार स्थायी है।
- एडम क्लार्क: मसीह की मृत्यु से जो मेल बना है, वह पाप के कारण पहले से टूटी हुई fellowship को पुनः स्थापित करता है और जीवन के स्रोत के रूप में उद्धार की घोषणा करता है।
संयुक्त सार
रोमियों 5:10 हमें दिखाता है कि परमेश्वर की कृपा कैसे काम करती है—पहले हम शत्रु थे, फिर मेल हुआ और अब जीवन के कारण उद्धार संभव है। यह केवल निजी विश्वास का विषय नहीं, बल्कि ऐसी सत्ता है जो दिन-प्रतिदिन हमारे आचरण, आशा और संबंधों को नई दिशा देती है।
व्यावहारिक ध्यान