Old Testament
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रोमियों 5:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और आशा से लज्जा नहीं होती, क्योंकि पवित्र आत्मा जो हमें दिया गया है उसके द्वारा परमेश्वर का प्रेम हमारे मन में डाला गया है।
रोमियों 5:5 पद-दर-पद बाइबल टीका
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रोमियों 5:5 समानांतर पद और संबंधित वचन
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गलातियों 4:6 (HINIRV) »
और तुम जो पुत्र हो, इसलिए परमेश्वर ने अपने पुत्र के आत्मा* को, जो ‘हे अब्बा, हे पिता’ कहकर पुकारता है, हमारे हृदय में भेजा है।

फिलिप्पियों 1:20 (HINIRV) »
मैं तो यही हार्दिक लालसा और आशा रखता हूँ कि मैं किसी बात में लज्जित न होऊँ, पर जैसे मेरे प्रबल साहस के कारण मसीह की बड़ाई मेरी देह के द्वारा सदा होती रही है, वैसा ही अब भी हो चाहे मैं जीवित रहूँ या मर जाऊँ।

इफिसियों 3:16 (HINIRV) »
कि वह अपनी महिमा के धन के अनुसार तुम्हें यह दान दे कि तुम उसके आत्मा से अपने भीतरी मनुष्यत्व में सामर्थ्य पा कर बलवन्त होते जाओ,
रोमियों 5:5 पर दृष्टिकोण
युवा और पुख़्ता विश्वास के मार्ग पर यह वाक्य दर्शाता है कि परमेश्वर का प्रेम हमारे भीतर कैसे बगैर निराशा के उगता है। रोमियों के अध्याय 5 में, पवित्र चरित्र की गहराई और उद्धार की योजना की पुष्टि मिलती है: tribulations से गहरे अनुभव, और आशा से स्थिरता। इसVerse (रोमियों 5:5) में कहा गया है कि आशा से लज्जा नहीं होती—क्योंकि जो प्रेम 우리 मन में डाला गया है, वह परमेश्वर का है और यह हमारे मन में पवित्र आत्मा के द्वारा प्रवेश-पात्र बनकर आता है।
पृष्ठभूमि और पाठ का हल्का सार
पौलुस इस खण्ड में प्रमाणित करता है कि ईश्वर के उद्धार का क्रम हमारे विश्वास से जन्म लेता है: निराशा में भी आशा रहती है, क्योंकि क्रूस तक पहुँचने के बाद भी प्रेम और प्रतिज्ञान स्थिर रहते हैं। इस संदेश की कुंजी है—पवित्र आत्मा का आचरण में प्रवेश और प्रेम की क्रिया।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
मुख्य सन्देश: विचार करें कि प्रेम केवल बाहरी भाव नहीं, बल्कि वे गहराई में डाला गया स्वाभाविक जीवन है जो हमारी निर्बलताओं के भीतर भी काम करता है। आशा जन्म लेती है नहीं तो जब तक नहीं—परन्तु उद्धार के गतिशील कारण के रूप में आत्मा का प्रेम हमारे मन में प्रकट होता है।
अनुसंधान-संबंधी तुलनाएं
व्यावहारिक अर्थ यह है कि कठिन परिस्थितियों में भी हम उस प्रेम की याद रखें जो हमारे भीतर जन्म लेता है और जो आत्मा के प्रभाव से सक्रिय रहता है।
आज्ञात्मक अनुप्रयोग
संक्षेप
रोमियों 5:5 बताता है कि आशा से लज्जा नहीं होती, क्योंकि परमेश्वर का प्रेम 우리의 मन में डाला गया है और यह पवित्र आत्मा के द्वारा होता है। यह प्रेम न केवल एक भाव है, बल्कि एक सक्रिय जीवन-जगत प्रक्रिया है जो विश्वास, धैर्य और उद्धार कीपूर्णता तक हमें ले जाती है।
छोटे उद्धरण (संदर्भित पर्सनल टिप्पणी से)
यदि आप Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-domain टिप्पणियों से किसी संक्षिप्त स्पष्ट विचार को उद्धृत करना चाहें, तो वे इसे अध्याय-आधारित विश्लेषण के रूप में प्रस्तुत करते हैं—पर पूर्ण टेक्स्ट से हटकर एक सूक्ष्म संकेत भर: “पवित्र आत्मा के प्रेम के कारण ही आशा ऐसा पुष्ट होता है जो संसार की घटनाओं से परे स्थिर रहता है।”
क्रॉस-रेफरेंस
1) रोमी 8:28 – कठिन समय में भी परमेश्वर की व्यवस्था के प्रति विश्वास की पुष्टि; यह verse 5:5 के प्रेम-आधार को मजबूत बनाता है।
2) 1 यूहन्ना 4:16 – ईश्वर के प्रेम में हमारा स्थायित्व; आत्मा का प्रेम हमें भय से मुक्त करता है।
3) याकूब 1:2-4 – धैर्य से विकास और आशा का अनुपालन; आत्मा के प्रेम से यह धैर्य संभव होता है।